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एयॉन, एसएसजी की एमटेक ऑटो में निवेश में दिलचस्पी

वीणा मणि और सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली October 30, 2017

एनसीएलटी ले जाई गईं कंपनियों में शामिल वाहन कलपुर्जा निर्माता एमटेक ऑटो में कई प्राइवेट इक्विटी ने दिलचस्पी दिखाई है। एयॉन और एसएसजी कैपिटल एमटेक ऑटो में दिलचस्पी दिखाने वाली पीई फर्मों में शामिल हैं। सूत्रों ने यह जानकारी दी। समझा जाता है कि एयॉन और एसएसजी अन्य कंपनियों मसलन ज्योति स्ट्रक्चर्स में भी निवेश करना चाहती हैं, जो एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही हैं। इस बारे में जानकारी के लिए एसएसजी कैपिटल को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला जबकि एयॉन ने इस मसले पर टिप्पणी करने से मना कर दिया। 
 
इस बीच, एमटेक ऑटो की दिवालिया प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी ने कहा कि लेनदारों की समिति ने अंतरिम वित्त के लिए कंपनी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जब रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने पहली बार अंतरिम वित्त के लिए कहा था तब लेनदारों की समिति ने इसे नामंजूर कर दिया था। एमटेक ऑटो ऐसा उदाहरण है जहां अंतर्देशीय दिवालिया प्रक्रिया देखने को मिल रही है। एमटेक की सिंगापुर इकाई और यूरोप की इसकी कुछ इकाइयों को पीडब्ल्यूसी के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने घसीटा है। भारत में एमटेक ऑटो के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की टीम सिंगापुर व यूरोप की इकाइयों का मामला देख रहे प्रोफेशनल से औपचारिक समझौता कर रही है ताकि भारत में लेनदारों की समिति को सूचना मिल सके। एक सूत्र ने यह जानकारी दी। इस मामले में कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है क्योंकि भारत के पास अभी तक अंतर्देशीय दिवालिया कानून नहीं है। प्राइवेट इक्विटी दिग्गज केकेआर ने एमटेक ऑटो की अंतरराष्ट्रीय सहायक एमटेक ग्लोबल टेक्नोलॉजिज के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की है। एमटेक ग्लोबल टेक्नोलॉजिज के ऊपर केकेआर का 45 करोड़ डॉलर बकाया है। 
 
कंपनी पर वित्तीय दबाव विदेश में कई अधिग्रहण के चलते पड़ा है। समस्या की शुरुआत 2015 में हुई जब केयर रेटिंग्स ने एमटेक के बॉन्ड की रेटिंग निलंबित कर दी और जेपी मॉर्गन ने म्युचुअल फंडों के यूनिट भुनाने पर रोक लगा दी। कंपनी ने जून 2017 में समाप्त तिमाही में 889.6 करोड़ रुपये का एकल नुकसान दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले दोगुना हो गया। परिचालन से कुल आय इस अवधि में 447 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले के मुकाबले 13.4 फीसदी कम है। एमटेक ऑटो के ऊपर 14,000 करोड़ रुपये की देनदारी है। आईडीबीआई बैंक और कॉरपोरेशन बैंक इसके लेनदारों में शामिल है। एमटेक ऑटो के ऊपर 14,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके खिलाफ मामला एनसीएलटी के चंडीगढ़ पीठ में स्वीकार किया गया है। एमटेक के संस्थापक अरविंद धाम और उनके परिवार के पास कंपनी की 52.4 फीसदी हिस्सेदारी है
Keyword: component, NCLT, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी),
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