बिजनेस स्टैंडर्ड - कानून में सुधार से निवेश को धार
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कानून में सुधार से निवेश को धार

राधिका रामशेषन /  11 05, 2017

हाल-ए-उत्तर प्रदेश

कारोबार के लिहाज से राज्य में अनुकूल परिस्थितियां नहीं हैं। राज्य सरकार कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार का हवाला दे रही है लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है

बोइंग, फेसबुक, एडोबी, ओरेकल और कारगिल सहित 26 दिग्गज अमेरिकी कंपनियों के प्रमुखों ने 23 अक्टूबर को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की तो राज्य में बुनियादी ढांचे के मुद्दे पर चर्चा हुई। हाल में मुख्यमंत्री मॉरिशस भी हो आए हैं। लखनऊ बैठक में इस दौरान राज्य सरकार ने अपनी श्रम नीति में लचीलापन लाने का वादा किया और साथ ही आंकड़ों के साथ यह दिखाने की पूरी कोशिश की कि समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार के दौर में रसातल में चले गई कानून व्यवस्था की स्थिति में गजब सुधार हुआ है। 

यह बैठक यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पाटर्नरशिप फोरम के बैनर तले आयोजित की गई। स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि कई निवेशक कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार से खुश थे। सुधार एक दोधारी तलवार है। पुलिस की मानें तो राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार की वजह यह है कि अपराधों पर लगाम लगाने के लिए परंपरागत लेकिन विवादास्पद और डराने धमकाने वाले तरीकों को लागू किया गया है। इनमें मुठभेड़, अपराधी एवं असामाजिक गतिविधि कानून 1986, उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण कानून 1970 और कानूनी रूप से संवदेनशील संपत्ति जब्त करना शामिल है।

उत्तर प्रदेश कभी मुठभेड़ों के लिए बदनाम था लेकिन हाल के वर्षों में इस पर अमल नहीं हो रहा था। भाजपा 15 साल राज्य की सत्ता से बाहर रही और इस दौरान उत्तर प्रदेश में एक भी मुठभेड़ नहीं हुई। लखनऊ में पुलिस महानिदेशक के कार्यालय से मिले आंकड़ों के मुताबिक इस साल मार्च से सितंबर के मध्य तक 420 मुठभेड़ों में 868 लोग मारे गए। इनमें से अधिकांश मुठभेड़ें पश्चिम उत्तर प्रदेश में हुईं।

भाजपा ने वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आई तो इस इलाके से गुंडों और अपराधियों का पूरी तरह सफाया कर देगी। पार्टी का कहना था कि असामाजिक तत्वों को समाजवादी पार्टी का संरक्षण हासिल है। राज्य के एक अधिकारी ने कहा कि योगी सरकार ने यह महसूस किया कि औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विशेष पुलिस बल गठित करने के बजाय सीधे अपराध की जड़ पर प्रहार किया जाए।

इन मुठभेड़ों का परिणाम यह हुआ कि अब अपराधी जमानत और पेरोल नहीं मांग रहे हैं। वे अच्छी तरह जानते हैं कि जेल से आजादी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। उत्तर प्रदेश पुलिस कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार के दावों के लिए इन आंकड़ों का इस्तेमाल नहीं कर रही है बल्कि वह जनता के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए इसे प्रचारित कर रही है। कुख्यात सलीम-सोहराब-रुस्तम गिरोह का शार्पशूटर सुनील शर्मा 2 सितंबर को पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। वह एक शादी में शामिल होने के लिए पेरोल पर बाहर आया था और जब उसे अदालत ले जाया जा रहा तो उसने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। इस दौरान वह मुठभेड़ में मारा गया।

इसी गिरोह के एक अन्य सदस्य ने अपने बीमार रिश्तेदार को देखने के लिए जमानत अर्जी दाखिल की थी लेकिन फिर उससे जमानत लेने से इनकार कर दिया। उसे डर था कि कहीं उसका हश्र भी अपने साथी जैसा न हो। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता चंद्र मोहन ने कहा कि राज्य सरकार उत्तर प्रदेश की जमीन से अपराधियों का सफाया करने के लिए प्रतिबद्घ है। 

