बिजनेस स्टैंडर्ड - छोटे कर्जदार भी बन सकेंगे साखदार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, November 22, 2017 04:47 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विश्लेषण खबर

छोटे कर्जदार भी बन सकेंगे साखदार

तिनेश भसीन /  October 29, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पियर-टू-पियर (पी2पी) ऋण प्लेटफॉर्मों को ग्राहकों के लिए ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की पहल की है। केंद्रीय बैंक ने हाल में पी2पी प्लेटफॉर्मों को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की श्रेणी में शामिल किया था। अब नियामक ने वे नियम जारी किए हैं, जिनका उन्हें पालन करना होगा।  आई-लेंड के संस्थापक और निदेशक शंकर वड्डाडी ने कहा, 'इन नियमों से यह सुनिश्चित होगा कि पी2पी प्लेटफॉर्म ऋणदाताओं के हितों की सुरक्षा करेंगे और कर्ज लेने वालों को जल्द ऋण मिलेगा।' एनबीएफसी की श्रेणी में शामिल करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब पी2पी प्लेटफॉर्म की क्रेडिट ब्यूरो तक पहुंच होगी।

 
अब पी2पी प्लेटफॉर्मों को ऋण से संबंधित आंकड़े क्रेडिट ब्यूरो से साझा करने होंगे। कर्ज लेने वाले व्यक्ति की साख की सूचना ऋणदाताओं से साझा करना अनिवार्य होगा। इस सूचना के आधार पर ऋणदाता कर्ज देने या न देने के बारे में उचित फैसला ले पाएंगे। पी2पी प्लेटफॉर्मों का मानना है कि इससे डिफॉल्ट की दर घटाने में मदद मिलेगी और ऋणदाताओं को अपने कर्ज पर बेहतर प्रतिफल मिल जाएगा। 
 
पहले अगर कोई कर्जदार किसी पी2पी प्लेटफॉर्म से लिए गए ऋण में डिफॉल्ट कर देता था तो इससे उसके किसी बैंक या एनबीएफसी से कर्ज लेने के आसार कम नहीं होते थे क्योंकि उसका ब्योरा क्रेडिट ब्यूरो को नहीं दिया जाता था। ऋण का ब्योरा क्रेडिट ब्यूरो के साथ साझा करने से उन ईमानदार कर्जदारों को मदद मिलेगी, जिनका अभी तक ऋण लेने का कोई ब्योरा नहीं है। बैंक जैसे बहुत से संस्थागत कर्जदाता उस व्यक्ति को ऋण नहीं देते हैं, जिसका ऋण लेने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
 
ऐसे कर्ज लेने वाले व्यक्ति अपना क्रेडिट रिकॉर्ड बनाने के लिए पी2पी प्लेटïफॉर्मों का इस्तेमाल कर सकते हैं। बहुत से पी2पी प्लेटफॉर्म मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप खरीदने के लिए 5,000 रुपये से 10,000 रुपये तक का ऋण देते हैं। निम्न क्रेडिट स्कोर वाले ऋणी के लिए इन प्लेटफॉर्मों से कर्ज मिलने के ज्यादा आसार होते हैं, भले ही बैंक और एनबीएफसी उसके आवदेन को खारिज कर दें। लेकिन इस कर्ज की दर काफी अधिक करीब 24 से 36 फीसदी हो सकती है।
 
असल में अब कर्ज लेने वाले व्यक्ति पी2पी प्लेटफॉर्मों के जरिये बड़े ऋण ले सकते हैं। उनमें से अधिकतर को पहले 2.5 लाख रुपये से अधिक का कर्ज नहीं मिलता था। आरबीआई ने कहा है कि ऋणी सभी प्लेटफॉर्मों से 10 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते हैं। फेयरसेंट के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) रजत गांधी कहते हैं, 'इससे कर्ज की जरूरत वाले उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को मदद मिलेगी।'
 
आरबीआई के नियमों में यह भी अनिवार्य किया गया है कि पी2पी प्लेटफॉर्म डिफॉल्ट की स्थिति में वसूली की व्यवस्था बनाएंगे। वसूली प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में सभी पी2पी प्लेटफॉर्म कर्ज लेने वालों को पोस्ट डेटेड चेक जमा कराने को कहेंगे। डिफॉल्ट की स्थिति में ये प्लेटफॉर्म चेक बाउंस का मामला दर्ज करा सकते हैं। लेनदेनक्लब के सह-संस्थापक और सीईओ भाविन पटेल ने कहा, 'पहले अदालत पहली ही सुनवाई में यह कहते हुए मामले को खारिज कर देती थी कि हमें मामला दायर करने का कोई हक नहीं है। एनबीएफसी की श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद अब हम चेक बाउंस का मामला दायर कर सकते हैं।' इसके साथ ही ऋणी को उन मामलों में राहत मिलती है, जिनमें किसी वाजिब वजह से कर्ज लौटाने में देरी होती है। इन प्लेटफॉर्मों को आरबीआई के वसूली दिशानिर्देशों का पालन करना होगा। वे ऋणी को बेवजह  परेशान नहीं कर सकते।
 
बहुत से पी2पी प्लेटफॉर्म कर्जदाताओं को उनके दिए गए पैसे पर गारंटी देते थे। यह काम निवेशक सुरक्षा फंड जैसी विभिन्न पहलों के जरिये किया जाता था, जिसका मकसद ऋणदाताओं को लुभाना होता था। आरबीआई ने कहा है कि प्लेटफॉर्म किसी भी रूप में ऐसी गारंटी नहीं दे सकते। गांधी ने कहा, 'ऐसे कदम से भविष्य में प्लेटफॉर्म प्रभावित हो सकते हैं। इस समय उद्योग छोटा है। कल्पना कीजिए कि 2,000 से 2,500 करोड़ रुपये के बहीखाते वाला कोई व्यक्ति कोई पूंजी गारंटी मुहैया करा रहा है।' 
 
आरबीआई इन प्लेटफॉर्मों का नियामक बन रहा है, इसलिए उन्हें एक उचित शिकायत निवारण व्यवस्था लागू करनी होगी और एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा। प्लेटफॉर्म की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर व्यक्ति अपनी शिकायत के समाधान के लिए आरबीआई से संपर्क कर सकता है। 
Keyword: P2P, bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई),
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 कर में छूट से बढ़ेंगे ऑनलाइन भुगतान?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.