बिजनेस स्टैंडर्ड - हल्का हो गया जीएसटी का बोझ
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हल्का हो गया जीएसटी का बोझ

बीएस संवाददाता / गुवाहाटी November 10, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मोर्चे पर सरकार ने आज आम जनता को भी बड़ी राहत दे दी और कारोबारियों को भी खुश कर दिया। 28 फीसदी की जीएसटी श्रेणी में आने वाली करीब 165 वस्तुओं को कम कर दायरे में लाने की सिफारिश तो पहले से की जा रही थी, लेकिन जीएसटी परिषद ने सबको हैरत में डालते हुए करीब 200 वस्तुओं और सेवाओं की दरों को कम कर दिया। इनमें 178 वस्तुएं और सेवाएं 28 फीसदी से निकालकर 18 फीसदी के दायरे में डाली गई हैं। अब केवल 50 वस्तुओं पर 28 फीसदी जीएसटी वसूला जाएगा। जिन्हें बाहर किया गया है, उनमें च्युइंग गम और चॉकलेट से लेकर सौंदर्य प्रसाधन, विग और कलाई घड़ी तक शामिल हैं।
 
इतना ही नहीं, कारोबारियों को भी कई तरह के तोहफे गुवाहाटी में हुई इस बैठक में मिल गए। जिनकी कोई कर देनदारी नहीं बनती थी, उन्हें देर से रिटर्न दाखिल करने पर अभी तक 200 रुपये जुर्माना देना पड़ता था। लेकिन सरकार ने अब उसे घटाकर केवल 20 रुपये प्रतिदिन कर दिया है। परिषद की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि रोजमर्रा की करीब 178 वस्तुओं पर कर 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। साथ ही वातानुकूलित एवं गैर-वातानुकूलित दोनों रेस्तरां के लिए जीएसटी बराबर कर दिया गया है। दोनों को ही केवल 5 फीसदी जीएसटी देना होगा। इस समय गैर-वातानुकलित रेस्तरांओं में बिल पर 12 फीसदी और वातानुकूलित रेस्तरां में 18 फीसदी जीएसटी लगता है। हालांकि इन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट भी मिलता है। वित्त मंत्री ने कहा कि रेस्तरां ने ग्राहकों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं दिया, इसलिए यह सुविधा वापस लेकर सभी प्रकार के रेस्तरां पर 5 फीसदी कर लगाया जा रहा है। सितारा होटलों पर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा और इन्हें इनपुट क्रेडिट टैक्स का भी लाभ मिलेगा।
 
परिषद ने वेट ग्राइंडर और बख्तरबंद गाडिय़ों पर भी कर 28 से घटाकर 12 फीसदी कर दिया है। जेटली ने कहा कि छह वस्तुओं पर जीएसटी 18 से घटाकर 5 फीसदी किया गया है जबकि 8 वस्तुओं पर इसे 12 से कम कर 5 फीसदी किया गया है। छह वस्तुओं पर इसे 5 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है।  बिहार के मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि विभिन्न वस्तुओं पर जीएसटी दरों में बदलाव से सरकार को राजस्व में सालाना 20,000 करोड़ रुपये नुकसान होगा। सरकार ने इस साल 1 जुलाई को देश भर में जीएसटी व्यवस्था लागू की थी। हालांकि इसके बाद कारोबारियों और छोटे कारोबारियों ने उन पर अनुपालन के बढ़े बोझ की शिकायत की वहीं कुछ आम वस्तुओं पर कर बढऩे से विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे।  
 
कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने बाज ट्विटर पर कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने जब से देश की कमान संभाली है तब से अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ रही है और ऐसे मेंं घबराहट के बीच सरकार के पास वस्तुओं पर कर संरचना में बदलाव के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है। जीएसटी परिषद ने अनुपालन नियमों में रियायत दी है और रिटर्न दाखिल करने के मानदंड भी अपेक्षाकृत आसान बना दिए हैं। जेटली ने कहा, 'जीएसटी संरचना में बदलाव के पहल के तहत परिषद समय-समय पर दरों में बदलाव करती रहा है। पिछली तीन बैठकों में हम 28 फीसदी कर दायरे में आने वाली वस्तुओं पर विचार करते रहे हैं। इसी के तहत इस श्रेणी में आने वाली ज्यादातर वस्तुएं 18 फीसदी श्रेणी में रखी गई हैं जबकि कुछ इससे भी निचली कर श्रेणी में रखी गई हैं।'
Keyword: arun jaitley, GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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