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गलत दांव में फंस गया टाटा समूह

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली October 12, 2017

दूरसंचार क्षेत्र में टाटा समूह की कोशिश गलत कदमों, प्रौद्योगिकी संबंधी गलत विकल्पों और दांव में फंस गई जो केवल प्रतिगामी साबित हुई। टाटा समूह ने एक साथ दो प्रौद्योगिकी- जीएसएम और सीडीएमए- के साथ दूरसंचार क्षेत्र में कदम रखा। क्वालकॉम द्वारा आगे बढ़ाई गई सीडीएमए प्रौद्योगिकी के तहत स्पेक्ट्रम की पर्याप्त उपयोगिता के साथ-साथ हाई स्पीड डेटा में भी संभावनाएं तलाशी जा रही थी।
 
विश्लेषकों का कहना है कि 2006 में टाटा समूह जीएसएम प्रौद्योगिकी से बाहर होने का गलत निर्णय नहीं लेता तो उसके लिए आज सबकुछ ठीक रहता। शुरू में टाटा समूह ने आदित्य बिड़ला समूह और एटीऐंडटी के साथ संयुक्त उद्यम बनाया था जो बाटाटा के रूप में जाना जाता था। हालांकि सबसे पहले एटीऐंडटी ने 2005 में इस सौदे से बाहर होने का निर्णय लिया और वह अपनी 30 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती थी। लेकिन शेष दो साझेदारों के बीच जल्द ही जंग छिड़ गई और इसका कारण यह भी था कि टाटा समूह की एक अन्य दूरसंचार कंपनी टीटीएसएल थी जिसकी संयुक्त उद्यम (जिसे अब आइडिया सेल्युलर कहा जाता है) में 10 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी थी। हालांकि नियमों के तहत इसकी अनुमति नहीं थी। नियमों में कहा गया था कि कोई दूरसंचार कंपनी किसी अन्य प्रतिस्पर्धी मोबाइल कारोबार में 10 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी नहीं ले सकती।
 
बिड़ला ने इस मामले में सरकार से दखल देने की मांग की ताकि आइडिया से टाटा को बाहर किया जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि टाटा इस कंपनी को विकास नहीं करने देना चाहती है। हालांकि संयुक्त उद्यम में अपनी 48.12 फीसदी हिस्सेदारी अपने बहिष्कृत साझेदार को बेचने के अलावा टाटा के पास बाहर कोई अन्य विकल मौजूद नहीं था। लेकिन शेयरधारक अनुबंध के उल्लंघन को लेकर बिड़ला के साथ उनकी कानूनी जंग छिड़ गई।
 
कई लोगों का कहना है कि टाटा समूह अपने साझेदारों के साथ संबंधों बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकता था और जीएसएम क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए दबाव डाल सकते थे। वे अपने सीडीएमए कारोबार को समेटने पर भी विचार कर सकते थे। आइडिया सेल्युलर के हिस्से के तहत वे देश की सबसे बड़ी जीएसएम कंपनी बन सकते थे। लेकिन समस्या यह थी कि शीर्ष प्रबंधन ने भविष्य के लिए सीडीएमए प्रौद्योगिकी पर अपना दांव लगाया जो उनकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई।
 
जल्द ही यह स्पष्ट हो गया कि उन्होंने गलत राह पर चलने का निर्णय लिया है। वैश्विक स्तर पर सीडीएमए की रफ्तार सुस्त पड़ गई और यहां तक कि क्वालकॉम ने भी कहा कि विश्लेषक नई प्रौद्योगिकी की ओर रुख कर रहे हैं। इसलिए 2008 में जब सरकार ने दोहरी प्रौद्योगिकी (सीडीएमए कंपनी के लिए अलग से लाइसेंस लिए बिना जीएसएम स्पेक्ट्रम हासिल करने की अनुमति) की मंजूरी दी तो टाटा टेलीसर्विसेज ने  स्पेक्ट्रम हासिल कर जीएसएम की ओर लौटने का निर्णय लिया। इस बार उन्होंने जापान की प्रमुख कंपनी डोकोमो के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित किया।
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