बिजनेस स्टैंडर्ड - बड़ी राहत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, November 22, 2017 04:45 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

बड़ी राहत

संपादकीय /  October 30, 2017

राज्यों के वित्त मंत्रियों के एक समूह का सुझाव है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के ढांचे में एक और बदलाव किया जाना चाहिए। समूह की अनुशंसाओं में से अधिकांश छोटे कारोबारियों पर पडऩे वाले अनुपालन के दबाव से संबंधित हैं और इन पर आगामी 9 और 10 नवंबर को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में विचार किया जाएगा। इस दबाव के चलते बड़ी तादाद में छोटे व्यापारी या तो जीएसटी नेटवर्क से घबराते हैं या फिर उनको इस नेटवर्क की कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है। मंत्री समूह ने रविवार को जो अनुशंसाएं कीं उनमें एक यह प्रमुख है कि कंपोजिशन योजना की सीमा को एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए। समूह ने यह भी कहा है कि इस योजना में व्यापारियों, विनिर्माताओं और रेस्तराओं के लिए क्रमश: 1, 2 और 5 फीसदी की मौजूदा दरों के बजाय एक फीसदी की समान दर की व्यवस्था की जाए। उसने यह सुझाव भी दिया है कि कारोबारियों को वस्तुओं की विभिन्न राज्यों में आपूर्ति करने दी जाए। ये बदलाव लाखों छोटे कारोबारियों, उद्यमियों और रेस्तरां के लिए लाभप्रद साबित हो सकते हैं। 

 
कुछ प्रमुख अनुशंसाएं छोटे कारोबारियों से इसलिए ताल्लुक रखती हैं क्योंकि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें दोनों यह जानते हैं कि जीएसटी ने आर्थिक गतिविधियों में किस कदर उथलपुथल पैदा की है। परंतु अनुशंसाओं की सूची कहीं अधिक व्यापक है। मंत्री समूह ने परिषद से इस बात पर भी विचार करने को कहा है कि जीएसटी करदाताओं को हर तिमाही रिटर्न दाखिल करने का अवसर दिया जाए। अब तक यह सुविधा केवल उन लोगों को हासिल थी जो कंपोजिशन योजना के पात्र हैं। इसी प्रकार उसने यह भी कहा है कि वातानुकूलित और गैर वातानुकूलित रेस्तराओं का फर्क खत्म किया जाए। यानी वे चाहते हैं कि वातानुकूलित रेस्तरां को भी इनपुट टैक्स क्रेडिट मुहैया कराया जाए और इस पर मौजूदा 18 फीसदी के बजाय 12 फीसदी कर लगाया जाए।
 
ये तमाम उपाय समझदारी भरे हैं क्योंकि अब यह स्पष्ट हो चला है कि कंपोजिशन योजना को अधिक आकर्षक बनाया जाना जरूरी है। सरकार इन दिक्कतों को हल करने के लिए उत्सुक है, यह भी साफ है क्योंकि सोमवार को उसने जीएसटीआर-2 फॉर्म भरने की समय सीमा एक महीने बढ़ा कर 30 नवंबर कर दी। जीएसटी रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया में यह अहम है क्योंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट का पहलू भी इसमें शामिल है। जीएसटीआर-3 के लिए यह सीमा 11 दिसंबर कर दी गई है।
 
ये तमाम विमर्श, सुझाव और बदलाव काबिलेतारीफ हैं क्योंकि इनसे ईमानदार करदाताओं और कारोबारियों को मदद मिलेगी और उनकी आर्थिक गतिविधियों में विसंगतियां कम होंगी। उदाहरण के लिए फाइलिंग की तिथियों को बार-बार आगे बढ़ाना यह दिखाता है कि लोग कर चुकाना चाहते हैं लेकिन जीएसटी नेटवर्क की तकनीकी खामियों के चलते वे नाकाम रहते हैं। इस दौरान नियमों में होने वाले बदलाव भी उनके लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। कुछ अन्य अहम बदलाव भी हैं जिनकी मदद से व्यवस्था के परिचालन को सहज बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने से पहले इनवॉयस मिलान की दिक्कत लगातार कर फाइलिंग में मुश्किल पैदा कर रही है क्योंकि मौजूदा व्यवस्था काफी जटिल है। इसे लेकर कई शिकायतें हैं और अगर परिषद इनवॉयस मिलान की व्यवस्था खत्म करती है तो यह सबसे बेहतर होगा। विशिष्ट दरों में भी बदलाव जरूरी है। इसमें दोराय नहीं कि जीएसटी का क्रियान्वयन कमजोर रहा है और इससे ऐसी कई समस्याएं खड़ी हुईं जिनसे बचा जा सकता था। परिषद अगर बदलाव की प्रक्रिया को जल्द विराम देकर अनिश्चितता खत्म करे तो यह सबसे अच्छा होगा।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 कर में छूट से बढ़ेंगे ऑनलाइन भुगतान?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.