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'आतंकवाद के खात्मे के लिए एकजुट प्रयास'

एजेंसियां /  November 14, 2017

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को कारगर बनाने के लिए क्षेत्रीय सहयोग में तीव्रता लाने का आह्वïान करते हुए कहा है कि संसाधनों से भरपूर दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए सुस्पष्ट नियमों पर आधारित सुरक्षा ढांचा बनाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने मंगलवार को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) और भारत के शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस इलाके में आतंकवाद और कट्टïरता प्रमुख चुनौतियों के तौर पर उभरी हैं लिहाजा इलाके के देशों के लिए  अब समय आ गया है कि वे मिलकर इसका सामना करें। उन्होंने कहा, 'आतंकवाद और हिंसक कट्टïरपंथ से मुकाबला करने में हमने व्यक्तिगत तौर पर कड़ी मेहनत की है। वक्त आ गया है कि हम सभी आपसी सहयोग बढ़ाकर इस चुनौती का सामना करें।'

 
प्रधानमंत्री मोदी ने आसियान देशों के बीच विवाद पैदा करने वाले दक्षिण चीन सागर इलाके के लिए एक सुरक्षा ढांचा तैयार करने में भारतीय मदद की भी पेशकश की। उन्होंने कहा कि नियमों पर आधारित क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा तैयार होना इलाके के हित में होगा और इससे शांतिपूर्ण विकास भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।  प्रधानमंत्री के इस वक्तव्य को दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दखल के प्रति आसियान देशों की नाराजगी को स्वर देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। चीन प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस समुद्री क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है जबकि वियतनाम और फिलीपींस जैसे पड़ोसी देशों को इस पर एतराज है। भारत पहले से ही इस इलाके में निर्बाध समुद्री वहन की वकालत करता रहा है। जहां तक दक्षिण चीन सागर के प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार का सवाल है तो भारत अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक संबंधित देशों के हक की बात करता आया है। 
 
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और आसियान के साझा मूल्यों और समान भविष्य का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के 125 करोड़ लोग जनवरी में अपने गणतंत्र दिवस समारोह में इस संगठन के नेताओं का स्वागत करने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अगले साल 25 जनवरी को आसियान के साथ दीर्घकालिक रिश्तों की यादगार के तौर पर सम्मेलन होने वाला है। दस देशों के इस संगठन को बेहद प्रभावी समूह के तौर पर देखा जाता है और भारत के अलावा अमेरिका, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी इसके वार्ता भागीदार देश हैं। भारत के लिए व्यापार के नजरिये से यह इलाका काफी महत्त्वपूर्ण साबित हुआ है। पिछले 17 वर्षों में आसियान देशों ने भारत में 70 अरब डॉलर से भी अधिक निवेश किया है जो भारत के कुल विदेशी निवेश के 17 फीसदी से भी अधिक है। भारत ने भी आसियान देशों में 40 अरब डॉलर से अधिक निवेश किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) की बैठक में भी शिरकत की। इस समूह में आसियान के 10 देशों के अलावा भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी शामिल हैं। सभी नेताओं ने मुक्त व्यापार समझौते की संभावनाओं पर विचार किया।
 
द्विपक्षीय बैठकों का दौर
 
फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित सम्मेलन में शामिल होने आए कई नेताओं से प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय मुलाकातें भी की। उन्होंने चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई और वियतनाम के शासन प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती के उपायों पर चर्चा की।  प्रधानमंत्री मोदी की चीन के प्रधानमंत्री ली कछ्यांग के साथ संक्षिप्त बातचीत हुई। हालांकि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का ब्योरा नहीं मिल पाया लेकिन विदेश मंत्रालय ने इस 'गहन मंत्रणा' के बारे में तस्वीर के साथ ट्वीट किया है। फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिग दुतेर्ते की तरफ से रविवार को दिए गए रात्रिभोज के मौके पर भी दोनों नेताओं के बीच हल्की बातचीत हुई थी।
 
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल से अलग अलग वार्ताएं कीं जिनमें प्रस्तावित अहम चतुष्पक्षीय गठबंधन को आकार देने की पृष्ठभूमि में भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए नई रणनीति बनाने पर ध्यान केंद्रित रहा। इन दोनों नेताओं के साथ बैठक से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से विस्तृत वार्ता की थी जिसमें भारत-प्रशांत क्षेत्र में समग्र सुरक्षा एवं रक्षा सहयोग बढ़ाने पर खास जोर रहा था। 
 
रविवार को भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के अधिकारियों ने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र को मुक्त और स्वतंत्र बनाए रखने के लिए चतुष्पक्षीय गठबंधन को मूर्त रूप देने की दिशा में पहली बैठक की थी। समझा जा रहा है कि आबे और टर्नबुल दोनों के साथ हुई बैठकों में भी इस मामले पर बातचीत हुई।  मोदी ने बैठक के बाद ट्वीट किया, 'मेरी और मेरे मित्र शिंजो आबे की मनीला में बैठक शानदार रही। हमने भारत-जापान संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और हमारी अर्थव्यवस्थाओं एवं लोगों के बीच सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।'  विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बैठक के बारे में अधिक जानकारी नहीं देते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी बढ़ाने के संबंध में विस्तृत  वार्ता की। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टर्नबुल ने भी एक ट्वीट में कहा कि इन वार्ताओं में बढ़े हुए आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्वाई पर ध्यान केंद्रित किया गया। मोदी ने आसियान शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन वियतनाम के प्रधानमंत्री गुएन शुआन फुक, ब्रुनेई के सुल्तान हसन अल बोलकिया और न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें कीं और व्यापार, निवेश और समुद्री सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा की।               
Keyword: narendra modi, terror, आसियान,
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