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त्योहार पर उपहार कर का कितना प्रहार?

तिनेश भसीन /  October 15, 2017

अगर आपके नियोक्ता भी सूरत के  सावजी ढोलकिया की तरह दरियादिल हैं, जो दीवाली के मौके पर अपने कर्मचारियों को फ्लैट या कार बतौर तोहफा देते हैं तो खबरदार हो जाइए क्योंकि अगले साल आयकर रिटर्न दाखिल करते समय आपको उपहार के एवज में कर चुकाना पड़ सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो नियोक्ता का बड़ा दिल कर्मचारियों की जेब से कर निकलवा सकता है क्योंकि कर्मचारियों को नियोक्ता से मिले 5,000 रुपये से अधिक मूल्य के उपहार पर कर देना पड़ता है। 

 
एचऐंडआर ब्लॉक इंडिया में प्रमुख (कर अनुसंधान) चेतन चंडक कहते हैं, 'ऐसे उपहार दूसरे स्रोतों से होने वाली आय में जोड़ दिए जाते हैं। कर की जो भी दर होती है, उसके हिसाब से नियोक्ता कर काट लेता है और आयकर विभाग के पास जमा कर देता है। अगर मकान की कीमत 50 लाख रुपये से अधिक है तो जिस व्यक्ति को यह उपहारा मिला होता है, उसे कर के रूप में 15 लाख रुपये चुकाने पड़ेंगे।' लेकिन अगर किसी वेतनभोगी व्यक्ति को किसी ठेकेदार या ग्राहक या अपने कामकाज से जुड़े किसी व्यक्ति से मोबाइल फोन, टैबलेट या कोई ऐसा उपकरण मिलता है, जो आजकल उपहार के रूप में खूब पसंद किया जा रहा है तो उसे कर नहीं चुकाना पड़ेगा। आयकर विभाग ने कुछ उपहारों की सूची बनाई है। यदि निकट संबंधी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति वे उपहार देता है तो पाने वाले को कर चुकाना पड़ेगा। इन उपहारों में अचल संपत्ति, शेयर एवं प्रतिभूति, जेवरात, पुरातात्विक वस्तुएं, चित्र, पेंटिंग, मूर्तियां या दूसरी कलाकृतियां शामिल हैं।
 
जो लोग किसी कारोबार से जुड़े हैं या कोई पेशा करते हैं, उन्हें मिले उपहारों पर कर वसूलने का तरीका अलग है। टैक्समैन डॉट कॉम के महा प्रबंधक नवीन वाधवा कहते हैं, 'ऐसे लोगों को जो भी उपहार मिलता है, उसे कारोबारी आय में ही शुमार किया जाता है।' इस मामले में उपहारों को पेशे से जुड़ी प्राप्ति माना जाता है या उनके द्वारा दी गई सेवाओं के लिए चुकाई रकम से इतर भुगतान मान लिया जाता ह। उपहार का मूल्य कुल आय में जोड़ दिया जाता है और आयकर स्लैब के मुताबिक कर काट लिया जाता है।
 
आयकर अधिनियम की धारा 28 बताती है कि कारोबारी आय के रूप में किस पर कर वसूला जा सकता है। धारा 28 के अनुसार 'कारोबार अथवा पेशे के अंतर्गत सेवाएं प्रदान करने के कारण मिलने वाले किसी भी लाभ अथवा उपहार, चाहे उसे धन में बदला जा सके अथवा नहीं, की कीमत को भी' आय में शामिल किया जाता है। ऐसे उपहारा प्राप्त करने वाले व्यक्ति को यह पता करना पड़ेगा कि बाजार में उसका मूल्य क्या है और उसके बाद कर विभाग के सामने उपहारों की घोषण करनी होगी।
 
अगर उपहार देने वाला मित्र है और अपने व्यक्तिगत संबंधों के कारण किसी को उपहार देता है तो कर के नियम एक बार फिर बदल जाते हैं। वयक्तिगत संबंधों अथवा दूर के रिश्तेदारों से मिले 50,000 रुपये तक के उपहार कर से पूरी तरह मुक्त होते हैं। आयकर अधिनियक में 10 उपहारों का जिक्र है, जिन्हें यदि व्यक्तिगत रूप से किसी को दिया गया है तो उनकी घोषणा करनी पड़ेगी और प्राप्त करने वाले व्यक्ति को कर भी चुकाना पड़ेगा। इनमें नकदी, सराफा, जेवरात, शेयर, वित्तीय प्रतिभूतियां, चित्र, पेंटिंग तथा अचल संपत्तियां शामिल हैं। इनकी घोषणा 'दूसरे स्रोतों से प्राप्त आय' के तहत करनी होगी और उसी के अनुसार उन पर कर भी चुकाना पड़ेगा।
 
अगर आपको निकट संबंधियों से उपहार मिलते हैं तो आपको उन पर किसी तरह का कर नहीं चुकाना पड़ेगा चाहे उनकी कीमत कितनी भी क्यों न हो। निकट संबंधियों में माता-पिता, भाई-बहन, पति/पत्नी और बच्चे शामिल हैं। इसमें पति या पत्नी के माता-पिता भी शामिल किए गए हैं। भाई की पत्नी या बहन के पति आदि से मिले उपहर भी कर मुक्त होते हैं। इसी तरह यदि किसी व्यक्ति को माता-पिता के भाई-बहन यानी चाचा, बुआ, मामा, मौसी आदि से उपहार मिलते हैं तो उन पर भी कर नहीं चुकाना पड़ेगा। लेकिन वाधवा कहते हैं, 'निकट संबंधी की परिभाषा के मामले में सतर्कता बरतना ही बेहतर रहेगा क्योंकि इस मामले में अक्सर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। मसलन चाचा से भतीजे को मिले उपहार पर किसी तरह का कर नहीं लगता है, लेकिन यदि भतीजा अपने चाचा को उपहार देता है तो उस पर कर लग सकता है।'
Keyword: festive, gift, tax,,
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