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सीमित फंड योजनाएं खुदरा निवेशकों के लिए बेहतर

जयदीप घोष और संजय कुमार सिंह /  October 20, 2017

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) पिछले 5-6 वर्षों से म्युचुअल फंड हाउसों को योजनाओं की संख्या घटाने के लिए कह रहा है। अब आखिरकार नियामक ने एक कड़ा कदम उठाते हुए सभी योजनाएं 5 श्रेणियों में बांट दी हैं। प्रत्येक श्रेणी को 36 उप-श्रेणियों में बांटा गया है। अब कोई भी फंड हाउस प्रत्येक श्रेणी में केवल एक योजना रख सकता है। इस समय 42 फंड हाउसों की 2,000 से अधिक योजनाएं हैं। इनमें से क्लोज-एंडेड श्रेणी में करीब 800 फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान हैं, जिन पर सेबी के परिपत्र का कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन फंड हाउसों को अन्य बहुत सी योजनाओं के लिए तीन महीने में कदम उठाने होंगे। 

 
यह खुदरा म्युचुअल फंड निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें एक ही फंड हाउस की समान टॉप होल्डिंग वाली 'लार्ज कैप' और 'लार्ज-कैप प्लस' में से किसी एक का चयन नहीं करना होगा। अब उन्हें पता होगा कि फंड हाउस की केवल एक लार्ज कैप स्कीम है और 'लार्ज कैप प्लस' संभवतया लार्ज और मिड कैप स्कीम है, न कि वर्तमान लार्ज कैप स्कीम की दूसरी नकल है। 
 
कोटक म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने कहा, 'म्युचुअल फंड योजनाओं के एकीकरण और विलय पर सेबी के हाल के निर्देश निवेशकों के नजरिये से स्वागत योग्य कदम हैं। 2,000 से अधिक योजनाएं होने से निवेशक भ्रमित हो जाता है। लार्ज कैप फंड जैसी आसान श्रेणी में बहुत सी श्रेणियां होने से वह भ्रमित हो जाता है। कुछ बैलेंस्ड फंड का इक्विटी में ज्यादा आवंटन होता है, जबकि कुछ कम आवंटन रखते हैं। वहीं कुछ ऐसे मिड-कैप फंड हैं, जिनमें लार्ज कैप शेयर हैं और कुछ स्मॉल कैप शेयर रखते हैं। इसके नतीजतन वह प्रदर्शन की तुलना के आधार पर निवेश के बारे में विचार करता है, लेकिन यह महसूस नहीं करता कि वह सेब और संतरे की तुलना कर रहा है। सेबी की पहल से योजनाओं की संख्या सीमित होगी और उनके प्रदर्शन की तुलना करना आसान हो जाएगा।' फंडों का प्रदर्शन भी सुधर सकता है। मोतीलाल ओसवाल ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी आशीष पी सोमैया ने कहा, 'प्रत्येक श्रेणी में केवल एक फंड की मंजूूरी होने से फंड हाउसों के अपने फंड के प्रदर्शन पर ध्यान देने की उम्मीद की जा सकती है।'
 
विलय का वक्त 
 
सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार क्लियरफंड्स डॉट कॉम के शोध के मुताबिक देश में करीब 850 ओपन एंडेड स्कीम हैं, जिनमें से करीब 50 योजनाओं का विलय हो सकता है। इसमें कई बड़ी योजनाएं भी शामिल होंगी। उदाहरण के लिए एचडीएफसी टॉप 200, एचडीएफसी इक्विटी और एचडीएफसी लार्ज कैप फंड का विलय हो सकता है, जिनकी संयुक्त रूप से संपत्ति 35,491 करोड़ रुपये हैं। हालांकि शाह संपत्ति के बारे में चिंतित नहीं हैं। शाह ने कहा, 'एक अच्छा फंड प्रबंधक फंडों का प्रबंधन करने मे सफल होगा, भले ही उसका आकार कितना भी हो। म्युचुअल फंड कुल बाजार पूंजीकरण के  6 फीसदी से भी कम और विदेशी संस्थागत निवेशकों के आकार का करीब 25 फीसदी हैं। इसमे निवेश की काफी गुंजाइश है।'
 
एक तकनीक आधारित संपत्ति सलाहकार और निवेश प्लेटफॉर्म अपवार्डली डॉट इन के सह-संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी विवेक अग्रवाल ने कहा, 'स्मॉल और मिड कैप श्रेेणियों में आकार एक दिक्कत बन सकती है।' अगले कुछ महीनों के दौरान घटित होने वाले इस घटनाक्रम को देखते हुए आपके पास ऐसे पत्र और ईमेल आ सकते हैं कि आपकी वर्तमान योजना का दूसरी, संभवतया बड़ी या बेहतर प्रदर्शन वाली योजना में विलय किया जा रहा है। 
 
सोमैया ने कहा, 'निवेशकों को इन बदलावों के बारे में पता होना चाहिए। इस विलय के बाद वे किस फंड में हैं, इसकी उन्हें जांच करनी चाहिए और यह समीक्षा करनी चाहिए कि यह उनके पोर्टफोलियो की जरूरत के अनुकूल है या नहीं है।' हालांकि यह अच्छी खबर है। पीरलैस फंड्स मैनेजमेंट कंपनी के एमडी और सीईओ राजीव शास्त्री ने कहा, 'फंडों के विलय से निवेशकों पर कोई कर देनदारी नहीं  आएगी।' यह प्रावधान 2017-18 के बजट में किया गया था। 
 
