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बैंकों के पूंजी बॉन्ड की पहली किस्त दिसंबर में

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 11 13, 2017

सरकार और बैंकों के बीच बातचीत अंतिम चरण में

अभी यह तय नहीं हुआ कि कितने की होगी पहली किस्त
बैंकों के नाम भी नहीं हुए हैं तय
7 फीसदी हो सकती है ब्याज की दर

सरकार 1.35 लाख करोड़ रुपये के बैंक पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड की पहली किस्त दिसंबर के पहले हफ्ते जारी कर सकती है। इसमें 10 साल की अवधि के बॉन्ड और मौजूदा सरकारी प्रतिभूतियों के अनुरूप करीब 7 फीसदी की ब्याज दर हो सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक इन बॉन्डों को जारी करने के बारे में सरकार की बैंकों तथा भारतीय रिजर्व बैंक के साथ बातचीत अंतिम चरणों में है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि पहली किस्त में कुल कितनी राशि के बॉन्ड जारी किए जाएंगे। वित्त मंत्रालय के अधिकारी पहले ही यह सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि ये बॉन्ड 2.11 लाख करोड़ रुपये के व्यापक पुनर्पूंजीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है और यह राशि अगली तीन से चार तिमाहियों में बैंकों में डाली जाएगी।

केंद्र सरकार और बैंकों के बीच चल रही बातचीत की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया दिसंबर के शुरू में प्रारंभ हो सकती है। इस पर ब्याज की दर करीब 7 फीसदी होगी और पहली किस्त की अवधि 10 साल हो सकती है। अलग-अलग किस्तों की परिपक्वता अवधि अलग-अलग हो सकती है।' अधिकारी ने बताया कि अभी इस बात पर फैसला नहीं हुआ है कि पहली किस्त में कितनी राशि जारी की जाएगी या फिर किन बैंकों को बॉन्ड जारी किए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने बैंकों में 2.11 लाख करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के अलावा केंद्र सरकार इस साल और अगले वर्ष 18,000 करोड़ रुपये बैंकों में डालेगी जबकि बाकी 58,000 करोड़ रुपये बैंक बाजार से जुटाएंगे। बॉन्ड के स्वरूप को अंतिम रूप दिया जा रहा है, इस बात की प्रबल संभावना है कि कमजोर बैंकों को केवल अपनी प्रावधान जरूरतों को पूरा करने के लिए ही पूंजी मिलेगी जबकि मजबूत बैंकों को उनके विकास के लिए भी पूंजी दी जाएगी। 

किस बैंक को कितनी पूंजी मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उस बैंक ने फंसी परिसंपत्तियों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं, दिवालिया कानून को भेजे गए मामलों की क्या स्थिति है और उनके प्रावधान कितने कारगर रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य मुद्दों पर भी गौर किया जाएगा। पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड की कुल राशि को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इनमें से एक हिस्सा प्रावधान के लिए और दूसरा हिस्सा विकास की जरूरतों के लिए होगा। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार ने रविवार को कहा कि पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया बिना शर्त नहीं होगी और इससे पहले तथा बाद में बैंकों को कई सुधार करने होंगे। 

सूत्रों का कहना है कि बैंकों के पुनर्पूंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बैंकों को फंसे कर्ज का एक छोटा सा हिस्सा बट्टे खाते में डालकर अपना बहीखाता दुरुस्त करना पड़ सकता है। यह उन मामलों से अलग होगा जो दिवालिया कानून के तहत राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट के विचाराधीन हैं। सरकार इस बार भी 1990 के दशक के मध्य में जारी किए गए बैंक पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड की तरह बॉन्ड जारी करना चाहती है। सालाना ब्याज भुगतान के अलावा इस बॉन्ड का राजकोषीय घाटे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि इसमें कोई नकदी शामिल नहीं है। 1990 के दशक के मध्य में जारी किए गए बॉन्ड को बैंकों को परिपक्व होने तक अपने पास रखना था और 2007 के बाद ही द्वितीयक बाजार में उनके कारोबार की अनुमति दी गई। नए पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड भी शुरुआत में इसी तरह के हो सकते हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने पहले कहा था कि पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड से सरकार पर 8,000 से 9,000 करोड़ रुपये ब्याज दर का बोझ पड़ेगा और इस कदम का मुद्रास्फीति प्रभाव नहीं हो सकता है। उनका कहना था कि बॉन्ड से राजकोषीय घाटा बढ़ेगा या नहीं, यह अकाउंटिंग पर निर्भर करता है। मानक अंतरराष्ट्रीय अकाउंटिंग के तहत इस तरह के बॉन्ड से घाटा नहीं बढ़ता है क्योंकि यह उसके दायरे में नहीं आता है। लेकिन भारतीय प्रणाली में इस बॉन्ड से घाटा बढ़ सकता है।
Keyword: बैंक, पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड, किस्त, प्रतिभूति, रिजर्व बैंक, फंसी परिसंपत्ति, दिवालिया कानून,
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