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नई शुरुआत

संपादकीय /  October 15, 2017

सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनी जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (जीआईसी आरई) ने सफल प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) पेश कर वित्तीय क्षेत्र में एक नए चरण की शुरुआत की है। कंपनी के आईपीओ ने 11,300 करोड़ रुपये के लक्ष्य से काफी अधिक राशि जुटाई। यह पहली सरकारी बीमा कंपनी है जिसने आईपीओ पेश किया है जबकि कुल मिलाकर यह ऐसा करने वाली चौथी बीमा कंपनी है। कुछ अन्य बीमा कंपनियों के आईपीओ आने वाले हैं। जब तक यह वित्त वर्ष समाप्त होगा, तब तक शेयर सूचकांकों पर बीमा कंपनियों का बेहतर प्रतिनिधित्व हो चुका होगा। यह बात कई वजहों से स्वागतयोग्य है। ये पुरानी कंपनियां हैं और इनका रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा है। ऐसे में निवेशक लंबी अवधि की संभावनाओं को लेकर निश्चिंत हो सकते हैं। इसके साथ ही साथ एक सूचीबद्घ कंपनी कहीं अधिक जवाबदेह और पारदर्शी होती है। इससे किफायत, सेवा गुणवत्ता में सुधार और नियामकीय अनुपालन देखने को मिलता है। 

 
देश के बीमा क्षेत्र में विकास की अत्यधिक संभावनाएं हैं। दुनिया के समूचे प्रीमियम में हमारी हिस्सेदारी 1.5 फीसदी है जबकि जीवन बीमा प्रीमियम में इसकी हिस्सेदारी करीब 2 फीसदी है। माना जा रहा है कि अगले एक दशक में यह क्षेत्र चार गुना की तरक्की करेगा और वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक 60 अरब डॉलर से बढ़कर यह कारोबार 240 अरब डॉलर का हो जाएगा। बीमा कंपनियों की सूचीबद्घता बढऩे के साथ ही निवेशकों को भी मौका होगा कि वे इनकी वृद्घि में योगदान करें। ज्यादा धन और लंबी अवधि के लिए सस्ती पूंजी की उपलब्धता वाली बीमा कंपनियां दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिहाज से अहम हैं। वे एक दशक या उससे अधिक अवधि के लिए ऋण दे सकती हैं। इससे बैंकिंग क्षेत्र पर पड़ रहा दबाव कम होगा और बुनियादी ढांचागत क्षेत्र का ऋण बढ़ेगा। बीमा कंपनियां पूंजी बाजार में पहुंच के लिए काफी समय से प्रयासरत रहीं लेकिन अगस्त 2016 में बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) ने पूंजी जुटाने के मानक तय किए और कम से कम 10 साल से कारोबार कर रही बीमा कंपनियों को इजाजत दी कि वे प्राथमिक बाजार का लाभ लें। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस  ने सितंबर 2016 में पहला आईपीओ पेश किया।
 
इसके बाद आईसीआईसीआई लोंबार्ड और एसबीआई लाइफ और अब जीआईसी आरई बाजार में आए। इनमें से प्रत्येक कंपनी ने काफी पूंजी जुटाई। कैबिनेट ने चार अन्य सरकारी बीमा कंपनियों को प्राथमिक बाजार में जाने की इजाजत दे दी है। सरकार इनमें से प्रत्येक कंपनी में चरणबद्घ तरीके से 25 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इससे विनिवेश लक्ष्य की दिशा में भी आगे बढ़ा जा सकेगा। कई निजी बीमा कंपनियां भी निर्गम पेश करने के प्रयास में हैं। कुछ ने सेबी के पास दस्तावेज जमा कर रखे हैं जबकि कुछ अन्य ने बोर्ड स्तर पर इस संबंध में निर्णय कर लिया है। शेयर बाजार में उछाल आई है, यानी बीमा कंपनियां आसानी से 35,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटा सकती हैं। बहरहाल, जैसे-जैसे इस क्षेत्र का विकास होगा कम सरकारी हस्तक्षेप के साथ नियामकीय निगरानी की आवश्यकता भी बढ़ती जाएगी। बीमा से जुड़ी धोखाधड़ी के मामले में देश का रिकॉर्ड कोई अच्छा नहीं है। बुनियादी परियोजनाओं में देरी होने की प्रवृत्ति है और बीमा कंपनियों को भी इनमें निवेश करने से पहले काफी सावधानी बरतनी होगी। उन्हें ध्यानपूर्वक निवेश करना होगा। सरकार में जीवन बीमा, फसल बीमा आदि को लेकर खराब डिजाइन वाली योजनाएं शुरू करने की भी प्रवृत्ति है। इनका पूरा बोझ सरकारी कंपनियों को वहन करना होता है। ऐसे में इन कंपनियों को अपना कारोबार बिना किसी हस्तक्षेप के वाणिज्यिक आधार पर चलाने की इजाजत होनी चािहए। इस बीच स्वतंत्र नियामक की यह जिम्मेदारी है कि वह सबकी ईमानदारी का ध्यान रखे।
Keyword: insurance, बीमा पॉलिसी जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया,
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