बिजनेस स्टैंडर्ड - मुनाफा ज्यादा लेने पर कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का प्रस्ताव
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मुनाफा ज्यादा लेने पर कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का प्रस्ताव

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 11 05, 2017

सख्ती शुरू

जीएसटी के तहत घटी कीमतों का लाभ नहीं दे रहे 335 कारोबारियों की सूची केरल ने केंद्र सरकार की स्थायी समिति को भेजी
जागरुकता की कवायद जारी, अन्य राज्य सक्रिय

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत मुनाफा रोधी व्यवस्था गति पकड़ रही है। केरल ने जीएसटी के तहत घटी हुई कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं को न देने को लेकर 335 कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रस्ताव किया है।  केरल की राज्य स्तर की जांच समिति केंद्र सरकार की स्थायी समिति को पत्र लिखा है, जिनमें कारोबारियों की सूची और उनके खिलाफ साक्ष्य दिए हैं। समिति ने कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।  उत्तर प्रदेश व बिहार सहित अन्य राज्यों को अभी औपचारिक रूप से शिकायतें मिलनी हैं, लेकिन उन्होंने जागरूकता अभियान शुरू किया है। साथ ही राज्य मूल्य संबंधी सूचनाएं एकत्र कर रहे हैं और कारोबारियों द्वारा लिए जा रहे मुनाफे की जांच कर रहे हैं। 

केरल के एक अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'हमने सूचनाएं एकत्र की हैं और पाया है कि कुछ कारोबारी जीएसटी वसूल  रहे हैं, जबकि उन्होंने पंजीकरण नहीं कराया है। कु छ अन्य उपभोक्ताओं से अलग से मूल्यवर्धित कर (वैट) वसूल रहे हैं। कुछ अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के बाद जीएसटी ले रहे हैं। हमने ऐसी इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, जिससे इस तरह की गलत गतिविधियों से अन्य को रोका जा सके।' 

अधिकारी के मुताबिक केरल की  समिति ने सभी जिलोंं से जीएसटी के पहले और जीएसटी के बाद के  600 सामानों के दाम की सूचना एकत्र की है और संदेह जताया है कि 430 सामान का ज्यादा दाम लिया जा रहा है। जीएसटी कानून में मुनाफा रोधी व्यवस्था है, जो यह सुनिश्चित करती है कि वस्तु एवं सेवा कर लागू होने पर करों में कमी का पूरा फायदा ग्राहकों को दिया जाए।

उत्तर प्रदेश सरकार कर चोरी, मुनाफा रोधी संबंधी मामलों की सूचना एकत्र कर रही है। साथ ही गुप्त सर्वे और जांच भी चल रही  है। एक अधिकारी ने कहा, 'हम कारोबारियों से आंकड़े एकत्र कर रहे हैं। हम उन मामलों को भी देख रहे हैं, जहां कारोबारी एमआरपी के ऊपर जीएसटी ले रहे हैं। कानून की अवहेलना करने वालों के खिलाफ हम जल्द ही रणनीति तैयार करेंगे।' मुनाफा रोधी मामले ज्यादातर रेस्टोरेंट और गैर ब्रांडों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा, 'हमारे अधिकारी सर्वे व जांच कर रहे हैं। सूचनाओं के आधार पर हम तत्काल कार्रवाई करेंगे।'

महाराष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार के जागरूकता अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कारोबारियों को कर घटने का फायदा न हो, बल्कि ग्राहकों को हो। उन्होंने कहा, 'हम इसके बारे में सूचना प्राप्त कर रहे हैं कि कीमतें किस तरह से तय की जा रही हैं।' उन्होंंने कहा कि शुरुआत में पाया गया है कि रेस्टोरेंट कर का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अब तक कोई शिकायत नहीं आई है।' 

वहीं बिहार के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का मामला अभी सामने नहीं आया है, लेकिन सरकार उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए प्रचार अभियान चला रही है। अधिकारी ने कहा, 'प्रचार अभियान चलाया जा रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही इस तरह के मामले आ सकते हैं।' असम के अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए विस्तार से निर्देश जारी किए गए हैं और कहा गया है कि अगर कहीं से गलत गतिविधि की सूचना आती है तो मुनाफा रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया जाए।

अधिकारियों ने कहा, 'हमें जल्द ही शिकायतें मिलनी शुरू हो जाएंगी।' बहरहाल पंजाब ने कहा कि वह अभी धीमी गति से जांच कर रहा है क्योंकि जीएसटी के तहत स्थिरता आने में अगले 5-6 महीने लगेंगे।  एएमआरजी एसोसिएट्स के रजत मोहन ने कहा, 'मुनाफा रोधी व्यवस्था गति पकड़ रही है, ऐसे में कारोबारियों के लिए यह जरूरी है कि वे जीएसटी नियमों का अनुपालन करें, जिससे उन्हें कोई समस्या न हो।'

व्यवस्था के तहत स्थानीय शिकायतें राज्य स्तरीय  समिति देखती है और उसे केंद्र स्तर की स्थायी समिति को सौंप देती है। स्थायी समिति मामले को सुरक्षा महानिदेशालय को भेज सकती है, जिससे विस्तार से जांच हो सके और अंतिम कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय मुनाफा रोधी प्राधिकरण को सौंपी जाती है। प्राधिकरण कीमतें कम करने, लिया गया धन 18 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से वापस करने, जुर्माना लगाने या आपूर्तिकर्ता का पंजीकरण रद्द करने जैसी कार्रवाई कर सकता है। 

निर्यातकों को भरनी होगी टेबल 6 ए

वस्तु एवं सेवाकर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने रविवार को बताया कि निर्यातकों को रिफंड दाखिल करने के लिए उसके पोर्टल पर जीएसटीआर-1 फॉर्म में टेबल 6ए भरना होगा और इसकी शुरुआत कर दी गई है।  जीएसटीएन ने एक विज्ञप्ति में कहा कि कोई निर्यातक, निर्यात के दौरान जमा किए गए एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) कर की वापसी के दावे के लिए भेजे गए (शिपिंग) बिल और दिए गए जीएसटी कर के इनवॉयस को अपने उस माह के जीएसटीआर-1 फॉर्म में भर सकता है। निर्यातक द्वारा भरे गए शिपिंग बिल को निर्यात किए गए माल पर कर वापसी का आवेदन माना जाता है।

जीएसटीएन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश कुमार ने कहा, 'इनपुट सेवा प्रदाता या एकमुश्त कर देने वाला करदाता या स्रोत पर कर कटौतीकर्ता या स्रोत पर कर संग्रहाक को छोड़कर हर पंजीकृत करदाता जिसने आईजीएसटी का भुगतान कर निर्यात किया है, वो जीएसटी पोर्टल पर दिए गए फॉर्म जीएसटीआर-1 फॉर्म में टेबल 6ए को इलेक्ट्रॉनिक रूप से फाइल कर सकते हैं।'  विज्ञप्ति के अनुसार जीएसटीआर-1 फॉर्म की टेबल 6ए के जरिए करदाता संबंधित अवधि के लिए निर्यात संबंधी आंकड़ों को फाइल कर सकते हैं। 

Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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