इन मुठभेड़ों का व्यापक संदेश आर्थिक और राजनीतिक है। मुरादाबाद में प्रिटिंग एवं पैकेजिंग कारोबारी और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव श्याम मोहन का मानना है कि योगी सरकार ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से परेशान हिंदू कारोबारियों के पलायन को सफलतापूर्वक रोका है और कारोबार को करीब-करीब पटरी पर ला दिया है।  अलबत्ता राज्य सरकार के एक मंत्री ने स्वीकार किया कि कानून व्यवस्था की स्थिति में बहाली निवेश आकर्षित करने और मतदाताओं को संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं है। बुनियादी क्षेत्र में कड़े फैसलों और लोकलुभावनवाद के बीच संतुलन की जरूरत है।

बिजली मंत्रालय के प्रबंधन को लेकर सरकार की दुविधा साफ नजर आई थी। सत्ता संभालने के कुछ दिन बाद ही योगी ने सबको बिजली मुहैया कराने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने के लिए केंद्र के साथ एक समझौता किया था। केंद्र सरकार ने पूरी उदारता का आश्वासन दिया और आपूर्ति बढऩे की उम्मीद में उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली कंपनियों से 3,800 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए 2016 में जारी निविदाओं को रद्द कर दिया। इस बिजली का इस्तेमाल व्यावसायिक और घरेलू कमी पूरा करने के लिए किया जाना था।

बिजली मंत्री श्रीकांत शर्मा ने जो कदम उठाए हैं उनमें दीर्घकालिक समाधान के बजाय लोकलुभावन दृष्टिकोण हावी है। इनमें गरीबी परिवारों को भारी सब्सिडी के साथ कनेक्शन, सात दिन में ऑनलाइन कनेक्शन, उपभोक्ताओं द्वारा खुद अपना बिल बनाना (गलत जानकारी पर जुर्माने का प्रावधान), बिजली की चोरी रोकने के लिए विशेष पुलिस स्टेशन और बिना मीटर के कनेक्शनों का दुरुपयोग रोकने के लिए सभी सरकारी आवासों में मीटर लगाना शामिल है। शर्मा ने कहा कि आखिरकार बिजली क्षेत्र आईसीयू से बाहर आ चुका है और यह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

योगी सरकार ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क की स्थिति सुधारने के लिए 30,000 करोड़ रुपये के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण की घोषणा की है। भाजपा सरकार इसे पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के जवाब के तौर पर प्रचारित कर रही है। यह राज्य के पूर्वी इलाके और बुंदेलखंड को नए औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए अहम है। इसके बिना राज्य के औद्योगिक विकास की गति थम सकती है।

एक अधिकारी ने कहा कि ग्रेटर नोएडा, नोएडा और गाजियाबाद में अब कोई गुंजाइश नहीं है। लेकिन राज्य के पूर्वी इलाके और बुंदलेखंड में समर्पित मालवहन गलियारा, बिजली और पानी नहीं है। इन इलाकों में कोई बुनियादी सुविधा नहीं है।

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को आश्वासन दिया है कि वह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के लिए धन मुहैया कराएगी क्योंकि यह आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से गुजरेगा। लेकिन माना जा रहा है कि संसाधनों की कमी के कारण राज्य सरकार बड़ी परियोजनाओं को शुरू करने में झिझक रही है। भाजपा सरकार ने अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए छोटे और सीमांत किसानों का कर्ज माफ किया था। इसकी अनुमानित लागत 36,359 करोड़ रुपये थी और इससे 86 लाख किसानों का फायदा होने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि किसान कर्ज माफी के पहले चरण में अप्रैल से सितंबर तक 11.93 लाख किसानों को प्रमाणपत्र दिए हैं और उनका 7,371 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ किया जाना था लेकिन कई मामलों में केवल 1000 और 500 रुपये ही माफ किए गए हैं। जब तक दूसरी खामियों को दूर नहीं किया जाता है तब तक योगी सरकार को कानून व्यवस्था और दूसरे भावुक मुद्दों के सहारे अपनी नैया पार लगाने की उम्मीद है।

Keyword: uttar pradesh, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,
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