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बोलीदाताओं को प्रवर्तकों से एतराज

देव चटर्जी / मुंबई October 30, 2017

एनसीएलटी में पहुंचीं कंपनियों के  लिए बोली लगाने वाले और मौजूदा प्रवर्तकों के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया है। बोली लगाने वाले ऐसी परिसंपत्तियों के लिए मौजूदा प्रवर्तकों की तरफ से बोली लगाने पर एतराज जता रहे हैं क्योंकि इन्होंने कर्ज के पुनर्भुगतान में चूक की है। एक बड़ी कंपनी के आला अधिकारी (जो बड़ी स्टील कंपनी के लिए बोली लगा रहे हैं) ने कहा, बोली की पूरी प्रक्रिया दोषयुक्त है क्योंकि मौजूदा प्रवर्तकों को अन्य बोलीदाता के साथ परिसंपत्तियों के लिए बोली लगाने की अनुमति दी गई है। अधिकारी ने कहा, बैंकों की तरफ से कंपनी को एनसीएलटी संदर्भित किए जाने और इसके बाद प्रवर्तकों से भी बोली आमंत्रित करने का क्या मतलब है? इसके बजाय बैंकों को कंपनी कर्ज पुनर्गठन का रास्ता अपनाना चाहिए था और इस तरह से हर किसी का वक्त बच जाता। इस साल जून में आरबीआई ने बैंकों को दबाव वाले 12 खाते एनसीएलटी ले जाने का निर्देश दिया था और बैंकों ने इसके बाद एनसीएलटी का रुख किया और अदालत के आदेश के मुताबिक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की नियुक्ति की। इन कंपनियों का निदेशक मंडल निलंबित है और बोली आमंत्रित की गई है।
 
एस्सार स्टील के मामले में रुइया ने अपनी रूसी साझेदार वीटीबी बैंक के साथ इसके हजीरा संयंत्र (1 करोड़ टन क्षमता) के लिए बोली लगाई है। रुइया के अलावा टाटा स्टील और आर्सेलर मित्तल ने भी एस्सार की परिसंपत्तियों के लिए बोली लगाई है। जेएसडब्ल्यू स्टील भूषण स्टील और मोनेट इस्पात के लिए बोली लगा रही है। भूषण पावर ऐंड स्टील को वेदांत और टाटा स्टील के अलावा पांच अन्य कंपनियों से बोली मिली है। एनसीएलटी को संदर्भित अन्य कंपनियां हैं एमटेक ऑटो, इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स, जेपी इन्फ्राटेक, लैंको और ज्योति स्ट्रक्चर्स। संपर्क किए जाने के बाद मौजूदा प्रवर्तकों ने कहा कि दिवालिया संहिता के मुताबिक वे कंपनी के लिए बोली लगाने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रवर्तकों को अन्य कंपनियों के लिए भी बोली लगाने की अनुमति दी गई है। एक मौजूदा प्रवर्तक ने कहा, कई बार बाहरी कारकों की वजह से कंपनियां कर्ज चुकाने में नाकाम रहती हैं। यह नाकामी पर्यावरण मंत्रालय, नियामकों की मंजूरी के अभाव, आतंकवादी हमला या अन्य देशों की तरफ से उत्पादों की डंपिंग आदि से हो सकता है, जैसा कि स्टील के मामले में हुआ है। सबसे अच्छी बोली लगाने वाली कंपनी इसमें विजयी होगी।
 
एनसीएलटी को संदर्भित किए जाने के बाद बोलीदाता इन कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध कराने पर भी ऐतराज जता रहे हैं। उन्होंने कहा, यह इक्विटी का मूल्यांकन देता है जो वास्तव में शून्य है क्योंकि बैंक अपने कर्ज पर भारी नुकसान उठा रहे हैं। उन्होंंने कहा कि अमेरिका में जब किसी कंपनी को दिवालिया कानून के चैप्टर-11 के तहत संदर्भित किया जाता है तो इसके शेयर निलंबित किया जाता है ताकि निवेशकों को ऐसे शेयर में सटोरिया गतिविधि में शामिल होने का मौका न मिले। 
 
एक सीईओ ने कहा, बोली लगाने वालोंं को सलाह देने वाले निवेश बैंकरों ने सेबी को पत्र लिखा है ताकि शेयर स्टॉक एक्सचेंजों पर निलंबित की जा सके। इनमें से कुछ शेयरों की कीमत जून से काफी घटी हैं जब आरबीआई ने पहली बार कंपनियों को एनसीएलटी ले जाने का निर्देश दिया था। उन्होंंने कहा, नए निवेशक के पास उनकी पुनर्गठन योजना के तहत इसे सूचीबद्ध कराने या न कराने का अधिकार है। अधिकारी ने कहा, तरजीही शेयर व अन्य प्रतिभूतियों के मामले में भी स्पष्टता आनी चाहिए। बोली लगाने वाले बोली पर अंतिम फैसला बैंकों की तरफ से उठाए जाने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए करेंगे।
Keyword: NCLT, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी),
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