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'बड़े शहरों के नजदीक सस्ते आवास का दिया सुझाव'

सुरजीत दास गुप्ता /  11 12, 2017

बीएस बातचीत

राष्ट्रीय आवासीय बैंक (एनएचबी) के प्रबंध निदेशक श्रीराम कल्याणरमन 2021 तक सभी को आवास मुहैया कराने के सरकार के एजेंडे को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सुरजीत दास गुप्ता के साथ हुई बातचीत में उन्होंने रियल एस्टेट क्षेत्र की चुनौतियों और उन्हें हल करने की रणनीति पर बात की है

बड़े शहरों में सस्ते आवास बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। आप इस समस्या से कैसे निपटेंगे?

हमने कुछ राज्यों को सुझाव दिया है कि उन्हें सस्ते आवास परिसर तैयार करने चाहिए जैसे कि औद्योगिक पार्क तैयार किए जाते हैं। ये आवासीय परिसर शहरों से थोड़ा दूर हों तो बेहतर है। आप वर्ली या बांद्रा या कनॉट प्लेस में सस्ते आवास के बारे में नहीं सोच सकते हैं। बिल्डरों के सामने मुख्य समस्या जमीन खरीदने की आती है और इसके बाद बुनियादी ढांचा मसलन सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं मुहैया करना भी आसान नहीं है। हमारा सुझाव यह है कि राज्य सरकारों को जमीन के प्लॉट के की पहचान करनी चाहिए और उन्हें किफायती आवास के मकसद से ही मंजूरी दी जानी चाहिए। सभी बुनियादी ढांचा तैयार कर इनकी नीलामी बिल्डरों को की जानी चाहिए। यह राज्य सरकारी की जिम्मेदारी है कि वह सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी ढांचा मुहैया कराए और इसके बाद इनकी नीलामी बिल्डरों को करे। हमारा सुझाव यह है कि राज्य सरकार इनकी नीलामी बुनियादी ढांचा तैयार करने की लागत का बोझ दिए बगैर करे। इससे आवास की कीमत सस्ती रखने में मदद मिलेगी और किफायती आवासीय योजना संभव होगी। 

इस मॉडल की लागत नीति क्या है?

तेज मंजूरी और प्रक्रिया से बिल्डरों और खरीदारों के लिए ब्याज, करों आदि में बचत से आवास की लागत करीब एक-तिहाई तक कम हो सकती है। हमें लागत तो कम कर 1,400-1500 रुपये वर्गफुट करने की जरूरत है। फिलहाल किफायती आवास की लागत 1800-2200 रुपये वर्गफुट है। अगर आप बुनियादी ढांचा की लागत के लिए शुल्क नहीं लेते हैं तो आप इसे कम कर सकते हैं। बुनियादी ढांचा की लागत में 7-8 फीसदी घर की लागत होती है।

देश भर के रियल एस्टेट डेवलपर ज्यादा इंवेंट्री होने और कम कीमत पर भी बिक्री नहीं कर पाने की चुनौतियां बड़ी परियोजनाओं ने निर्माण बंद कर दिया है और खरीदार नजर नहीं आ रहे हैं। इस समस्या से निपटने के क्या उपाय किए जा रहे हैं?

आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईडब्ल्यूएस /एलआईसी आवास में करीब 96 फीसदी तक की कमी है और कई बिल्डरों ने इस क्षेत्र में संभावनाएं तलाशी हैं और वे इस सेगमेंट के लिए काम कर रहे हैं। यह सच है कि ïकुछ जगहों पर आवासीय स्टॉक बिके नहीं हैं और कुछ जगहों पर प्रॉपर्टी का काम निर्माणाधीन है। सरकार इस मसले को हल करने की कोशिश में है। हाल ही में भारतीय ऋणशोधन एवं दिवालिया बोर्ड (आईबीबीआई) ने संशोधन पेश किया है ताकि निजी खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा की जा सके। इसके लिए उनकी पहचान वित्तीय एवं परिचालन ऋणदाता के रूप में की जाए। खरीदारों को किसी निर्माणाधीन संपत्ति को खरीदते वक्त बिल्डरों के जोखिम को भी ध्यान में रखने की जरूरत है। 

राज्यों में रेरा पर अमल की रफ्तार धीमी रही है और कई मामलों में तो इसकी शुरुआत भी नहीं हुई है?

हमारा यह मानना है कि 25 से ज्यादा राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने हरी झंडी दिखाई है और उन्होंने रेरा के क्रियान्वयन के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि इसके प्रभावी क्रियान्वयन की दृष्टि से विभिन्न राज्यों में अंतर दिख रहा है। इसे सुनिश्चित करने के लिए कानून में विनिर्दिष्ट दूसरे उत्तरदायित्वों और समय-सीमा का पालन करने की कोशिश डेवलपर कर रहे हैं और यह जरूरी है कि राज्य यह सुनिश्चित करें कि कानून का पालन प्रभावी तरीके से हो और इस पर अमल किया जाए। इस कदम से निवेशकों और ग्राहकों के बीच आत्मविश्वास बढ़ेगा और इस क्षेत्र के लिए एक प्रगति वाली राह सुनिश्चित होगी। 

देश में संपत्ति लेन-देन से जुड़े कर ज्यादा और कई तरह के हैं। एनबीएच इन्हें एक व्यवहारिक दर तक लाने के लिए क्या कर रही है?

एनबीएच केंद्र और राज्य सरकार के साथ स्टैंप शुल्क और रजिस्ट्रेशन शुल्क को तार्किक बनाने के लिए बातचीत कर रही है और इस प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाने की ओर कदम बढ़ा रही है। फिलहाल ग्राहकों के लिए प्रभावी स्टैंप शुल्क 6 फीसदी और 12 फीसदी के बीच है। हमारा यह मानना है कि रजिस्ट्रेशन पर एकसमान कम शुल्क लगाया जाए और किफायती आवास से इस उद्योग में तेजी आए। एनएचबी ने आईआईएम बैंगलोर के साथ मिलकर एक ऐसा मॉडल तैयार किया जहां राज्य राजस्व के प्रभाव का अंदाजा लगा पाएंगे। डेटा आपूर्ति के लिए कुछ राज्यों से संपर्क कर रहे हैं ताकि इस मॉडल पर काम हो सके और अधिकारी स्टैंप शुल्क में किसी भी बदलाव के लिए राजस्व पर पडऩे वाले असर का मूल्यांकन कर सकें। 

लघु आवास वित्त कंपनियों को फंड जुटाने में मुश्किल आ रही है। आप नई वित्तीय योजनाओं में सहयोग देना चाहते हैं?

उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए बॉन्ड बाजार की मदद ली जा सकती है। हम क्रेडिट गारंटी योजना का विकल्प तलाश रहे हैं। अगर यह संचालित हो जाता है तो हम उसका समर्थन करेंगे और इससे ज्यादा क्रेडिट रेटिंग मिलेगी। हम एक ऐसा माहौल बनाना चाहते हैं जहां फंड के सामने कोई बाधा न आए।

Keyword: real estate, property, NHB,,
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