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बाजार में ज्यादा निवेश की हो अनुमति

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 11 09, 2017

पेंशन फंड का धन आएगा बाजार में

पेंशन नियामक ने सरकार से कहा कि सरकारी कर्मचारियों को एनपीएस का 50 प्रतिशत इक्विटी में लगाने की अनुमति दी जाए
निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को 75 प्रतिशत राशि इक्विटी में लगाने की है अनुमति
नियामक चाहता है कि कर्मचारियों को फंड मैनेजर व निवेश का तरीका चुनने का हो ज्यादा अधिकार

पेंशन नियामक ने राष्ट्रीय पेंशन व्यवस्था (एनपीएस) के तहत कर्मचारियों के फंड को इक्विटी में निवेश के लिए 2 और विकल्प दिए जाने के लिए सरकार से संपर्क साधा है, जिससे इक्विटी में निवेश की हिस्सेदारी बढ़ाकर घटती ब्याज दरों की भरपाई की जा सके। इस समय सरकारी कर्मचारी फंड का 15 प्रतिशत तक इक्विटी में निवेश कर सकते हैं। पेंशन फंड नियामक प्राधिकरण (पीएफआरडीए) चाहता है कि इसे बढ़ाकर एक योजना के तहत 25 प्रतिशत और एक अन्य योजना के तहत 50 प्रतिशत तक किया जाए। नियामक यह भी चाहता है कि कर्मचारियों को अपने फंड मैनेजर और निवेश योजना के चयन के ज्यादा अधिकार दिए जाएं।

पीएफआरडीए के चेयरमैन हेमंत कॉन्ट्रैक्टर ने कहा, 'हमने सरकार से अनुरोध किया है कि कर्मचारियों को फंड का बड़ा हिस्सा इक्विटी में निवेश करने की अनुमति दी जाए, जिससे कर्ज पर कम रिटर्न मिलने से पैदा हुई स्थिति से निपटा जा सके।' अगर इसे मंजूरी दे दी जाती है तब भी सरकारी कर्मचारियों को अपने फंड को इक्विटी में निवेश करने की अनुमति निजी क्षेत्र के कर्मचारियों की तुलना में कम होगी। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को इक्विटी में 75 प्रतिशत निवेश की अनुमति है। 

कुछ साल पहले नियामक ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए इक्विटी में फंड का निवेश 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की अनुमति दे दी थी। उसके बाद पिछले साल के आखिर मेंं दो और विकल्प दिए गए जिसमें 25 प्रतिशत तक और 75 प्रतिशत तक निवेश इक्विटी में करने की अनुमति थी। इन योजनाओं को कंजर्वेटिव लाइफ साइकिल और एग्रेसिव लाफ साइकिल नाम दिया गया था। 

इस साल 15 अक्टूबर तक 7,831 उपभोक्ताओं ने एनपीएस का 50 प्रतिशत इक्विटी में निवेश करने का विकल्प चुना, जिसके तहत प्रबंधन के तहत संपत्ति (एयूएम) 135.83 करोड़ रुपये आई, जबकि एग्रेसिव लाइफ साइकिल की नई स्कीम में 2,025 ग्राहकों ने दिलचस्पी दिखाी और 20.17 करोड़ रुपये एयूएम के तहत आए। कंजर्वेटिव लाइफ साइकिल में 265 लोगोंं ने दिलचस्पी दिखाई और 3.36 करोड़ रुपये एयूएम के तहत आया। 

इक्विटी योजना के तहत मुनाफा इस साल 20 सितंबर तक 9.73 प्रतिशत से लेकर 16.63 प्रतिशत तक रहा। पीएफआरडीए के आवेदन पर सचिवों की एक समिति विचार कर रही है।  इसके अलावा पीएफआरडीए चाहता है कि सरकारी कर्मचारियों को अपने फंड प्रबंधक और निवेश विकल्प चुनने के लिए और विकल्प दिए जाएं। अगर इसे अनुमति मिल जाती है तो कर्मचारी एनपीएस के अपने पूरे धन का निवेश सरकारी प्रतिभूतियों या कॉर्पोरेट बॉन्ड में कर सकेंगे।

इस समय केवल 3 फंड प्रबंधक एसबीआई पेंशन फंड, एलआईसी पेंशन फंड और यूटीआई रिटायरमेंट सॉल्यूशंस हैं जो सरकारी कर्मचारियों के एनपीएस का प्रबंधन करते हैं। बहरहाल कर्मचारियों को इन फंड मैनेजरों में से विकल्प चुनने और निवेश विकल्प चुनने का विवेकाधिकार नहीं है। बहरहाल निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के पास फंड मैनेजरों के चार विकल्प आईसीआईसीआई पीएफ, रिलायंस, कोटक और एचडीएफसी और हैं।

सरकारी कर्मचारियों के लिए निवेश विकल्प के चयन की कवायद सरकार द्वारा दिए गए व्यापक तरीके के तहत होती है, जिसमें 15 प्रतिशत तक इक्विटी में, 50 प्रतिशत तक सरकारी प्रतिभूतियों में और 45 प्रतिशत तक कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश का अधिकार होता है।  पीएफआरडीए ने सरकार से अनुरोध किया है कि कर्मचारियों को निवेश के व्यापक विकल्पों के चयन का अधिकार दिया जाना चाहिए। 

कॉन्ट्रैक्टर ने कहा कि पीएफआरजीए ने राज्य सरकारों से संपर्क साधा है कि वे अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को लोकप्रिय बनाने के लिए प्रोत्साहन दें, जो असंगठित क्षेत्र के लिए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश साल मेंं 2,000 रुपये देने प्रति ग्राहक देने को सहमत हुआ है।
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