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निर्यातकों की चिंता का होगा समाधान

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली October 05, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद दो महीने में राज्यों को हुए नुकसान के मुआवजे के रूप मे केंद्र सरकार राज्यों को 8,500 करोड़ रुपये जारी कर सकती है। नई दिल्ली में शुक्रवार को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान इस पर चर्चा होनी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली शुक्रवार को जीएसटी परिषद की बैठक करेंगे। इस बैठक में राजस्व सचिव हसमुख अढिय़ा की अध्यक्षता में बनी समिति की रिपोर्ट पर चर्चा हो सकती है, जिसका गठन जीएसटी के तहत निर्यातकों की चिंता दूर करने के लिए किया गया था। इस बैठक में जीएसटी लागू होने के बाद अनौपचारिक और छोटे कारोबारियों को हो रही समस्या पर भी चर्चा हो सकती है। 
 
माना जा रहा है कि मझोली और छोटी इकाइयों को जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के मामले में कुछ राहत दी जा सकती है। जीएसटी के कारण कार्यशील पूंजी फंस जाने से निर्यातकों को  जूझना पड़ रहा है। उनका दावा है कि  60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा पूंजी फंसी हुई है, जिसे उन्होंने एकीकृत जीएसटी के रूप में पहले जमा कर दिया है और उसके बाद उन्हें उन सामान पर कर के भुगतान की वापसी लेनी है, जिनका निर्यात किया जाना है। पुराने कर के समय में यह मामला नहीं था।
 
केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को उपकर का भुगतान भी किया जाएगा, जो 15,021 करोड़ रुपये के आधे से ज्यादा होगा। इसका संग्रह जुलाई और अगस्त के दौरान मुआवजा उपकर के रूप में क्रमश: 7,198 करोड़ रुपये और 7,823 करोड़ रुपये किया गया है।एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'संग्रह किए गए सेस की तुलना में राज्योंं की ओर से की गई वास्तविक मांग कम है। इससे संकेत मिलते हैं कि राज्यों ने जितने राजस्व के घाटे का डर जताया था, उससे कम घाटा हुआ है। बहरहाल यह शुरुआती दौर है। कुछ महीने में वास्तविक तस्वीर उभरकर सामने आएगी।' जुलाई महीने में सरकार का कुल जीएसटी संग्रह करीब 95,000 करोड़ रुपये और अगस्त में 90,669 करोड़ रुपये रहा है। 
 
बहरहाल जीएसटी प्रणाली के तहत प्रस्तावित मुनाफारोधी प्राधिकरण के चेयरमैन पद के सृजन का प्रस्ताव कैबिनेट की अगली बैठक में लाया जा सकता है। इसके साथ ही वस्तुओं की आवाजाही पर निगरानी रखने के लिए ई-वे बिल लागू करने में कम से कम एक महीने लग जाएंगे।  प्राधिकरण का काम यह देखना होगा कि कंपनियां जीएसटी का फायदा ग्राहकों को पहुंचा रही हैं या नहींं। सूत्रों के मुताबिक उसका चेयरमैन सचिव स्तर का अधिकारी होगा। इस तरह का प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। 
 
केंद्र व राज्य सरकारों के कर अधिकारियोंं की 4 सदस्यों वाली समिति गठित की गई है, जो जीएसटी के तहत मुनाफाखोरी की शिकायतों के मामले देख रही है। कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा की अध्यक्षता में पांच सदस्यों वाली समिति, जिसमें अढिय़ा, सीबीईसी की चेयरमैन वनजा सरना और दो राज्यों के मुख्य सचिव शामिल हैं, चेयरमैन व प्राधिकरण के सदस्यों के नामों को अंतिम रूप देंगे, जिसका कार्यकाल 2 साल होगा। 
 
मुनाफारोधी समिति शिकायतों के आधार पर काम करेगी और अगर कोई मामला जांच के योग्य पाया जाता है तो उसे रक्षोपाय महानिदेशालय (डीजीएस) को सौंपा जाएगा।  इस समिति मे केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) के दो अधिकारी और दिल्ली और हरियाणा के कर विभाग से एक एक अधिकारी शामिल हैं। सीबीईसी अधिकारी हिमांशु गुप्ता, मुख्य आयुक्त जीएसटी दिल्ली, ओपी दाधीच, मुख्य सीमा शुल्क आयुक्त (निवारक) दिल्ली, एच राजेश प्रसाद आयुक्त (बिक्री कर) दिल्ली और अशिमा बराड़, उत्पाद एवं कराधान आयुक्त हरियाणा इस समिति के सदस्य हैं।
 
जीएसटी के दौर में मुनाफारोधी व्यवस्था के ढांचे के मुताबिक जो शिकायतें स्थानीय प्रकृति की होंगी उन्हें सबसे पहले राज्य स्तरीय जांच समिति के पास भेजा जाएगा और अगर राष्ट्रीय स्तर का मामला हुआ तो स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा। अगर शिकायत स्तरीय है तो संबंधित समितियां उस मामले को आगे की जांच के लिए रक्षोपाय महानिदेशालय के पास भेजेंगी। रक्षोपाय महानिदेशालय सामान्यतया इस काम को करीब 3 महीने में पूरा करेगा और अपनी रिपोर्ट मुनाफारोधी प्राधिकरण के पास भेजेगा। प्राधिकरण को अधिकार होगा कि वह किसी इकाई या कारोबार का पंजीकरण निरस्त कर दे, अगर वह जीएसटी लागू होने के बाद कर की कम दरों का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने में सफल नहीं होती है। हालांकि यह कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ आखिरी विकल्प होगा। प्राधिकरण संबंधित इकाई को कीमतों में कमी का लाभ 18 प्रतिशत ब्याज के साथ पहुंचाने का आदेश दे सकता है।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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