अन्य से बेहतर प्रर्दशन करना होगा ज्यादा मुश्किल 
 
सेबी के परिपत्र में यह साफ बताया गया है कि इक्विटी फंडों को किन शेयरों में निवेश करना होगा और वे इन शेयरों में कितना प्रतिशत निवेश करेंगे। उदाहरण के लिए लार्ज-कैप फंडों को बाजार पूंजीकरण के हिसाब से नंबर 1 से 100 तक के शेयरों में निवेश करना होगा और लार्ज कैप में कम से कम 80 फीसदी निवेश करना होगा। पहले बहुत से लार्ज-कैप फंड प्रबंधक प्रदर्शन सुधारने के लिए मिड-कैप शेयरों में 30 फीसदी या अधिक निवेश करते थे। 
 
प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन ने कहा, 'योजना श्रेणियों को तर्कसंगत बनाने और कुल प्रतिफल सूचकांक शुरू करने के बाद बहुत से लार्ज-कैप फंडों के लिए अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल होगा, विशेष रूप से उनकी लागत ज्यादा होने की स्थिति में। इससे इस श्रेणी में इंडेक्स फंड और एक्सचेंज टे्रडेड फंड की तरफ निवेशकों का रुझान बढ़ सकता है।' 
 
क्लियरफंड्स डॉट कॉम के संस्थापक और सीईओ कुणाल बजाज का अनुमान है कि इससे इंडेक्स फंड और ईटीएफ के ज्यादा विकल्प उपलब्ध होंगे क्योंकि विभिन्न सूचकांकों पर आधारित योजनाओं की संख्या पर कोई नियामकीय सीमा नहीं है। फोकस्ड फंडों की संपत्ति में बढ़ोतरी से उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी। ये फंड शेयरों में केवल 30 फीसदी तक निवेश कर सकते हैं। जैसे-जैसे फंड का आकार बढ़ेगा, उन्हें लार्ज-कैप फंड बनना होगा। उनके पास सभी बाजार पूंजीकरण में निवेश करने की सहूलियत नहीं होगी। 
 
हाइब्रिड और डेट श्रेणी में लक्ष्य होंगे समान 
 
हाइब्रिड फंडों में पिछले कुछ समय में भारी निवेश हुआ है। इन फंडों को कंजरवेटिव, बैलेंस्ड और एग्रेसिव श्रेणियों में बांटा गया है। अग्रवाल ने कहा, 'इससे निवेशकों को इन फंडों के इक्विटी आवंटन और जोखिम स्तर का स्पष्ट पता चलेगा।'  डाइनैमिक ऐसेट एलोकेशन और मल्टी ऐसेट एलोकेशन फंडों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करना भी सकारात्मक कदम है। इससे पहले उन्हें बैलेंस्ड श्रेणी में रखा जाता था, जहां उनके अधिकार काफी अलग हैं। ये फंड उन निवेशकों के लिए उपयोगी है, जो निवेश का आवंटन और फिर से उनके संतुलन का काम खुद करते हैं। 
 
फिक्स्ड इनकम श्रेणी में समयावधि के हिसाब से फंड श्रेणियों को विभाजित किया गयाहै, जिससे निवेशकों के लिए अपनी निवेश अवधि और जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर फंड चुनना संभव होगा। जोखिम वाली रणनीतियां (जैसे गिरती दरों के माहौल में बेहतर प्रदर्शन के लिए समयावधि बढ़ाना) इस्तेमाल करने वाले फंड प्रबंधकों के लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा। धवन कहते हैं, 'क्रेडिट रिस्क फंडों को कॉरपोरेट बॉन्ड फंडों से अलग करने पर उनमें उन निवेशकों का निवेश बंद होगा, जो क्रेडिट रिस्क फंडों के जोखिम के बारे में सजग नहीं हैं।' 10 साल की अनवरत अवधि वाली गिल्ट फंड श्रेणी बनाए जाने से निवेशक फंड प्रबंधक जोखिम से बच पाएंगे। 
 
श्रेणियां स्पष्ट होने से सभी फंड हाउस और फंड रेटिंग एजेंसियां एकसमान श्रेणी इस्तेमाल करेंगी और उन श्रेणियों में एकसमान फंड रखेंगी। टाटा ऐसेट मैनेजमेंट के प्रमुख (उत्पाद विकास) प्रशांत जोशी ने कहा, 'इससे पीर या तुलना में समानता होगी। हालांकि फंड हाउस ज्यादा क्लोज एंडेड फंड शुरू कर सकते हैं, जो इस परिपत्र के दायरे से बाहर हैं। इन फंडों में जोखिम यह होता है कि निवेशक का इस पर कोई नियंत्रण नहीं होता है कि जब फंड की अवधि समाप्त  हो रही है तो बाजार कैसा प्रदर्शन कर रहा है। इसलिए लंबे समय तक निवेश के बावजूद उन्हें मामूली प्रतिफल से संतोष करना पड़ सकता है। 
Keyword: sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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