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कारोबारी सुगमता के मामले में गेंद अब राज्यों के पाले में

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  November 14, 2017

भारत ने विश्व बैंक के कारोबारी सुगमता सूचकांक में 30 स्थानों का सुधार किया है। अब वह 190 देशों की इस सूची में 100वें स्थान पर आ गया है। यह सूचकांक विश्व बैंक की वर्ष 2018 की कारोबारी सुगमता रिपोर्ट का हिस्सा है।  यह अपने आप में एक अहम उपलब्धि है। सूचकांक में 30 स्थानों की उछाल अपने आप में एक बड़ी सफलता है। इसके अलावा 'डिस्टेंस टु फ्रंटियर' सूचकांक में भी उसने 55वें से सुधार करके 60वां स्थान हासिल किया है। यह संबंधित सूचकांक में सर्वश्रेष्ठï प्रदर्शन करने वाले से दूरी दर्शाता है। यह आकलन 100 के सूचकांक पर किया जाता है जहां शून्य सबसे कमतर प्रदर्शन का मानक है। लब्बोलुआब यह कि भारत ने सभी अर्थों में प्रगति की है। 

 
इस प्रदर्शन से उम्मीद जगी है कि कारोबारी सुगमता सूचकांक में भारत भविष्य में और अधिक सुधार हासिल कर सकता है। देश का नया लक्ष्य होगा शीर्ष 50 देशों में जगह बनाना। यहां एक बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि कारोबारी सुगमता में सुधार करने भर से देश में निवेश में तेजी नहीं आएगी। घरेलू और विदेशी निवेश में सुधार के लिए कुछ अन्य कारकों की भी आवश्यकता है। इसमें स्थायी बढ़ोतरी के लिए यह भी समान रूप से आवश्यक है कि आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाए, सस्ती पूंजी उपलब्ध कराई जाए, कुशल श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और वृद्घि और वृहद आर्थिक स्थिरता को बरकरार रखा जाए। 
 
चाहे जो भी हो लेकिन ऐसे ऊंचे लक्ष्य तय करना अहम है। इतना ही नहीं देश को कारोबारी सुगमता सूचकांक में शीर्ष 50 देशों में पहुंचाने के लिहाज से इनकी व्यवहार्यता का आकलन करना तो और भी अधिक जरूरी है। ऐसे में यह आवश्यक है कि उन दस मानकों पर करीबी नजर डाली जाए जिनके आधार पर कारोबारी सुगमता सूचकांक तैयार किया गया है। इन 10 मानकों में से पांच का संबंध उन क्षेत्रों से है जहां केंद्र सरकार द्वारा तय किए जाने वाले कानूनों और प्रक्रियाओं की अहम भूमिका होती है। ये हैं- कर चुकाना, दिवालिया मामलों को सुलझाना, ऋण प्राप्त करना, अल्पांश वाले निवेशकों का बचाव करना और सीमा पार व्यापार। सीमा पार व्यापार जैसे एक मानक को छोड़ दिया जाए तो तमाम अन्य क्षेत्रों में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ।
 
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कर भुगतान का डिजिटलीकरण किया गया, दिवालिया मामलों के निपटान के लिए नया कानून बना, बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार करने में प्रौद्योगिकी की मदद ली गई और खुदरा तथा छोटे निवेशकों को बचाव मुहैया कराया गया। अगर केंद्र सरकार दिवालिया निस्तारण, बैंकिंग नेटवर्क और अल्पांश निवेशकों के हितों के बचाव के लिए और कदम उठाता है तो आने वाले वर्षों में कारोबारी सुगमता सूचकांक में भारत की स्थिति और मजबूत हो सकती है। इसके अलावा अगर देश की विदेश व्यापार नीतियों में सुधार किया जाए तो इससे भी काफी मदद मिलेगी। फिलहाल हम इस मोर्चे पर कमोबेश पीछे हैं। 
 
अगर कारोबारी सुगमता के क्षेत्र में केंद्र सरकार द्वारा अंजाम दिए जाने वाले इन कामों की तुलना राज्य सरकारों द्वारा किए जाने वाले कामों से की जाए तो पता चलेगा कि क्यों देश की रैंकिंग में सुधार काफी मुश्किल है। उपरोक्त 10 मानकों में से पांच मानक राज्य सरकार के नीतिगत क्षेत्र में आते हैं और इनका संबंध किसी कारोबार की शुरुआत, बिजली, परिसंपत्ति पंजीयन, विनिर्माण परमिट और अनुबंध प्रवर्तन से है। 
 
अनुबंध प्रवर्तन समेत इन सभी मानकों में सुधार का जिम्मा राज्य सरकार पर है। हालांकि अनुबंध प्रवर्तन में निचले स्तर की न्यायपालिका की भी भूमिका है। इनमें से दो मानकों पर भारत का प्रदर्शन खासा कमजोर है। अनुबंध प्रवर्तन में 164वां और विनिर्माण परमिट हासिल करने में हमें 181वीं रैंकिंग दी गई है। शेष तीन मानकों में से हर एक में भारत का स्तर गिरा है। ये मानक हैं एक कारोबार शुरू करना, बिजली हासिल करना और परिसंपत्ति का पंजीयन। 
 
दूसरे शब्दों मे कहें तो अगर देश को कारोबारी सुगमता सूचकांक में अच्छा स्थान हासिल करना है तो इसमें राज्यों की अहम भूमिका है। केंद्र को तो अपने दायरे के क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन जारी रखना ही होगा, लेकिन अगर राज्य नए कारोबार की स्थापना, बिजली, अनुबंध प्रवर्तन, विनिर्माण परमिट, परिसंपत्ति पंजीयन आदि के क्षेत्र में प्रदर्शन में सुधार नहीं करते हैं तो केंद्र अपने दम पर हालात में बहुत अधिक सुधार नहीं ला सकता। 
 
जब विश्व बैंक अपने अध्ययन का दायरा बढ़ाएगा और सर्वेक्षण में दिल्ली और मुंबई के रूप में दो शहरों के बजाय आठ शहरों को शामिल करेगा तो हालात और कठिन हो जाएंगे। राज्य स्तरीय कारोबारी सुगमता रैंकिंग पर भी ध्यान देना होगा। पिछली बार यह रैंकिंग 2016 में जारी की गई थी और नियमित अंतराल पर राज्यस्तरीय रैंकिंग जारी होने से उनके बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल उत्पन्न होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देश को कारोबारी सुगमता की सूची में शीर्ष 50 देशों में शुमार करने का स्वप्न आसानी से पूरा नहीं हो सकेगा। 
Keyword: world bank, business, ranking,,
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