बिजनेस स्टैंडर्ड - कोहरे का गहराता कहर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 21, 2017 03:30 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम खबर

कोहरे का गहराता कहर

वीर अर्जुन सिंह /  11 08, 2017

हवा में जहर

अधिकतर शहरों में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचकर जीवन को खतरे में डाल रहा है।
ऐसे हालात में आप खुद को बचाने के लिए किन बातों पर करें गौर?

दिल्ली में हर तरफ धुंध की चादर पसरी है और  हवा जहरीली होने के साथ ही प्रदूषण खतरनाक स्तर पर  पहुंच चुका है। दिल्ली सरकार ने हाल में स्वेच्छा से शहर में धूल कम करने और हवा में प्रदूषक तत्त्वों (पार्टिकुलेट मैटर या पीएम) के स्तर को कम करने के लिए हेलीकॉप्टरों से पानी का छिड़काव करने के लिए भुगतान का प्रस्ताव दिया था लेकिन पर्यावरणविद् और वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों ने इस विचार को तवज्जो नहीं दी। दिल्ली में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का वायु गुणवत्ता सूचकांक 500 अंकों के स्तर में 487 तक पहुंच गया। वर्तमान में दिल्ली की हवा को बहुत खराब स्तर से गंभीर स्तर में वर्गीकृत किया गया है। दमा पीडि़तों को अपनी दवाइयां साथ रखने की सलाह दी गई है। यह स्पष्ट है कि एक बेहतर कार्ययोजना तैयार करने के लिए काफी समय, विचार-विमर्श और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होगी। बहरहाल कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिनसे आप व्यक्तिगत स्तर पर हवा को साफ कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी जीवनशैली बदलने की जरूरत होगी।

हवा को साफ करें

क्या एयर प्यूरीफायर कारगर है? यदि हां, तो कैसे? यह एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है जो किसी भी तकनीक को अपनाने से पहले जरूर पूछना चाहिए। हां, एयर प्यूरीफायर प्रदूषक तत्त्वों को कम करने और बंद वातावरण में हवा को छानकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा अनुशंसित सुरक्षित स्तर तक लाने में सक्षम हैं। लेकिन इनके उपयोग की अपनी सीमाएं हैं। एक सामान्य एयर प्यूरीफायर में फिल्टर के 3 स्तर होते हैं, प्री फिल्टर, एचईपीए (उच्च क्षमता वाले कण अवशोषक) फिल्टर और कार्बन फिल्टर।  इन फिल्टरों की गुणवत्ता जितनी बेहतर होगी, वायु की गुणवत्ता भी अच्छी होगी, लेकिन साथ में कीमतें भी अधिक हो जाएंगी। इसे पैसिव फिल्टरेशन कहते हैं।

जब भी आप एयर प्यूरीफायर खरीदने जाते हैं, नेगेटिव आयोनाइजेशन और फोटोकैटेलिक ऑक्सीडाइजर जैसे निरर्थक शब्द आपको सुनाए जाते हैं जिससे आपको भरोसा हो जाए कि आप एक अत्याधुनिक तकनीक खरीदने के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च कर रहे हैं। ब्रेथ इजी लैब्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वरुण अग्रवाल स्वच्छता के दावे और मार्केटिंग के हथकंडे के लिए आगाह करते हैं।

अग्रवाल कहते हैं, 'एक्टिव फिल्टरेशन में नई तकनीक का इस्तेमाल होता है जो पार्टिकुलेट मैटर की आणविक संरचना को बदल देती है।' उनका तर्क है कि इस रासायनिक प्रक्रिया में फॉर्मेल्डिहाइड जैसे सह-उत्पाद निकलते हैं जो इस प्रक्रिया का दुष्प्रभाव है। वायु गुणवत्ता विशेषज्ञ और निर्वाण बीईंग के सीईओ जय धर गुप्ता का कहना है कि एक्टिव फिल्टरेशन वाले उत्पादों से बचना चाहिए। एयर प्यूरीफायर के लिए आईक्यू एयर, शार्प और एयरगल जैसे ब्रांडों की सिफारिश की जाती है। अग्रवाल कहते हैं कि सालाना स्तर पर सभी एयर प्यूरीफायर का मूल्यांकन करने की जरूरत होती है और वर्तमान पीएम स्तर बताने वाले मशीन के ऊपर मौजूद डिजिटल पैनल सही आंकड़ा नहीं देते और यह केवल एक बाजारी हथकंडा हैं।

