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इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के लिए तकनीकी साझेदार लाएगी श्रेय

नम्रता आचार्य और ईशिता आयान दत्त / कोलकाता October 23, 2017

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी श्रेय ने इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के अधिग्रहण के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराया है, जो आरबीआई की सिफारिश के बाद दिवालिया संहिता के तहत दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही है। स्टील फर्म के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराने वालों में श्रेय के अलावा टाटा स्टील, मेस्को स्टील, एडलवाइस, अवलोकितेश्वर वलिन्व लिमिटेड और इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग शामिल हैं।

 
टाटा स्टील के प्रवक्ता ने कहा, प्रक्रिया के तहत हम बढ़त के लिए विभिन्न रणनीतिक मौकों का आकलन करते हैं। यह कंपनी के लिए जारी रहने वाली प्रक्रिया है। करीब 300-400 करोड़ रुपये का कर्ज दे चुकी श्रेय ने कंपनी के परिचालन के लिए तकनीकी सलाहकार लाने का प्रस्ताव किया है। श्रेय इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंंस के चेयरमैन हेमंत कनोडिय़ा ने कहा, हमने इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराया है। कंपनी के लेनदार के तौर पर हम सभी लेनदारों के हितों की सुरक्षा और कंपनी का परिचालन सुनिश्चित करने पर विचार कर रहे हैं। स्टील फर्म चलाने का अनुभव हमारे पास नहीं है, ऐसे में हम कंपनी के परिचालन के लिए सही वक्त पर तकनीकी साझेदार शामिल करेंगे।
 
पिछले साल श्रेय ने रणनीतिक कर्ज पुनर्गठन की व्यवस्था के तहत इलेक्ट्रोस्टील में प्रबंधन में बदलाव का विरोध किया था क्योंकि वह कंपनी के परिचालन के लिए मौजूदा प्रवर्तक के हक में थी। इलेक्ट्रस्टील पहली कंपनी थी, जहां लेनदारों ने एसडीआर की व्यवस्था का इस्तेमाल किया था। एसडीआर प्रक्रिया के दौरान दो फर्मों लंदन की फंड हाउस फस्र्ट इंटरनैशनल ग्रुप पीएलसी और टाटा स्टील कंपनी के लिए मुख्य बोलीदाता के तौर पर उभरी थी। कनोडिय़ा ने कहा, हमने पहले कहा था कि मौजूदा प्रवर्तक को हटाए जाने की कोई वजह नहीं है क्योंकि कंपनी की समस्या क्षेत्र विशेष की है। हम हमेशा से ही मौजूदा प्रवर्तक की तरफ से कंपनी के परिचालन के हक में रहे हैं। हालांकि अब परिस्थितियां बदल गई हैं और हमें सबसे अच्छे विकल्प का आकलन करना होगा। लेनदारों की समिति यह तय करेगी कि वे नया प्रवर्तक चाहते हैं या फिर मौजूदा प्रवर्तक के साथ बने रहेंगे।
 
इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स के ऊपर एसबीआई की अगुआई वाले बैंकों के कंसोर्टियम का करीब 10,274 करोड़ रुपये बकाया है। एनसीएलटी भेजे जाने वाले 12 खातों में इलेक्ट्रोस्टील शामिल है। 12 खाते की पहचान आरबीआई ने की है। कनोडिय़ा ने कहा, श्रेय व अन्य लेनदारों के बीच अंतर इतना है कि हम न सिर्फ रकम की वसूली करना चाहते हैं बल्कि कंपनी के परिचालन के लिए समाधान भी मुहैया करा रहे हैं। पहले हैदराबाद की डेक्कन क्रॉनिकल के मामले में भी श्रेय ने कंपनी का नियंत्रण लेने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके प्रवर्तकों ने भुगतान में चूक की थी।
 
श्रेय उन वित्तीय संस्थानों में से एक है जिसने एनसीएलटी के तहत कर्ज से लदी कंपनी के अधिग्रहण में रुचि प्रदर्शित की है। कई तरह की बाधा ने इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स को परेशानी में डाला है। परियोजना के क्रियान्वयन में देरी ने परियोजना की लागत 20 फीसदी बढ़ा दी है। बैंकों ने कंपनी के पास उपलब्ध कच्चे माल के लिंकेज के चलते इसे समर्थन दिया था। इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स का प्रवर्तन इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स ने किया था, जो पहले ही पर्बतपुर कोयला खदान हासिल कर चुकी है, जहां 23.1 करोड़ टन का भंडार है। 
 
इसके अलावा कंपनी के पास झारखंड में एक लौह अयस्क खदान और नॉन-कोकिंग कोयला खदान था। इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स को 20 साल तक लौह अयस्क व कोकिंग कोल इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स से लेना था। लेकिन इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स का कोयला ब्लॉक साल 2014 में दोबारा आवंटित किया गया। इस तरह से इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स को उच्च कीमत पर बाजार से कच्चा माल लेना पड़ा, वहीं तैयार उत्पाद की कीमतें काफी कम हो गई।
Keyword: electro steel, NBFC, tata,
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