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'जीएसटी: अधिक उत्पाद जोडऩे से पहले राजस्व पर विचार करेंगे राज्य'

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना /  October 17, 2017

राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने सितंबर में मजबूत जीएसटी संग्रहण के अनुमानों को घटाया है। कंपोजिशन योजना (जो छोटे और मझोले व्यवसायियों को समान दर को अपनाने और आसान अनुपालन की अनुमति देती है) के तहत आने वाली इकाइयों द्वारा त्रैमासिक रिटर्न की वजह से सितंबर में जीएसटी संग्रहण में कमी दर्ज की जा सकती है। उन्होंने दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना को एक साक्षात्कार में बताया कि पहले दो महीनों - जुलाई और अगस्त में इंटिग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) से अच्छा संग्रहण दर्ज किया गया, जिसका सितंबर में क्रेडिट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए इस मद के तहत राजस्व में सितंबर में कमी आ सकती है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
पेट्रोलियम मंत्रालय जीएसटी के तहत तेल पर दांव लगा रहा है। क्या जल्द ही इस मामले पर जीएसटी परिषद द्वारा चर्चा की जा सकती है?
 
पेट्रोलियम बड़ा एजेंडा है। हम जीएसटी के तहत पहले से ही शामिल उत्पादों से आय के रुझान के बारे में आंकड़ा तैयार करेंगे। ऐसा लगता है कि राज्य मौजूदा समय में जीएसटी के तहत और ज्यादा उत्पाद शामिल करने से पहले मौजूदा राजस्व का अध्ययन कर सकते हैं। 
 
जीएसटी ने पहले दो महीनों में 90-90 हजार करोड़ रुपये आकर्षित किए। क्या कम्पोजीशन डीलरों की त्रैमासिक फाइलिंग की वजह से सितंबर में अधिक राजस्व प्रवाह देखा जा सकता है?
 
पहले दो महीनों में मुख्य आय आईजीएसटी के स्वरूप में हासिल हुई। शुरू में आपको आईजीएसटी चुकाना होगा, जिसका इस्तेमाल लेनदेन के लिए क्रेडिट के तौर पर किया जाएगा। इसलिए अब आईजीएसटी की रफ्तार में सुस्ती देखी जा सकती है। इससे जुड़े आंकड़े भी नीचे आ सकते हैं। शुरू में गोदाम स्थानांतरण पर कोई कर नहीं था, लेकिन अब यदि आप अपने स्वयं के गोदाम से सामान को किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करते हैं तो आपको आईजीएसटी चुकाने की जरूरत होगी। इसी तरह आयात के मामले में आईजीएसटी चुकाया जाता था, लेकिन अब हमने कहा है कि इसे मुक्त रखा जाएगा। आयात में ही जुलाई में लगभग 21,000 करोड़ रुपये और अगस्त में 23,000 करोड़ रुपये आईजीएसटी में आए। आईजीएसटी एक अंतरिम क्रेडिट है और इसका आवंटन केंद्र और राज्यों को नहीं किया जा सकेगा और यह इस पर निर्भर करेगा कि खपत कहां होगी। लोग नया आईजीएसटी नहीं चुकाएंगे, लेकिन क्रेडिट का इस्तेमाल करेंगे। इसलिए आंकड़े नीचे आ सकते हैं।
 
पहले दो महीनों में राज्यों के लिए मुआवजा जरूरत उपकर संग्रहण के मुकाबले काफी कम रही। राज्यों को 8,000 करोड़ रुपये वितरित किए गए जबकि सेस (उपकर) के तहत राज्यों के लिए यह संग्रहण लगभग 15,000 करोड़ रुपये था। क्या यह भविष्य में राजस्व के लिए खराब संकेत नहीं है?
 
यह बता पाना काफी मुश्किल है क्योंकि जुलाई एक सामान्य महीना नहीं था। हमने जुलाई के लिए राज्यों की मूल्यवर्धित कर (वैट) आय और अगस्त के लिए जीएसटी आय पर विचार किया है। वैट आय काफी अधिक थी। काफी बिक्री जून में हुई, और राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई में वैट की अपनी आय हासिल हुई। वह आय अगस्त की आय के मुकाबले काफी अधिक थी और यही वजह है कि संयुक्त रूप से  8,000 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि दो महीनों के लिए जरूरी थी। अन्यथा, सामान्य स्थिति में मासिक मुआवजा जरूरत और ज्यादा होगी। 
 
क्या आप राज्यों के राजस्व और मुआवजे की जरूरतों के बारे में कुछ बता सकते हैं? क्या सभी राज्यों को मुआवजे की जरूरत है? किस राज्य को सबसे ज्यादा मुआवजा जरूरी है?
 
