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फंडों की योजनाओं के वर्गीकरण से रिटर्न पर पड़ सकता है असर

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई October 08, 2017

पिछले हफ्ते भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने म्युचुअल फंड की योजनाओं के वर्गीकरण के लिए नए नियम तय किए थे। नियामक ने इक्विटी, डेट और हाइब्रिड समेत पांच श्रेणी मेंं वर्गीकरण को पारिभाषित किया। नियामक के कदम से इसका क्या असर हो सकता है, एक नजर :

योजनाओं के प्रदर्शन का अंतर घटेगा
लार्जकैप, मिडकैप, स्मॉलकैप और मल्टीकैप फंड की सख्त परिभाषा से अब फंड मैनेजर स्टाइल में किसी तरह का बदलाव नहीं कर पाएंगे। उदाहरण के लिए अब तक लार्जकैप फंडों के लिए मिडकैप का आवंटन बढ़ाना कॉमन था ताकि पोर्टफोलियो को आगे बढ़ाया जा सके क्योंकि कैप्स की परिभाषा सख्त नहींं थी। अब ऐसा नहीं हो पाएगा क्योंकि नई परिभाषा के मुताबिक लार्जकैप को अब अनिवार्य रूप से पूर्ण बाजार पूंजीकरण वाले 100 अग्रणी शेयरों में निवेश करना होगा। विभिन्न बाजार पूंजीकरण में जाने की स्वतंत्रता समाप्त हो गई है, लिहाजा इक्विटी योजनाओं का रिटर्न कुछ हद तक घटेगा। इक्विटी योजनाओं के बेंचमार्क रिटर्न से जुड़े संभावित प्रस्ताव के लिहाज से इक्विटी योजनाओं का कुल रिटर्न खास तौर से लार्जकैप फंडों का काफी हद तक प्रभावित होगा। टोटल रिटर्न इंडेक्स लागू किए जाने से इक्विटी योजनाओं का 1.25 से 2 फीसदी रिटर्न प्रभावित होगा। ये सभी चीजें प्रदर्शन के लिए फंड मैनेजरों पर बड़ा असर डालेंगी। सेबी के नए नियम से निवेशकों को शेयर के बारे में बेहतर आइडिया मिलेगा, जहां वे निवेश कर रहे हैं और रिटर्न की स्पष्ट तस्वीर भी मिलेगी।

इक्विटी एनएफओ नहीं दिखेगा
बाजार में तेजी के दौरान फंड हाउस की तरफ से नई इक्विटी योजनाएं पेश करना आम है। एंट्री लोड पर पाबंदी, अग्रिम कमीशन पर सीमा लगाने और कमीशन के लिए निवेश को आधार बनाने से पिछले कुछ सालों में इक्विटी एनएफओ की संख्या काफी हद तक घटी है। हर श्रेणी में एक योजना की नीति से नई पेशकश पर और ब्रेक लगेगा। सेबी का नियम हालांकि इंडेक्स फंड, ईटीएफ, फंड ऑफ फंड्स, क्लोज ऐंडेड फर्म आदि की पेशकश पर लागू नहीं है। क्षेत्र के कुछ अधिकारियों का मानना है कि नए नियम से और क्लोज ऐंडेड योजना की पेशकश को प्रोत्साहन मिल सकता है।

बैलेंस्ड फंडों पर कर का झटका
सभी मौजूदा बैलेंस फंडों (जो 65 फीसदी से ज्यादा इक्विटी में निवेश करते हैं) को आक्रामक हाइब्रिड फंड के तौर पर पुर्नवर्गीकृत करना होगा। बैलेंस्ड नाम बनाए रखने की इच्छा वाली योजनाओं को अभी इक्विटी व इक्विटी से जुड़ी प्रतिभूतियों में 40 से 60 फीसदी निवेश की अनुमति है, नए प्रावधान मौजूदा बैलेंस्ड फंड योजना को मिलने वाले कर लाभ को समाप्त कर देंगे।

बड़ी एएमसी होंगी प्रभावित
सेबी ने मोटे तौर पर सभी योजनाओं को इक्विटी की 10 श्रेणी, डेट फंड की 16 श्रेणी और हाइब्रिड फंड की छह श्रेणियों में बांटा है। ऐसे वर्गीकरण से इस क्षेत्र में योजनाओं की संख्या घटेगी, लेकिन कुछ लोगों की सोच अलग है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक कुल 830 ओपन ऐंडेड योजनाओं में से करीब 200 इक्विटी की और 500 डेट योजनाएं हैं। इनमें से सिर्फ 6-7 फीसदी योजनाओं का विलय हो सकता है। बड़े फंड हाउस पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा।

बेहतर निगरानी
अभी तक वैल्यू रिसर्च और मॉर्निंगस्टार जैसे फर्म इक्विटी व डेट फंड को वर्गीकृत करने के लिए खुद की परिभाषा का इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए वैल्यू रिसर्च के पास मिडकैप व स्मॉलकैप की अलग श्रेणी है जबकि मॉर्निंगस्टार इंडिया इसे एक ही श्रेणी में रखता है। एकसमान वर्गीकरण से फंड को ट्रैक करने वालों को विश्लेषण में आसानी होगी, जिससे अंतत: निवेशकों को फायदा मिलेगा।

Keyword: funds, Sebi, mutual fund,
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