बिजनेस स्टैंडर्ड - 'तेल की कीमतें रहेंगी 57-65 डॉलर प्रति बैरल'
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'तेल की कीमतें रहेंगी 57-65 डॉलर प्रति बैरल'

शाइन जैकब और ज्योति मुकुल /  11 12, 2017

बीएस बातचीत

सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन नए चरण में प्रवेश कर रही है और ओएनजीसी इस कंपनी का अधिग्रहण मार्च के आखिर तक कर लेगी। शाइन जैकब और ज्योति मुकुल को दिए साक्षात्कार में एचपीसीएल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक एम के सुराणा ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी, एमआरपीएल के अधिग्रहण और कंपनी की विस्तार योजना पर बातचीत की। मुख्य अंश...

सऊदी अरब के घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उतारचढ़ाव देखा गया है। आगामी महीनों में इसका क्या असर देखने को मिलेगा?

अगर आप पिछले सात से 10 दिन पर नजर डालें तो कच्चे तेल में काफी तेजी आई है। अभी यह 63 डॉलर प्रति बैरल पर है। पिछले दो हफ्ते में यह 57 से 65 डॉलर पर गया और फिर 63 डॉलर पर आया। सऊदी अरब व इराक का तनाव, वेनेजुएला का वित्तीय संकट, अमेरिका में महंगाई के दबाव पर लोगों की अवधारणा और नवंबर में ओपेक की लंबित बैठक का इस पर असर रहा है। इसके अतिरिक्त ओपेक की कटौती पर अनुपालन का स्तर अच्छा रहा है। इसके आधार पर मेरा मानना है कि यह अभी भी तेल बाजार में किसी ढांचागत बदलाव का संकेत नहीं है। यह भूराजनैतिक परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया भर है। आने वाले समय में यह 57-65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहेगा और अगर यह 65 के पार जाता है तो हमें यह देखना होगा कि ढांचागत बदलाव हो रहा है या नहीं।

एचपीसीएल में सरकारी हिस्सा खरीदने के ओएनजीसी के फैसले के बाद एमआरपीएल का विलय एचपीसीएल के साथ करने पर बातचीत हो रही है। ऐसे में एचपीसीएल को क्या लाभ होगा?

एचपीसीएल उत्पादन के मुकाबले ज्यादा तेल बेचती है। अभी हमारी रिफाइनरियों में करीब 2.9 करोड़ टन उत्पादन होता है और पिछले साल हमने 3.5 करोड़ टन की बिक्री की। मांग बढ़ रही है और हमारे पास पहले ही रिफाइनिंग क्षमता की किल्लत है। साथ ही एमआरपीएल पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन कर रही है, लेकिन इसका बड़े पैमाने पर विपणन नहीं कर रही है। पहला, हमें उत्पादन और विपणन की खाई पाटनी होगी। दूसरा, हर रिफाइनरी के पास द्वितीयक प्रसंस्करण की निश्चित सुविधा है। कच्चे तेल की खरीद के मोर्चे पर भी यह हमारे लिए फायदेमंद होगा क्योंकि हमारे पास बड़ा बास्केट है। अभी हम पेट्रोकेमिकल में नहीं हैं, लेकिन हाल में हमने इस क्षेत्र में नया विभाग बनाया है। अगर ओएनजीसी, एमआरपीएल इसका हिस्सा बनते हैं तो यह इसके साथ पेट्रोकेमिकल पोर्टफोलियो लाएगी।

खबर है कि एमआरपीएल के शेयरों की अदलाबदली हो सकती है। क्या यह संभव है क्योंकि ओएनजीसी एमआरपीएल का हिस्सा ले रही है, ऐसे में ओएनजीसी के साथ अदलाबदली नहीं हो सकती?

हमने अभी तरीके पर विचार नहीं किया है। तार्किक रूप से इसका मतलब बनता है अगर ओएनजीसी व एचपीसीएल का एकीकरण होता है तो एमआरपीएल का एचपीसीएल का विलय हो जाएगा। हालांकि हमने अभी बोर्ड में प्रस्ताव नहीं रखा है और इस पर कोई बातचीत शुरू नहीं की है।

नोटबंदी के बाद तेल विपणन कंपनियों ने डिजिटलीकरण अपनाया और एक साल हो गए। इस पर क्या प्रगति हुई है?

हमने आउïटलेट पर पाइंट ऑफ सेल मशीन उपलब्ध कराना शुरू किया, जो वॉलेट व भीम जैसे ऐप का वैकल्पिक साधन है। अभी हमारे 96 फीसदी आउटलेट में कैशलेस भुगतान का कम से कम एक रूप है। जहां तक प्रोत्साहन का सवाल है हम डिजिटल भुगतान पर 0.75 फीसदी छूट दे रहे हैं। हम कार्ड से भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट चार्ज का भार भी उठा रहे हैं। नोटबंदी से पहले डिजिटल भुगतान 9.5 फीसदी था, जो अभी 18 फीसदी है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट व प्रोत्साहन पर हमने पिछले छह महीने में 131 करोड़ रुपये खर्च किए।

अगले कुछ सालों में पेट्रोलियम का खुदरा बाजार कैसा रहेगा क्योंकि रोसनेफ्ट व बीपी प्रवेश कर रही हैं?

पहले ही यहां रिलायंस और एस्सार जैसी कंपनियां हैं और कुछ और कंपनियों को पेट्रोल पंप लगाने का लाइसेंस मिला है। जो कोई भी आएगा वह सरकारी कंपनियों की ही हिस्सेदारी लेगा। अभी निजी कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी छह फीसदी है।

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