बिजनेस स्टैंडर्ड - दो देशों की कथा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, October 17, 2017 04:58 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

दो देशों की कथा

साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  October 06, 2017

भारत में आवास बाजार में ठहराव या कहें कि मंदी का माहौल है। चीन में बीते दो साल में मकानों की कीमतें 40 फीसदी से अधिक बढ़ी हैं। नए बैंक ऋण में गिरवी की हिस्सेदारी आधी है। यह भी बीते एक साल में दोगुनी हुई है। भारत में सरकार आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के रास्ते तलाश कर रही है जबकि चीन में प्रदूषण रोकने के लिए एल्युमीनियम संयंत्र बंद किए जा रहे हैं और आवास बाजार की गति थामी जा रही है। भारत में विशेष आर्थिक क्षेत्र को लेकर बहस छिड़ी लेकिन फिर शांत हो गई। चीन में राजधानी पेइचिंग के दक्षिण में शियॉनगन में एक नया क्षेत्र विकसित किया गया है। यह शेनझेन के बाद दूसरा ऐसा क्षेत्र होगा। 2000 वर्ग किमी का यह पूरा इलाका दिल्ली से एक तिहाई ज्यादा है। अगर आपको पता न हो तो बता दें कि शेनझेन का जीडीपी भारत के तीन-चौथाई से ज्यादा के बराबर है। हम मेक इन इंडिया और सस्ती लागत का लाभ लेने की बात कर रहे हैं और शियॉनगन की स्थापना ही उच्च मूल्यवर्धित उद्योगों के लिए की गई है। 

 
चीन में शहर के शहर बनकर खाली पड़े हैं जबकि भारत में आधे-अधूरे टॉवर नजर आते हैं। चीन के ये खाली पड़े शहर भी राजस्व देते हैं क्योंकि चीन में जमीन की बिक्री से आने वाला धन स्थानीय सरकारों के पास जाता है। उनकी आय का 30 फीसदी ऐसे ही आता है। हमारे यहां लागत का बोझ संभावित खरीदारों पर होता है और लाभ चतुर ऑपरेटरों के हिस्से जाता है। रॉबर्ट वाड्रा इस बारे में बेहतर बता सकते हैं।
 
भारत में हमने स्टील के आयात पर एंटी डंपिंग शुल्क लगाया है और दिवालिया स्टील कंपनियों की बैंक नीलामी करने वाले हैं। चीन में वर्ष 2016 में ऐसी कंपनियों में अपनी क्षमता बढ़ाई। यह बढ़ी क्षमता ही भारत के कुल सालाना उत्पादन के आधे के बराबर है। परंतु कुछ मायनों में दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक समान भी हैं। दोनों के निर्यात में बीते दो साल में 10 फीसदी की गिरावट आई है और दोनों के व्यापार में 2017 में परिवर्तन आया है। अंतर केवल यह है कि चीन में व्यापार अधिशेष की स्थिति है जबकि भारत का घाटा बढ़ रहा है। इसके और मुद्रास्फीति को कम करने के बावजूद गत तीन साल में डॉलर के मुकाबले रुपया, युआन की तुलना में कम गिरा है। 
 
भारत में जीडीपी और कारोबारी ऋण का अनुपात केवल 51 फीसदी है। चीन में यह 169 फीसदी के स्तर पर है। दोनों ही देशों में निजी क्षेत्र से नया निवेश कमजोर पड़ा है। सरकारी कर्ज के मामले में मामला उलटा है। चीन में कर और जीडीपी का अनुपात 46 फीसदी जबकि भारत में 69 फीसदी है। कह सकते हैं कि चीन के पास वृद्घि को बढ़ावा देने की गुंजाइश है और उसने पिछले साल इसका इस्तेमाल भी किया। भारत में आरबीआई ने कहा है कि ऐसा संभव नहीं। भारत के आम परिवारों के कर्ज और जीडीपी के बीच 10 फीसदी का अनुपात है जबकि चीन में यह 45 फीसदी है। जाहिर है चीन के आम परिवार आवास बाजार को गति प्रदान कर रहे हैं, भारत में ऐसा नहीं हो रहा। व्यवस्थित जोखिम की बात करें तो चीन में कुल कर्ज जीडीपी के 250 फीसदी से ज्यादा है जबकि भारत में यह इसके आधे के बराबर है। इसके बावजूद चीन में जीडीपी और नए निवेश का अनुपात भारत से 50 फीसदी ज्यादा है। 
 
यही वजह है कि हर अनुमान लगाने वाले ने चीन के विकास को अस्थायी करार दिया है। चीन ने भी ऐसा माना है और उसने 2017 में इस पर रोक लगाने और वृद्घि दर को कम करके 6.5 फीसदी लाना तय किया। परंतु पहली छमाही में वृद्घि दर 6.9 फीसदी रही। हम कहते रहते हैं कि सुधार होगा लेकिन चीन ने दो वर्ष के अंतराल के बाद दुनिया की सबसे तेज विकसित होती बड़ी अर्थव्यवस्था का अपना दर्जा वापस पा लिया। ऐसा तब है जबकि उसकी श्रम शक्ति कम हो रही है। हमारे यहां कामगार बढ़ रहे हैं। रोजगार की बात करें तो चीन में इस साल 1.1 करोड़ शहरी रोजगार पैदा होने का अनुमान है। भारत के बारे में न ही पूछिए तो बेहतर है। 
 
इस बीच चीन के राष्टï्रपति शी चिनफिंग ने भ्रष्टïाचार विरोधी अभियान छेड़ा है और अपने कुछ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को जाल में फंसाने कामयाबी हासिल की। मोदी ने यही काम कुछ आम लोगों के साथ भी दिया। अब वह कह रहे हैं (कुछ हद तक सच) कि पूरा कांग्रेस नेतृत्व रहमोकरम  पर है। आखिर चीन में लोकतंत्र की दीवार बहुत पहले ढह चुकी है और भारत में ऐसी प्रेस है जो निराशावाद फैलाती है।
Keyword: india, economy, IIP, china,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या गोल्ड रिफाइनरियों को मिले आईजीएसटी से छूट?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.