यह कहना सही नहीं है कि पेड़-पौधे हवा को साफ करते हैं। हां, वे कार्बन डाइ ऑक्साइड को ग्रहण करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं, लेकिन वे छोटी कणिकाओं का सामना करने के मामले में अप्रभावी होते हैं। गुप्ता कहते हैं, 'एक आदमी के लिए जरूरी अनुकूल स्तर के ऑक्सीजन के  लिए 8 पौधों की जरूरत पड़ती है।' बहरहाल, घर के अंदर रखने के लिए अच्छे पौधों में मनी प्लांट, सैन्सेवीरिया (स्नेक प्लांट) और खिड़कियों पर एलोवेरा रख सकते हैं।

मास्क

घर से बाहर निकलते ही आप पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन मोनो ऑक्साइड और दूसरी खतरनाक ग्रीनहाउस गैसों से रूबरू होंगे। सर्दियों में धरती के करीब की स्थिर हवा में धूल तथा प्रदूषण के कण मिल जाते हैं और हवा की धीमी गति स्थिति को और खतरनाक बना देती है। इसी वजह से सर्दियों का मौसम ज्यादा प्रदूषित होता है। जब आप ऐसे प्रदूषित वातावरण में रहते हैं तब आप क्या करेंगे?

प्रदूषण मास्क एक जरूरत बन गए हैं। गुप्ता कहते हैं, 'इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ऐसी आपात स्थिति के लिए एक मसौदा तैयार कर रहा है जो बाहरी गतिविधियों को सीमित करने और हर वक्त प्रदूषण मास्क पहनने की सिफारिश करता है।' मास्क की गुणवत्ता पर उनका कहना है कि पीएम 2.5 को 95 प्रतिशत तक छानकर 0.3 माइक्रोन के स्तर तक लाने वाले एन95 फिल्टर के बिना कोई भी मास्क महज एक कपड़े का टुकड़ा है। साथ ही वह कहते हैं कि एक बेहतर मास्क में एक कार्बन फिल्टर और निकास वॉल्व होना चाहिए। गुप्ता के अनुसार, 'मास्क खरीदते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह चेहरे पर पूरी तरह फिट बैठे। थोड़ा अंतर रहने पर भी मास्क बेकार होगा। किसी व्यक्ति को अगर अधिक समय तक पहनना हो तो उसके लिए मास्क का आरामदायक होना जरूरी है।' गुप्ता जोर देते हैं कि दिल्ली और गंगा की तराई वाले इलाकों में वायु गुणवत्ता इतनी खराब है कि किसी को भी एन99 फिल्टर वाले प्रदूषण मास्क को ही खरीदना सुरक्षित रहेगा, जो पीएम 2.5 को 99 प्रतिशत तक फिल्टर करके 0.3 माइक्रोन तक ला देता है।

आहार

प्रदूषण की शुरुआत नाश्ते के साथ ही होती है। आहार विशेषज्ञ और न्यूट्री हेल्थ की संस्थापक शिखा शर्मा पहली सलाह देते हुए कहती हैं कि इस मौसम में ब्रेड खाना बंद करें। वह कहती हैं कि प्रिजरवेटिव के साथ ब्रेड इस प्रदूषण स्तर के साथ मिलकर अत्यधिक एलर्जी और साइन्युसाइटिस जैसी बीमारियों को बढ़ा सकती है। शर्मा कहती हैं कि अधिक पानी पीना हमेशा अच्छा होता है, लेकिन सर्दियों में तो शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए यह जरूरी हो जाता है। वह कहती हैं कि घर के अंदर की हवा को नियंत्रित करने के लिए रासायनिक फ्रेशनर और क्लीनर की जगह प्राकृतिक उपाय अपनाने चाहिए।

