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दिल्ली मेट्रो किराया वृद्घि के विवाद से उठते चंद सवाल

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  October 18, 2017

 

कुछ दिन पूर्व दिल्ली मेट्रो रेल के किराये में हुए भारी इजाफे के बाद उपजे विवाद के दौरान एक बात की अनदेखी कर दी गई। वह यह कि इस पूरी प्रक्रिया में सहकारी संघवाद के सिद्घांत का खुलकर उल्लंघन किया गया। यहां तक कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के मंत्री भी किराये में दो चरणों में किए गए 25 से 100 फीसदी तक के इजाफे को लेकर सार्वजनिक रूप से विवाद में पड़ गए। हालांकि इससे कुल मिलाकर यही साबित हुआ कि दोनों का लक्ष्य राजनीतिक बढ़त हासिल करना भर है। इन दोनों में से किसी ने मुख्य मुद्दे को समझने या उसका हल सुझाने का प्रयास नहीं किया। दिल्ली मेट्रो से दिल्ली और राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हर रोज 30 लाख लोग सफर करते हैं।
 
इस प्रश्न का उत्तर किसी के पास नहीं है कि आखिर किराये में इस बढ़ोतरी के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए क्योंकि दिल्ली मेट्रो में केंद्र और दिल्ली सरकार की आधी-आधी हिस्सेदारी है। इससे पहले वर्ष 2009 में किराये में 33 से 36 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी। दिल्ली मेट्रो के 2002 में अपनी सेवा शुरू करने के बाद किराया बढ़ोतरी का वह तीसरा मौका था। इससे पिछली बढ़ोतरी 2006 में किराये में 14 से 46 फीसदी बढ़ोतरी की गई थी जबकि 2004 में किराया 7 से 20 फीसदी बढ़ाया गया था। सवाल यह भी है कि चौथी बढ़ोतरी से पहले आठ साल इंतजार क्यों किया गया?
 
दिल्ली मेट्रो प्रबंधन कई वर्ष से किराया बढ़ाने की मांग कर रहा था। दिल्ली मेट्रो के एक अधिकारी ने वर्ष 2015 में कहा था कि इससे पहले के वर्षों में कम से कम तीन बार किराया तय करने संबंधी समिति बनाने का अनुरोध किया गया था परंतु ऐसा नहीं किया गया। मई 2016 में इस समिति की स्थापना की गई। कानून कहता है कि समिति को तीन महीनों में अपनी अनुशंसा करनी होगी। परंतु इस समिति को तीन महीने का अवधि विस्तार दिया गया। इसके बाद दिल्ली मेट्रो प्रबंधन ने मई 2017 में पहले चरण में किराया बढ़ाया जबकि 10 अक्टूबर 2017 को दूसरे चरण में किराया बढ़ाया गया।
 
चौथे दौर की किराया बढ़ोतरी में हर स्तर पर देरी हुई। केंद्र, समिति और दिल्ली मेट्रो प्रबंधन तीनों स्तरों पर। अगर मौजूदा किराया निर्धारण समिति का गठन 2011 में किया जाना चाहिए था तो इस मोर्चे पर तीन साल तक कोई कदम न उठाने का दोष मनमोहन सिंह की पिछली सरकार पर आता। मोदी सरकार भी दो वर्ष तक इस पर अनिर्णय की शिकार रही। बाद में समिति गठित हुई और उसने भी रिपोर्ट देने में निर्धारित से अधिक समय लिया। दिल्ली मेट्रो प्रबंधन ने भी प्रवर्तन में वक्त लिया। 
 
इन सबसे बढ़कर दिल्ली सरकार ने देरी से किराया बढ़ाने के विचार का विरोध किया था। केंद्र सरकार ने मांग की थी कि अगर दिल्ली सरकार किराया बढ़ोतरी टालना चाहती है तो उसे अगले पांच साल तक 3,000 करोड़ रुपये सालाना देना होगा। दिल्ली सरकार ने कहा कि वह इसका आधा पैसा दे सकती है लेकिन बदले में उसे दिल्ली मेट्रो का प्रबंधन संभालने का मौका भी चाहिए। 
 
समस्या की प्रकृति को समझने के लिए दोनों के बीच कोई संवाद नहीं हुआ और न ही इसे हल करने की दिशा में कोई पहल हुई। जबकि सहकारी संघवाद में सरकार से इतनी उम्मीद तो की ही जा सकती थी। अब किराये में बढ़ोतरी की जा चुकी है और कोई तात्कालिक संकट उत्पन्न नहीं है। कुछ विरोध प्रदर्शन अवश्य हुआ है और मेट्रो की सवारी करने वालों की तादाद कुछ कम हुई है। परंतु आगे ऐसा संकट उत्पन्न न हो, इसके लिए क्या किया जाना चाहिए?
 
पहली बात, उस कानून में संशोधन किया जाए जो किराया निर्धारण समिति का गठन करने का अधिकार केवल केंद्र को देता है। संशोधित कानून में व्यवस्था हो कि हर दो साल पर किराये की समीक्षा होगी और इस समिति की अनुशंसा दिल्ली मेट्रो प्रबंधन पर बाध्यकारी होगी। इसे केंद्र पर छोडऩे का क्या तुक है? दूसरी बात, किराये में बढ़ोतरी पर करीबी नजर डालकर किराया बढ़ोतरी के विकल्प तलाश किए जा सकते हैं। बीते 15 सालों के संचालन में दिल्ली मेट्रो का न्यूनतम और अधिकतम किराया क्रमश 5 और 10 रुपये से बढ़कर 14 और 60 रुपये हुआ है। न्यूनतम किराये में बढ़ोतरी इस अवधि की औसत मुद्रास्फीति से भी कम रही है। जबकि उच्चतम वृद्घि खुदरा महंगाई से थोड़ा ज्यादा रही। दिल्ली मेट्रो की लागत भी इस अवधि में बढ़ी है और यह घाटे में चलने वाला उपक्रम बन गई। 
 
अगर किराये में बढ़ोतरी का मन नहीं है तो इस निर्णय को टालने के बजाय केंद्र और दिल्ली सरकार को दिल्ली मेट्रो को सब्सिडी देनी चाहिए ताकि दिल्ली मेट्रो अपनी लागत निकाल सके, सेवा की गुणवत्ता बरकरार रख सके और अपनी विस्तार योजना को क्रियान्वित कर सके। एक बेहतर तरीका यह है कि पहली किराया निर्धारण समिति की सलाह पर अमल किया जाए और हर दो साल में किराये में पांच फीसदी का संशोधन किया जाए। 
Keyword: DMRC, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन डीएमआरसी,
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