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बाजार में बहार के बाद भी पिछड़ रहे हैं सरकारी बैंकों के शेयर

पवन बुरुगुला / मुंबई October 16, 2017

बेंचमार्क निफ्टी सितंबर के अपने पूरे नुकसान की भरपाई कर चुका है और यह शुक्रवार को रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। बाजार की हालिया वापसी की अगुआई निजी क्षेत्र के बैंकों ने की है। लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पिछड़ रहे हैं और कुछ में पिछले महीने की गिरावट और बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से दूरी इसलिए बना रहे हैं क्योंकि उनकी आस्ति गुणवत्ता कमजोर है और पूंजी के अभाव के कारण उनमें वृद्धि की संभावनाएं भी कम हैं। फंसे कर्ज के लिए ज्यादा प्रावधान और ऋण की कम वृद्धि के कारण पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आमदनी ने भी निराश किया है। हाल की तेजी में भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पिछड़ रहे हैं, जिससे यह पता चलता है कि सितंबर तिमाही से भी कम ही उम्मीदें हैं। 

 
भारतीय स्टेट बैंक के शेयर सितंबर से 9 फीसदी गिर चुके हैं और ये इस साल 13 अक्टूबर तक की अवधि के आधार पर महज 1 फीसदी ऊपर हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा सितंबर से सपाट स्तर पर है और यह इस साल अब तक 9 फीसदी लुढ़क चुका है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में आईडीबीआई का सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। यह सितंबर से 4 फीसदी लुढ़क चुका है और इसकी कीमत 2017 में करीब एक चौथाई टूट चुकी है। 
 
दूसरी ओर ज्यादातर निजी क्षेत्र के बैंकों ने सितंबर से और इस साल अब तक के आधार पर निफ्टी सूचकांक से बेहतर प्रर्दशन किया है। कोटक महिंद्रा बैंक 1 सितंबर से करीब 9 फीसदी चढ़ चुका है, जबकि एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और येस बैंक प्रत्येक 4 फीसदी से अधिक चढ़ चुके हैं। एक विश्लेषक ने कहा, 'वर्तमान माहौल में साफ तौर पर निजी बैंकों को सार्वजनिक बैंकों पर बढ़त हासिल है। ये बैंक मुख्य रूप से खुदरा ऋण देते हैं और खस्ताहाल क्षेत्रों में इनके फंसे ऋण तुलनात्मक रूप से कम हैं। इसलिए उनकी आस्ति गुणवत्ता बेहतर नजर आ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तकलीफ जल्द खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर ज्यादा फंसे हुए कर्ज और ऋण में सुस्ती का दबाव बना रहेगा।'
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