एक को छोड़कर, सभी राज्यों को मुआवजा मिला है। मौजूदा समय में केंद्र और राज्यों के लिए राजस्व के रुझान का आकलन करना कठिन होगा, क्योंकि यह बदलाव वाली अवधि है। इसके अलावा, अनुपालन दर भी श्रेष्ठï के मुकाबले कम है। शुरू में स्व-आकलन होता है। इसलिए जब हम जीएसटीआर 1, 2 और 3 की तुलना शुरू करेंगे तो हम गायब दस्तावेजों की संख्या का पता लगाएंगे। जीएसटी का लाभ तभी मिलना शुरू होगा जब इससे जुड़ी खामियों को गंभीरता के साथ दूर किया जाए। फिलहाल, लोग जो भी घोषित कर रहे हैं और करों के रूप में फाइलिंग कर रहे हैं, हम उसे स्वीकार कर रहे हैं। इसे लेकर कोई रुझान नहीं है। लेकिन जीएसटी के सही ढंग से मजबूत हो जाने के बाद हमें स्पष्टï रुझान हासिल करना होगा।
 
अगस्त के लिए औद्योगिक उत्पादन वृद्घि का सूचकांक 4.2 फीसदी की 9 महीने की ऊंचाई पर पहुंचा। क्या इससे यह संकेत मिलता है कि जीएसटी से औद्योगिक गतिविधियां या अर्थव्यवस्था ज्यादा प्रभावित नहीं हुई हैं?
 
जीएसटी से आर्थिक धारणा क्यों प्रभावित होगी? शुरू से ही यह उम्मीद बनी हुई है कि जीएसटी से आर्थिक वृद्घि में 2 प्रतिशत अंक तक का सुधार आएगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि हम अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को मजबूत बना रहे हैं और करों के बड़े झंझट को कम कर रहे हैं। सामान्य धारणा यह देखी जा रही है कि जीएसटी की वजह से बदलाव से जुड़ी समस्याएं दूर होने के बाद इस नई कर व्यवस्था से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। बदलाव से जुड़ी यह समस्या किसी भी नई प्रणाली में देखी जा सकती हैं। आखिरकार आर्थिक वृद्घि में सुधार आएगा।
 
अनुपालन दर कम है और सिर्फ लगभग 70 प्रतिशत इकाइयां जीएसटीआर 1 फाइल कर रही हैं। लोग रिटर्न फाइल क्यों नहीं कर रहे हैं?
 
मौजूदा समय में अनुपालन दर कम है। इसकी वजह रिटर्न फाइल के बारे में जागरूकता और समझ का अभाव होना है। हमें इस बारे में जानकारी लोगों तक पहुंचानी होगी। इसलिए राज्य और केंद्रीय अधिकारियों को प्रत्येक डीलर तक पहुंचने के लिए काफी कार्य करने की जरूरत होगी। हमने यह काम शुरू कर दिया है। शुरू में इसमें कुछ दिक्कतें आएंगी। लेकिन जब एक बार लोग नई व्यवस्था के इस्तेमाल से अवगत हो जाएंगे तो अनुपालन दर में सुधार आएगाा।
 
क्या आप अनुपालन संबंधित सर्वे भी करा रहे हैं?
 
हां। हम यह समझने के लिए सर्वे करा रहे हैं कि लोग रिटर्न फाइल क्यों नहीं कर रहे हैं और उन्हें इसमें किस तरह की समस्या आ रही है? सर्वे का परिणाम दीवाली के बाद हमारे इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगा।
 
क्या आप उद्योग के साथ प्रत्यक्ष रूप से बातचीत कर रहे हैं?
 
जीएसटी से संबंधित चिंताओं और समस्याओं को समझने के लिए पूरे देश में अब तक 50 कार्यशालाएं आयोजित की गई हैं। हम इसके बारे में अब विज्ञापन भी जारी कराएंगे। 
 
क्या जीएसटी में बार बार और ज्यादा बदलाव नहीं किया जा रहा है? क्या कम अनुपालन दर को ध्यान में रखकर ऐसा किया जा रहा है?
 
जो सभी बदलाव किए गए हैं, वे लोगों के फायदे के लिए हैं। इसका कोई अन्य विकल्प नहीं है। एक रास्ता 12 महीने के लिए दरों और नियमों को स्थिर रखना और उसके बाद इनमें बदलाव करना हो सकता है। लेकिन वह भी काफी विलंब होगा। श्रेष्ठï उपाय है सही समय पर बदलाव करना, जो हम कर रहे हैं। हम करदाताओं के समक्ष पैदा होने वाली समस्याओं को समय के आधार पर दूर कर रहे हैं। इसके अलावा, अब दरों में बदलाव खास नहीं होगा, लेकिन यह दृष्टिïकोण पत्र और फिटमेंट कमेटी की रिपोर्ट पर आधारित होगा।
 
क्या आपको मुनाफाखोरी की शिकायतें मिली हैं?
 
अब तक ज्यादा शिकायतें नहीं आई हैं। यही स्थिति राज्यों की जांच समितियों को मिलने वाली शिकायतों को लेकर है। मुद्रास्फीति का आंकड़ा भी यह संकेत दे रहा है कि कीमत वृद्घि बहुत ज्यादा नहीं है। जिस बात पर नजर रखे जाने की जरूरत है, वह यह है कि क्या इसका लाभ उपभोक्ता को मिल पाएगा या नहीं। रेस्तरांओं के मामले में कुछ शिकायतें मिली हैं। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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