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कंपोजिशन स्कीम 6 महीने के लिए प्रभावी

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली October 08, 2017

छोटे करदाताओं को लाभ देने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने कंपोजिशन स्कीम योजना की अवधि अगले छह महीने के लिए प्रभावी करने का निर्णय लिया है। अब जीएसटी के तहत इस आसान अनुपालन एवं कर विकल्प की समय सीमा अगले साल 31 मार्च तक हो गई है। इससे सभी इकाइयों को योजना की जरूरी बातों का अनुपालन करने के वास्ते उनके कारोबारी प्रारूपों के अध्ययन के लिए अधिक समय मिल पाएगा। 
राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने शुक्रवार को जीएसटी परिषद की 22वीं बैठक के बाद बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'अब कंपोजिशन स्कीम का विकल्प चुनने का अवसर 31 मार्च 2018 तक के लिए बढ़ा दिया गया है।' इस संबंध में जल्द ही अधिसूचना आने की संभावना है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में परिषद की हुई बैठक में कं पोजिशन स्कीम के लिए सालाना कारोबार सीमा की पात्रता मौजूदा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है। इस योजना के तहत सपाट कर दर और तिमाही कर रिटर्न का प्रावधान है। योजना के तहत कारोबारी 1 प्रतिशत, विनिर्माता 2 प्रतिशत और रेस्तरां मालिक 5 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करते हैं, लेकिन उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने की अनुमति नहीं है।
सरकार के इस कदम का मकसद छोटे एवं मझोले उद्यमों पर कर अनुपालन का बोझ कम करना है। इसके अलावा सालाना 1.5 करोड़ रुपये राजस्व वाले करदाताओं को कर भुगतान और कर रिटर्न दाखिल करने के लिए तिमाही विकल्प दिया गया है। करीब 95-95 प्रतिशत कर राजस्व बड़े करदाताअें से प्राप्त होता है। अब तक जीएसटी की जद में आने वाले 89 लाख इकाइयों में 15 लाख पंजीकृत कारोबारियों ने कंपोजिशन स्कीम का विकल्प चुना है।
पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन कहते हैं, 'जीएसटी अनुपालन में छोटे एवं मझोले उद्यमों की पेश आ रही दिक्कतों के बाद सरकार ने बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों को यह अवसर दिया है। इसी वजह से समय सीमा मार्च 2018 तक बढ़ा दी गई है।'
कारोबारियों के बीच जागरूकता बढऩे और पंजीयन संबंधी चुनौतियां समाप्त होने से कंपोजिशन स्कीम की लोकप्रियता बढ़ी है। 30 सितंबर तक 14 दिनों तक मिली नई मोहलत में करीब 540,000 करदाताओं ने कंपोजिशन स्कीम में पंजीयन कराया जबकि इसके मुकाबले 16 अगस्त तक की समय सीमा में 10 लाख करदाताओं ने पंजीकरण कराया था। इस योजना का लाभ उठाने वालों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे कारोबारी टैक्स इन्वॉयस जारी नहीं कर सकते हैं। लिहाजा अगर कोई कंपोजिशन डीलर से खरीदारी करता है तो वह खरीदी गई वस्तुओं पर इनपुट टैक्स का दावा नहीं कर पाएगा। इसके अलावा योजना का विकल्प चुनने के लिए कारोबारी अंतर-राज्यीय आपूर्ति नहीं कर सकता है।
कंपोजिशन स्कीम के तहत कारोबारी को तिमाही आधार पर एक रिटर्न यानी जीएसटीआर-4 और एक सालाना रिटर्न फॉर्म जीएसटीआर-9ए भरना होगा। पहले सामान्य करदाता को हरेक महीने तीन फॉर्म भरने होते थे। इसके साथ ही अब करदाता को बिलों से जुड़ी जानकारी या एचएसएन कोड भी रिटर्न में देने की जरूरत नहीं होगी। कंपोजिशन स्कीम तंबाकू एवं इसकी जगह इस्तेमाल होने वाले चीजों पान मसाला और आइसक्रीम के लिए उपलब्ध नहीं है।

Keyword: GST, Composition scheme, Tax payers,
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