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मप्र की भावांतर योजना का बजट बढ़ा

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली October 13, 2017

मध्य प्रदेश सरकार की 'भावांतर योजना' में गुरुवार तक 9 लाख से कुछ अधिक किसान पंजीकृत हुए हैं। लेकिन राज्य के अधिकारियों को भरोसा है कि इस कार्यक्रम के लिए 15 अक्टूबर को पंजीकरण बंद होने तक राज्य के 50 लाख तिलहन एवं दलहन किसानों में से 40 फीसदी (20 लाख) का पंजीकरण हो जाएगा। इतने कम लक्ष्य को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की जा रही है क्योंकि राज्य में करीब 50 लाख किसान तिलहन, दलहन और मक्के की खेती करते हैं। मध्य प्रदेश ने शुरुआती कीमत आकलनों के आधार पर इस कार्यक्रम के लिए 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये का बजट रखा था, लेकिन अक्टूबर से खरीफ दलहन और मक्के की कीमतों में 25 से 30 फीसदी कमी से उसके आकलन गड़बड़ा गए हैं। 
 
अब राज्य सरकार ने इस कार्यक्रम पर कम से कम 4,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। यह आंकड़ा इस मोटे आकलन पर आधारित है कि कार्यक्रम के तहत पंजीकृत होने वाले सभी 20 लाख किसानों के बैंक खातों में कम से कम 1,000 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसे भेज जाएंगे। कृषि विभाग के मुख्य सचिव राजेश अरोड़ा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'अभी आकलन अक्टूबर की कीमतों पर आधारित हैं, लेकिन कीमतें और गिरीं तो कुल वित्तीय खर्च और बढ़ सकता है।' मध्य प्रदेश ने इस योजना की लागत का बोझ साझा करने के लिए केंद्र से संपर्क किया है, जिसने आधे खर्च का बोझ उठाने पर सहमति जताई है। उन्होंने बताया कि प्रायोगिक परियोजना को किसानों का अच्छा समर्थन मिला है। यह स्थिति तब है जब राज्य के ज्यादातर छोटे और मझोले किसानों के पास मंडी में बेचने लायक ज्यादा उपज नहीं है। इस योजना के लिए पंजीकरण 11 अक्टूबर को बंद होने  थे, लेकिन इसकी अïवधि कुछ दिन इसलिए बढ़ा दी गई क्योंकि लोगों तक योजना की जानकारी पहुंचने में समय लगा। इसके चलते राज्य के अधिकारियों को व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाना पड़ा।
  
राज्य की 30,000 ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाएं हुईं, जहां योजना के लिए किसानों का फिजिकल पंजीकरण किया गया। एक गैर-राजनीतिक किसान संगठन आम किसान यूनियन के संस्थापक सदस्य केदार सिरोही ने कहा, 'अब तक योजना के लिए हुए कम पंजीकरण खुद ही बयां करते हैं कि योजना को लेकर किसानों की प्रतिक्रिया कितनी कमजोर है। इसकी वजह यह है कि योजना में कई दिक्कतें हैं।' इस साल जून में राज्य में हुए किसान आंदोलन की सिरोही ने अगुआई की थी। इस आंदोलन में मंदसौर में 6 किसानों की मौत हुई थी। योजना को कमजोर प्रतिक्रिया के आरोपों का बचाव करते हुए राज्य के अधिकारी कहते हैं कि राज्य ने जिन 20 लाख किसानों के पंजीकरण की योजना बनाई है, उनमें से करीब 12 लाख का पंजीकरण ऑनलाइन जबकि शेष का फिजिकल नामांकन किया जाएगा। अरोड़ा ने कहा, 'मध्य प्रदेश में करीब 75 लाख किसान हैं, जो खरीफ सीजन में खेती करते हैं। इनमें से  धान किसानों को योजना से बाहर रखा गया है। करीब 50 लाख किसानों में से आधे (करीब 25 लाख) सोयाबीन की खेती करते हैं, जबकि शेष मूं्ग, उड़द, कपास एवं अन्य तिलहन और दलहन उगाते हैं और ये योजना के तहत पंजीकरण कराने के पात्र हैं।'
Keyword: agri, farmer, pulses, madhya pradesh,,
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