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जूट के बोरों में खाद्यान्न पैकिंग होगी पांच प्रतिशत कम!

जयजित दास / भुवनेश्वर October 22, 2017

जूट उद्योग के सामने एक नई मुसीबत आ गई है। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय 2017-18 के जूट वर्ष में जूट के बोरों में खाद्यान्न पैकिंग के अनिवार्य पैकिंग आदेश में पांच प्रतिशत तक आरक्षण हटाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। जूट वर्ष की गणना 1 जुलाई से 30 जून तक की जाती है। प्रचलित पैकेजिंग नियमों के अंतर्गत 90 प्रतिशत तक के खाद्यान्न अनिवार्य रूप से जूट के बोरों में पैक किए जाने चाहिए। मंत्रालय की स्थायी सलाहकार समिति (एसएसी) ने माल भराई करने वाली एजेंसियों को उच्च घनत्व वाले पॉलिथिन (एचडीपीई) या पॉलिप्रोपीलेन (पीपी) के बोरे चुनने की अनुमति देने के लिए जूट के बोरों को पांच प्रतिशत हलका करने की सिफारिश की थी। समिति ने यह सिफारिश जूट के बोरों की कम आपूर्ति की संभावना के कारण की थी। उद्योग के एक सूत्र कहा कि अगर मंत्रालय स्थायी सलाहकार समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लेता है, तो यह जूट उद्योग को एक झटका होगा। समिति ने खाद्यान्न में हर साल पांच प्रतिशत आरक्षण समाप्त करने की वकालत करते हुए खाद्यान्न पैकिंग आदेश को चरणबद्ध ढंग से हलका करने के लिए कहा है।

 
इससे पहले कपड़ा मंत्रालय ने इंगित किया था कि पिछले दो सालों से जूट उद्योग पैकेजिंग बोरों की आवश्यक मात्रा में आपूर्ति करने में असमर्थ है। इस कमी ने सरकार को माल भराई करने वाली सरकारी एजेंसियों को एचडीपीई और पीपी बोरों के प्रयोग की छूट देने के लिए प्रेरित किया। 2017-18 जूट वर्ष के लिए पैकेजिंग मानदंडों पर अंतिम फैसला आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) द्वारा सभी भागीदारों से प्राप्त राय के वास्तविक मूल्यांकन के बाद किया जाएगा।
 
स्थायी सलाहकार समिति ने खाद्यान्न की पैकेजिंग जरूरत को चरणबद्ध ढंग से कम करने की सिफारिश की थी। इसमें 2024-25 तक आरक्षण स्तर को 50 प्रतिशत तक लाने के लिए हर साल पांच प्रतिशत तक कमी के लिए कहा गया था। पैनल का मानना ​​है कि जूट बैग की सुरक्षा से उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, जनवरी 2017 से डंपिंगरोधी शुल्क लगाने से घरेलू बाजार में जूट उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है और इस कारण जूट के बोरों के लिए उच्च आरक्षण स्तर बेमानी हो गया था।
Keyword: joot, cotton, bag,,
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