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जीएसटी के बाद : पहाड़ी राज्यों की औद्योगिक इकाइयों को घाटा

दिलाशा सेठ /  10 11, 2017

चिंता के विषय

अपील व्यवस्था में 42 प्रतिशत कर लाभ की वापसी का प्रावधान नहीं
कर विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह से इन राज्यों में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने का आकर्षण खत्म होगा
उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू और कश्मीर व पूर्वोत्तर राज्यों में इकाइयों को केंद्रीय उत्पाद शुल्क से छूट मिलती थी

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों की विनिर्माण इकाइयों को मिलने वाले कर लाभ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ज्यादातर इकाइयां चिंतित हैं कि उनको मिलने वाला लाभ कम हो जाएगा। कर लाभ में 42 प्रतिशत तक कमी, अपील की व्यवस्था न होने, जॉब वर्क की लागत पर रिफंड को लेकर प्रतिबंध के अलावा अन्य कई प्रावधान हैं, जो उद्योग की चिंता का विषय बने हुए हैं। कर विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे इन राज्यों में विनिर्माण का आकर्षण खत्म हो जाएगा। 

उद्योगों को कर लाभ देने के लिए बने नोडल विभाग औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने कुछ दिन पहले दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें यह अधिसूचित किया गया है कि औद्योगिक इकाइयों को मिलने वाले कर लाभ का विस्तार किया जाएगा और केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) का 58 प्रतिशत रिफंड मिल सकेगा। पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में विनिर्माण इकाइयों को जीएसटी लागू होन के पहले केंद्रीय उत्पाद शुल्क से 100 प्रतिशत छूट मिलती थी।

केंद्र सरकार का तर्क है कि कर बंटवारे में अब इसका 42 प्रतिशत राज्यों को दे दिया गया है, इसलिए इस हिस्से का भुगतान इन इकाइयों को राज्य सरकारों को करना चाहिए। हिंदुस्तान यूनीलीवर, डाबर, मैरिको, इमामी और बर्गर पेंट्स कुछ प्रमुख कंपनियां हैं, जिनकी इन राज्यों में विनिर्माण इकाई है। 

उद्योग जगत थर्ड पार्टी

मैन्युफै क्चरिंग के मामले में लाभ को लेकर चिंतित है। उद्योग बड़े पैमाने पर छोटी विनिर्माण इकाइयोंं को इन राज्यों में विनिर्माण ठेके देते हैं। पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन ने कहा, 'अभी यह साफ नहीं है कि अगर वस्तुओं का विननिर्माण थर्ड पार्टी द्वारा किया जाएगा, चाहे वह जॉब वर्क के तहत किया जाए या कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल के आधार पर। अगर रिफंड थर्ड पार्टियों को किया जाने वाला कार्य होगा तो निश्चित रूप से इसका लाभ कम हो जाएगा। तमाम पहलू हैं, जिन्हें साफ किए जाने की जरूरत है।'  इन राज्यों में करीब 4,000 इकाइयां हैं और 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू होने के बाद 10 साल तक की अवधि के लिए 27,413 करोड़ रुपये के बजटीय समर्थन की व्यवस्था की गई है। कैबिनेट ने इस योजना को इस साल अगस्त में मंजूरी दी है। ईवाई के विपिन सप्रा ने कहा, 'राज्य मेंं जाने वाले वाले उद्योग लाभों को देख रहे हैं। अब राज्यों को इन इकाइयों को कर वापसी पर विचार करना चाहिए।' 

Keyword: उत्पाद शुल्क, जीएसटी, जॉब वर्क, रिफंड, प्रतिबंध, डीआईपीपी, सीजीएसटी,
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