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मूल्यांकन व बोलीदाता के चयन के मानकों पर लेनदार की बात

सुरजीत दास गुप्ता और वीणा मणि / नई दिल्ली October 27, 2017

एनसीएलटी की चौखट पर पहुंचाई गई कंपनियों के लेनदारों के कंसोर्टियम में शामिल बैंक इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि मूल्यांकन और बोली लगाने वालों के चयन के लिए दिशानिर्देश का ढांचा क्या होना चाहिए। बैंकों की राय है कि किसी क्षेत्र विशेष के मूल्यांकन से जुड़े दिशानिर्देश सबसे अच्छे हो सकते हैं क्योंकि विभिन्न उद्योगों की जरूरतें एक दूसरे से अलग होती हैं। ऐसे में उदाहरण के लिए स्टील की सभी कंपनियों के लिए दिशानिर्देश और बोली लगाने वालों के चयन के मानदंड समान होंगे, लेकिन यह वाहन कलपुर्जा कंपनियों से अलग होंगे। बैंकरों ने कुछ दिन पहले की बैठक में अन्य विकल्पों पर भी चर्चा की, जिनमें मूल्यांकन का मानदंड शामिल है और यह अलग-अलग कंपनी के लिए अलग-अलग होता है। तीसरा विकल्प यह है कि चयन के लिए एक ही दिशानिर्देश हों, जो सभी उद्योगों व कंपनियों पर लागू हो।
 
इस चर्चा में शामिल सूत्रों ने कहा कि चयन के लिए दिशानिर्देश पारदर्शी होना चाहिए, अन्यथा नुकसान उठाने वाला कानूनी कदम उठा सकता है और इससे समय जाया होगा और पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है। उन्होंने कहा कि मोनेट इस्पात के लिए गैर-बाध्यकारी बोली के लिए दिशानिर्देश के मसौदे को चर्चा के लिए पहले सामने रखा जा चुका है, जिसकी समयसीमा 16 नवंबर है। जिन्होंने अभिरुचि पत्र जमा कराया है वे इस दस्तावेज के आधार पर तय मानदंडों के मुताबिक बोली लगाएंगे।
 
कुछ बैंकरों ने कहा कि उन्होंने क्षेत्र विशेष के नियमों को प्राथमिकता दी है। वे रिजर्व प्राइस तय करने के लिए सही फॉर्मूला बनाना चाहते हैं। इस बारे में अपना पक्ष कंपनी मामलों के मंत्रालय को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट कंपनी के तत्व वाहन कंपनी से अलग होते हैं, जो स्टील कंपनी के अलग। बैंकों को लगता है कि दिशानिर्देश सख्त व विशिष्ट होने चाहिए क्योंकि यह सिर्फ उनके बकाये का मामला नहीं है बल्कि वास्तविकता यह है कि उन्हें इन कंपनियों के लिए उच्च प्रावधान बनाए रखने के लिए कहा गया है। बैंकरों का मानना है कि अगर कंपनी की बिक्री मूल्यांकन के आधे से कम पर होती है तो यह बैंकरों के लिए अनुचित होगा।
 
विशेषज्ञों ने कहा कि बोली के विजेता पर अंतिम फैसला पांच चरणों वाली प्रक्रिया पर आधारित होगी, जिसमें मर्चेंट बैंकर व इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल की सिफारिशें शामिल होंगी। उनकी सिफारिशों पर प्रबंधन समिति चर्चा करेगी, जिसमें कंपनी के पांच अग्रणी लेनदार शामिल होंगे। इस छोटे समूह की सिफारिशें इसके बाद लेनदारों की समिति के सामने रखी जाएगी, जिसमें बैंकों के पूरे कंसोर्टियम का प्रतिनिधित्व है, जिन्होंने कंपनी को कर्ज दिया है। यहां ये प्रस्ताव उचित व्यवस्था के तहत मतदान के लिए रखे जाएंगे और इसे निश्चित तौर पर 75 फीसदी मत मिलना चाहिए, जिसके बाद इसे एनसीएलटी को संदर्भित किया जाएगा जो अंतिम फैसला देगा।
 
दिवालिया संहिता में कहा गया है कि रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल कंपनी के लिए आमंत्रित बोली कंपनी के पुनर्गठन की कोशिश के तहत खोलेंगे। अगर कंपनी के कोई खरीदार सामने नहीं आते तो वह कंपनी के लिए समाधान योजना तैयार करेंगे और इसे लेनदारों की समिति के सामने मंजूरी के लिए रखेंगे। इसके बाद एनसीएलटी इस योजना को देखेगा।
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