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सुधार की शर्तों पर ही बैंकों को पूंजी

अरुप रॉयचौधरी / नई दिल्ली November 12, 2017

वित्त मंत्री अरुण जेटली और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ सरकार की 2.11 लाख करोड़ रुपये की वृहद पुनर्पूंजीकरण योजना पर चर्चा करने के लिए बैठक की। केंद्र ने यह स्पष्ट किया कि पुनर्पूंजीकरण के साथ-साथ कई सुधार भी किए जाएंगे ताकि बैंकों का प्रबंधन, निर्णय क्षमता और बैलेंसशीट मजबूत हो सके। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के शीर्ष अधिकारियों की बैठक 'पीएसबी मंथन' से इतर वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने संवाददाताओं को बताया, 'पुनर्पूंजीकरण खुद ब खुद नहीं हो सकता है। इससे पहले और इसके बाद कई सुधारों की दरकार होगी। इसलिए यह सुधार आधारित एजेंडा होना चाहिए। इन सुधारों में कई चीजें शामिल हैं जिनमें निदेशक मंडल को मजबूत बनाना, फंसे कर्जों का समाधान, मानव संसाधन से जुड़ी समस्या शामिल है ताकि सरकारी बैंक भविष्य में जवाबदेह बैंकिंग कर सकें।' यह दो दिवसीय बैठक भारतीय स्टेट बैंक की गुडग़ांव में मौजूद एकेडमी में आयोजित की गई। 
 
कुमार ने बताया, 'इस मंथन का जोर इस बात पर था कि जो कुछ भी होता है उसकी सुधार से जुड़ी कुछ शर्तें होती हैं जो उन्हें जवाबदेह बनाने के लिए जरूरी है।' कुमार का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का बोर्ड लघु अवधि में ही इन सुधारों पर विचार करेगा और यह फैसला करेगा कि इन उपायों पर किस तरह अमल किया जाए।उनका कहना है कि इन सुधारों के लिए बैंक के बोर्ड को सरकार को पुनर्गठन की एक स्पष्ट योजना देनी होगी जिनमें दूसरे सार्वजनिक बैंकों के साथ विलय का उपाय भी शामिल है। केंद्र ने हाल ही में एक 'वैकल्पिक प्रणाली' स्थापित की थी जिसका नेतृत्व जेटली ने किया ताकि पीएसबी पुनर्गठन के बारे में फैसला किया जाए। 
 
वरिष्ठ सरकारी सूत्रों का कहना है कि केंद्र द्वारा 1.35 लाख करोड़ रुपये मूल्य वाले बैंक पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड जारी किए जाने के बाद विलय को अंजाम दिया जा सकता है लेकिन इस पर जल्द ही चर्चा शुरू होगी। बिज़नेस स्टैंडर्ड की पहले की रिपोर्ट के मुताबिक इन उपायों को लघु अवधि, मध्यम और दीर्घअवधि उपायों में वर्गीकृत किया जाएगा। बैंकों का पुनर्गठन लंबित सुधार हैं जिनमें विलय और पीएसबी में सरकारी हिस्सेदारी कम करना शामिल है। इसके अलावा बैंकों को कुछ छोटे फंसे कर्जों (एनपीए) के खाते को खत्म करने के लिए कहा जा सकता है ताकि उनका रिकॉर्ड सही रहे। इसके अलावा ऋणशोधन और दिवालिया कानून के तहत नैशनल कंपनीज लॉ ट्राइब्यूनल के पास इन मामलों को भेजा जाएगा। 
 
बैंकरों को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि सरकार ने सरकारी बैंकों में ज्यादा पूंजी लगाने का फैसला किया है ताकि बैंकिंग व्यवस्था मजबूत हो और आर्थिक वृद्धि में तेजी आए। वित्त मंत्री ने बैंकरों को आश्वस्त किया सरकार बजट से, बॉन्ड निर्गम और बैंकों की शेयर पूंजी के विस्तार के जरिये उनमें और पूंजी डालने का फैसला किया है।  उन्होंने कहा कि बैंकों की वित्तीय स्थिति बेहतर करने के लिए देश उन्हें पैसा दे रहा है। वित्त मंत्री ने बैंक प्रमुखों को आश्वस्त किया, 'आपको यह देखने को नहीं मिलेगा कि हम वाणिज्यिक लेन-देन में हस्तक्षेप कर रहे हैं लेकिन जब व्यवस्था ये सब बदलाव करने और बैंकों को मजबूत करने के लिए ये सभी मौद्रिक योगदान दिए जा रहे हैं तो हम चाहते है कि सरकारी बैंकिंग प्रणाली खूब मजबूत हो।'
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