बिजनेस स्टैंडर्ड - समालोचना नहीं तारीफ में लिखी जा रहीं मोदी पर किताब
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, November 18, 2017 06:06 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

समालोचना नहीं तारीफ में लिखी जा रहीं मोदी पर किताब

जिंदगीनामा
कनिका दत्ता /  October 29, 2017

वेबसाइट स्क्रॉल पर प्रकाशित नितिन सेठी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार एक व्यापक योजना पर काम कर रही है जिसके तहत मीडिया के जरिये सुनियोजित तरीके से तूफानी हमला किया जा रहा है। इसके तहत प्रधानमंत्री कार्यालय मंत्रालयों को आदेश देता है, मीडिया में अपने अनुकूल विचार स्थापित करता है और स्वतंत्र विशेषज्ञों से नीतियों का समर्थन कराता है। इस अभियान के बारे में उल्लेखनीय बात यह है कि खुद मोदी को समर्पित लेखन के बावजूद इसे आवश्यक समझा जा रहा है।

 
अधिकांश प्रधानमंत्रियों का आलोचनात्मक विश्लेषण ही होता है। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी तो इस मामले में भी अग्रणी साबित होंगे। कई पूर्व प्रधानमंत्री खुद प्रतिभाशाली लेखक रह चुके हैं। अटल बिहारी वाजपेयी कवि थे तो स्वर्गीय पी वी नरसिंह राव ने अप्रत्याशित विषयासक्ति वाला उपन्यास लिखा। मोदी ने भी कई किताबें लिखी हैं जिनमें कविता की एक किताब भी शामिल है। परंतु उनके बारे में लिखी गई किताबों की बात की जाए तो नेहरू और इंदिरा गांधी को छोड़ वह शेष सभी प्रधानमंत्रियों को पीछे छोड़ चुके हैं। 
 
अब तक मोदी पर करीब 30 किताबें लिखी जा चुकी हैं और इनमें से 99.99 फीसदी किताबें उनकी विभिन्न क्षमताओं और अन्य पहलुओं को समर्पित हैं। इनमें से अधिकांश किताबें अंग्रेजी में हैं लेकिन कुछ ङ्क्षहदी और गुजराती में भी प्रकाशित हुई हैं। देश की अनेक भाषाओं में इनके अनुवाद भी प्रकाशित हैं। अगर आप सोचें तो पाएंगे कि देश के किसी प्रधानमंत्री को लेकर कभी कोई कॉमिक बुक नहीं तैयार की गई। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले मोदी के बाल जीवन को लेकर जरूर बाल नरेंद्र नाम से किताब आई। उसमें उनके बाल्यकाल के ऐसे सत्कार्यों का जिक्र है जिनकी पुष्टि का कोई जरिया नहीं। 
 
जहां तक किताबों की बात है तो उनमें से कई 2014 में मोदी की लोकसभा जीत के पहले या तुरंत बाद लिखी गईं। पत्रकार नीलांजना मुखोपाध्याय द्वारा किए गए एक निष्पक्ष आकलन, नरेंद्र मोदी: द मैन, द टाइम्स के अलावा ज्यादातर किताबों में केवल तारीफ ही तारीफ है। इन किताबों के शीर्षक ही काफी कुछ कहते हैं: नरेंद्र मोदी: ग्रेट पर्सनैलिटीज ऑफ इंडिया, सेंटरस्टेज: इनसाइड द नरेंद्र मोदी मॉडल ऑफ गवर्नेंस, द नरेंद्र मोदी फिनॉमिना, नरेंद्र मोदी: चेंज वी कैन बिलीव इन...आदि।
 
अत्यधिक तारीफ का यह सिलसिला अस्वाभाविक रूप से विदेशी लेखकों की दो किताबों तक खिंचा चला आता है जबकि उनको आमतौर पर निष्पक्ष माना जाता है। मई 2014 में प्रकाशित और ऐंडी मरीनो लिखित किताब के बारे में कहा गया कि यह ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखी गई है जो मोदी तक अबाध पहुंच रखने वाला एकमात्र विदेशी था। इस विशिष्ट पहुंच से उन्हें क्या हासिल हुआ? मरीनो लिखते हैं कि वह मोदी के व्यक्तित्व की उदारता से अभीभूत थे।
 
तकरीबन एक साल बाद लिखी गई। इसके लेखक है टोनी ब्लेयर के पूर्व प्रवक्ता लांस प्राइस। अपनी किताब के लोकार्पण के बाद द टाइम्स ऑफ यूके को दिए एक साक्षात्कार में प्राइस ने कहा कि द मोदी इफेक्ट नामक किताब लिखने के लिए उनको किसी न किसी रूप में भरपाई की गई। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री के एक सहयोगी द्वारा यह किताब लिखने के लिए उनसे संपर्क किया गया और इससे पहले उन्होंने कभी मोदी का नाम तक नहीं सुना था।
 
किताबों के प्रकाशन के इस रुझान के बारे में उल्लेखनीय बात यह है कि मोदी के कार्यकाल के तीन साल बाद भी न तो किताबें आनी कम हुई हैं और न ही उनका प्रशंसा भाव आलोचना में बदला है। भारतशक्तिडॉटकॉम नामक वेबसाइट के संस्थापक नितिन गोखले ने हाल ही में एक पुस्तक लिखी है जिसका नाम है सिक्युरिंग इंडिया द मोदी वे। यह किताब उस समय बाजार में आई जब हम चीन के साथ गतिरोध किसी तरह खत्म कर सके थे और सर्जिकल स्ट्राइक के बावजूद पाकिस्तान की ओर से सीमा उल्लंघन की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं।
 
ऐसा नहीं है कि यह खुशामदी लेखन छोटे मोटे प्रकाशन गृहों से ही हो रहा है बल्कि कुछ किताबें तो जानेमाने प्रकाशन गृहों से भी आई हैं जिनमें हार्पर कॉलिंस, रैंडम हाउस, पेंगुइन, रोली बुक्स, ब्लूम्सबरी, रूपा आदि शामिल हैं। इसे देखकर तो यही लगता है कि प्रधानमंत्री के बारे में लिखना मुनाफे का सौदा बना हुआ है। इसके बावजूद ये प्रकाशक अपवाद हैं। कई किताबों में तो प्रकाशकों के नाम टीम स्पिरिट इंडिया, पॉपुलर प्रकाशन और शुबी पब्लिकेशंस आदि हैं। ओखला से संचालित होने वाले डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशन ने तो कुंजीनुमा तीन किताबें मोदी पर निकाल डालीं। 
 
एक ऐसा प्रधानमंत्री जिसने अभी अपना पहला कार्यकाल भी पूरा नहीं किया, उसके लिए यह कम बड़ी उपलब्धि नहीं मानी जानी चाहिए कि प्रकाशक उस पर यूं जान छिड़क रहे हैं। भारत के समान बहसप्रिय देश में अपनी यूं छवि गढऩा कोई मामूली बात नहीं। रोचक बात यह है कि अब तक किसी प्रशंसक ने मोदी व नोटबंदी को लेकर कुछ नहीं लिखा है। जबकि यह दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी कवायद तथा मोदी के कार्यकाल का सबसे बड़ा नीतिगत निर्णय था।
Keyword: book, narendra modi, development, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या मूडीज के बाद दूसरी एजेंसियां भी बढ़ाएगी भारत की रेटिंग?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.