बिजनेस स्टैंडर्ड - राहत में खाद्य तेल रिफाइनरी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, November 23, 2017 02:02 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम निवेश खबर

राहत में खाद्य तेल रिफाइनरी

दिलीप कुमार झा / मुंबई November 05, 2017

कच्चे और रिफाइंड (परिष्कृत) तेल के आयात शुल्क में वृद्धि की वजह से पिछले दो महीनों में घरेलू खाद्य तेल रिफाइनरी की औसत परिचालन क्षमता 15 प्रतिशत तक बढ़ गई है। अगस्त में घरेलू खाद्य तेल रिफाइनरी की औसत परिचालन क्षमता घटकर 30 प्रतिशत रह गई थी जिससे उनका परिचालन मुश्किल हो गया था। कच्चे पामतेल (सीपीओ) और परिष्कृत तेल, ब्लीच्ड व डायोडाइज्ड (आरबीडी) पामोलिन पर आयात शुल्क क्रमश: 7.5 प्रतिशत और 15 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत और 25 प्रतिशत किए जाने के बाद खाद्य तेल रिफाइनरी की औसत परिचालन क्षमता बढ़कर 45 फीसदी हो गई है।
 
आयातित कच्चे तेल को स्थानीय रिफाइनरी में परिष्कृत किया जाता है और इससे यहां रोजगार उत्पन्न होता है। इसके विपरीत, आयातित परिष्कृत तेल मूल्य संवर्धन के बिना ही पैक किया जाता है, जिससे रिफाइनिंग क्षमता में सुस्ती आ जाती है। उद्योग के एक कार्यकारी ने कहा कि सितंबर में कच्चे खाद्य तेल का आयात 15 प्रतिशत तक बढ़ा है। इसका मतलब है कि अगस्त में सीपीओ और आरबीडी पर आयात शुल्क में बढ़ोतरी के बाद खाद्य तेल मिलों की रिफाइनिंग क्षमता का औसत उपयोग 15 प्रतिशत तक बढ़ा है।
 
सोल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (सीईए) का अनुमान है कि सितंबर में भारत के कच्चे खाद्य तेल का आयात 12.4 लाख टन रहा है, जो अगस्त के 10.7 लाख टन से 15.88 प्रतिशत अधिक है। इसके विपरीत, आरबीडी का आयात सितंबर में कुछ घटकर 2,61,907 टन पर आ गया, जो अगस्त में 2,64,125 टन था। सितंबर में भारत के 15 लाख टन वनस्पति तेल के आयात में कच्चे खाद्य तेल का हिस्सा अगस्त के 80 प्रतिशत से तीन प्रतिशत बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया है।
 
इंडोनेशिया अन्य जिंसों के साथ-साथ भारत को किए जाने वाले अपने सीपीओ निर्यात में इजाफे की योजना बना रह है ताकि अन्य देशों के निर्यात में होने वाली गिरावट की भरपाई भारत के जरिए की जा सके। पिछले हफ्ते मुंबई में तीन दिवसीय व्यापार मेले इंडोनेशिया के वाणिज्य दूत सोउत सिरिन्गोरिन्गो ने कहा था कि हम पर्यटन, पारंपरिक हस्तकला, आभूषण, लकड़ी और बेंत के फर्नीचर के जरिए भारत के साथ अपने द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाना चाहते हैं। साथ ही, हम भारत को पाम तेल के निर्यात में वृद्धि करना चाहते हैं, जो खाना पकाने के तेल का विश्व का सबसे बड़ा खरीदार है।
 
लगभग 3.2 करोड़ टन वार्षिक उत्पादन के साथ इंडोनेशिया पाम तेल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जिसका लगभग 84 प्रतिशत वह निर्यात करता है। 10 अरब डॉलर के वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार में कच्चे तेल का हिस्सा 30 प्रतिशत रहता है। इस व्यापार में इंडोनेशिया की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत और भारत की 25 प्रतिशत होती है। भारत लगभग 80 लाख टन आयात करता है। यह भारत के वार्षिक वनस्पति तेल आयात का आधा है। यह आयात इंडोनेशिया से प्रमुख रूप से कच्चे पाम तेल के रूप में किया जाता है।
Keyword: edible oil, import,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 पेमेंट बैंक में प्रतिस्पर्धा होगी ग्राहकों के लिए फायदेमंद?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.