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एटीएम सेवा प्रदाताओं को हर्जाना नहीं

टीई नरसिम्हन / चेन्नई November 10, 2017

नोटबंदी के एक साल होने के बाद एटीएम ऑपरेशन सामान्य हो गया है, लेकिन एटीएम सेवा प्रदाताओं को हुए 500 करोड़ रुपये नुकसान की भरपाई  अब तक नहीं की गई है। उद्योग जगत सरकार, नियामकों और बैंकरों के दरवाजे खटखटा रहा है, लेकिन उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। एक एटीएम कंपनी के अधिकारी ने कहा कि उद्योग ने एसोसिएशन (कॉन्फेडरेशन आफ एटीएम इंडस्ट्री- सीएटीएमआई) के माध्यम से नियामक, बैंकों व सरकार से बकाये के भुगतान के लिए संपर्क साधा, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। संगठन ने कहा, 'हम अभी भी सरकार के साथ बात कर रहे हैं।' ट्रांजेक्शन प्रॉसेसिंग ऐंड एटीएम सर्विसेज के अध्यक्ष वी बालासुब्रमण्यन ने कहा कि  अक्टूबर 2016 के स्तर पर ट्रांजेक् शन लाने के लिए सेवा प्रदाताओं को पहले 6 महीने संघर्ष करना पड़ा है, लेकिन 6 महीने के दौरान हुए नुकसान की भरपाई नहीं की गई।
 
अनुमान के मुताबिक सेवा प्रदाताओं को इन 6 महीनों में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने कभी नहीं कहा कि नकदी उपलब्ध नहीं है, दरअसल बैंक शाखाओं को नकदी उपलब्ध करा रहे थे, एटीएम को नहीं।  एफएसएस भुगतान तकनीक की अग्रणी कंपनी है तो सरकारी और निजी क्षेत्र के करीब 40,000 एटीएम के प्रबंधन का काम देखती है। देश भर में करीब 2.25 लाख एटीएम हैं। 
 
वित्तीय समावेशन अभियान में एटीएम भी अहम हैं। उन्होंने कहा कि विकसित देश में प्रति व्यक्ति सालाना 20 निकासी करते हैं, जबकि भारत में 0.8 बार निकासी करते हैं। यहां तक कि मध्य प्रदेश जैसे राज्य में 40-50 किलोमीटर की दूरी पर एटीएम हैं। एटीएम ऑपरेटरों ने सवाल उठाया कि रिजर्व बैंक ने 15 मिनट की यात्रा पर एक एटीएम बैंकों के लिए अनिवार्य किया था, उसका क्या हुआ। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले साल की नोटबंदी के झटके के बाद अगले 3-4 महीने में एटीएम का कारोबार फिर गति पकड़ लेगा। इस समय काम कर रहे ज्यादातर एटीएम 8-10 साल पहले स्थापित किए थे, जिन्हें बदले जाने की जरूरत है। इसकी वजह से मांग बढ़ेगी। हर साल करीब 5,000 से 6,000 एटीएम लगाए जाते हैं। 
Keyword: demonetization, note, rupee, ATM,,
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