फिल्टर का एक जीवन-चक्र होता है इसलिए समय के साथ इन्हें बदलना चाहिए। कपूर फंगस की वृद्धि पर रोक लगाता है और यूकेलिप्टिस तेल से अरोमा थेरेपी करने से ताजगी मिलती है। शर्मा प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए गुड़, आंवला के साथ विटामिन सी और दूसरे खट्टे फल खाने की सलाह देती हैं। शर्मा कहती हैं, 'पहले कोयला खदानों में श्रमिकों को रोजाना गुड़ दिया जाता था। यह जहरीले पदार्थों को फिल्टर कर सकता है।' नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी एडवांसमेंट की वेबसाइट पर मौजूद एक शोध में शरीर में कार्बन की मात्रा कम करने के लिए गुड़ खाने की सिफारिश की गई है। स्वास्थ्य गुरु मिकी मेहता कहते हैं कि धुंध/कोहरा शरीर को अधिक अम्लीय बना देता है और ऐसे में सुबह में क्षारीय फल जैसे अनार, ककड़ी और खरबूजा खाने चाहिए। साथ ही, नारियल पानी और हर्बल चाय से विषाक्त पदार्थ को बाहर निकालने की कोशिश करनी चाहिए।

धुंध में कसरत

पीएम 2.5 जानलेवा है। जितना अधिक आप सांस लेते हैं, उतना ही फेफड़ों को खतरे में डालते हैं। मेहता सलाह देते हैं कि आपको सामान्य रूप से चलना चाहिए और रफ्तार तेज नहीं होनी चाहिए। वह कहते हैं, 'गहन व्यायाम में आप तेज सांस लेते हैं और यह सही नहीं है। यह महत्त्वपूर्ण है कि आप अच्छे से सांस लें लेकिन यह आपकी प्राकृतिक क्षमता के अनुसार ही होना चाहिए।' वह कहते हैं कि इससे शरीर से प्रदूषित तत्वों और कार्बन को बाहर करने में मदद मिलती है और प्रतिरक्षा के स्तर में भी सुधार होता है।  बाहरी गतिविधियों के अलावा, मेहता लिम्फेथिक सिस्टम की कार्यप्रणाली दुरुस्त करने के लिए हल्की उछलकूद वाले व्यायाम की सलाह देते हैं। यह सुस्त तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करने में भी सहायता करता है। साथ ही वह बहुत धीरे और नियंत्रित सांस के साथ अर्ध-सूर्य नमस्कार करने की भी सलाह देते हैं।

डॉक्टर की राय

अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली के फेफड़ा रोग विभाग में सीनियर कंसल्टेंट, राजेश चावला का कहना है कि फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए बाहरी गतिविधियों को सीमित करना जरूरी है, खासकर बच्चों के लिए। यह अव्यावहारिक है लेकिन प्रदूषण भी ज्यादा है इसलिए बाहर जाते वक्त प्रदूषण मास्क पहनें। वह कहते हैं कि आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनें और वापस आने पर अपना गला और चेहरा साफ करें। चावला कहते हैं कि प्रदूषण से अधिक कार्बन ले लेने के कारण साइनस, ब्रोन्कोस्पैस्म (श्वसन नली में समस्या), दूसरी श्वसन संबंधी बीमारियां और थकावट हो सकती है। वह कहते हैं कि दवाई लेने के बावजूद सांस लेने में परेशानी और तेज खांसी कुछ लक्षण हो सकते हैं और ऐसे में डॉक्टर से मिलना चाहिए।

Keyword: delhi, pollution, smog,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 इन्फ्रा के दर्जे से लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.