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नोटबंदी के जख्म पर जीएसटी ने रगड़ दिया नमक

संदीप कुमार / भोपाल October 06, 2017

गत वर्ष 8 नवंबर को घोषित नोटबंदी और इस वर्ष 1 जुलाई से लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने मध्य प्रदेश के कारोबारियों को सिलसिलेवार मुसीबतों में डाल रखा है। प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक संगठनों की मानें तो छोटे-बड़े उद्योगपति अभी नोटबंदी की मार से उबर भी नहीं पाए थे कि जीएसटी के रूप में उन्हें दूसरे झटके का सामना करना पड़ा। उधर सीमा पर लगातार बने तनाव के बीच बाजार में चीन का माल भी कम देखने को मिल रहा है। 

 
उद्योग संगठनों के वरिष्ठï पदाधिकारियों से बातचीत में सरकार की मंशा और क्रियान्वयन के बीच के अंतर पर रोष देखने को मिलता है। जीएसटी पर गहरा अध्ययन करने वाले इंदौर के अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सुशील सुरेका कहते हैं कि नोटबंदी के बाद से जारी मंदी अब और मुखर हो गई है। उन्होंने कहा कि भारत के जीएसटी ढांचे में जो खामियां हैं, वे तो अपनी जगह हैं, लेकिन उसके अनुपालन की गड़बडिय़ों ने कारोबारियों को मुसीबत में डाल दिया है। सुरेका कहते हैं, 'जीएसटी को लागू करने में जल्दबाजी की गई। उस समय तक सारे पंजीयन तक नहीं हुए थे। जीएसटी सर्वर पूरी तैयार नहीं था और वह बार-बार क्रैश हो रहा है। रिफंड में हो रही देरी के कारण कारोबारी परेशान हैं।'
 
रीफंड जीएसटी की एक बड़ी खामी बनकर उभरा है। सुरेका कहते हैं कि निर्यातकों को अगर रिफंड मिलने में यूं ही देरी होती रही तो उनके पास कारोबार के लिए जरूरी कार्यशील पूंजी तक नहीं रह जाएगी। सुरेका कहते हैं कि कुल कारोबार की मंदी के बीच ऑटोमोबाइल क्षेत्र की तरक्की जरूर पहेली बनी हुई है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राधेश्याम माहेश्वरी कहते हैं कि नोटबंदी और जीएसटी को लेकर सरकार की मंशा भले ही अच्छी थी लेकिन इन दोनों ही मौकों पर सरकार की तैयारी बहुत कमजोर थी। 
 
वह कहते हैं,'नोटबंदी ने मध्यम और छोटे कारोबारियों को ऐसी चोट दी कि वे अब तक उबर नहीं पाए। आधी अधूरी तैयारी की वजह से जो पूंजी बैंक में चली गई, वह दोबारा कारोबारी प्रचलन में आ ही नहीं पाई। जब तक वह पूंजी किसी रूप में दोबारा बाजार में नहीं आती तब तक हालात सुधरने वाले नहीं हैं। क्योंकि बिना पैसे के छोटा व्यापारी माल कहां से खरीदेगा?'
 
माहेश्वरी ने कहा कि भले ही वह धन बेनामी था लेकिन वह असंगठित क्षेत्र के कारोबार को चला तो रहा था। उसके बैंक में जमा होते ही कारोबार नकदी के लिए जूझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी ने रोजगार पर भी बहुत बुरा असर डाला है। उधर, इस त्योहारी मौसम में प्रदेश के बाजार में चीनी वस्तुओं की उपलब्धता पर उन्होंने कहा कि व्यापारियों के स्वविवेक से लिए गए फैसले के चलते चीनी सामान की मौजूदगी 50 फीसदी तक कम हुई है। एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज मंडीदीप के अध्यक्ष मनोज मोदी की राय थोड़ी अलग है। वह कहते हैं, 'नोटबंदी और जीएसटी के असर का वृद्घि पर असर आंकना सही नहीं है। इनका उद्देश्य अलग था। नोटबंदी की मदद से सरकार अतिरिक्त नकदी हटाना चाहती थी और जीएसटी की मदद से अधिकांश कारोबारियों को कर रडार पर लाना चाहती थी। वह इसमें सफल रही है।' 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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