बिजनेस स्टैंडर्ड - नवाज शरीफ की राजनीतिक वारिस होंगी बेटी मरयम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 12, 2017 08:13 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

नवाज शरीफ की राजनीतिक वारिस होंगी बेटी मरयम

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  October 04, 2017

पड़ोसी मुल्क में हाल ही में संपन्न हुए उपचुनाव में पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएलएन) का प्रदर्शन भले ही उतना अच्छा नहीं रहा जितना सोचा गया था लेकिन फिर भी वहां के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी मरयम नवाज तारीफ की हकदार हैं। गौरतलब है कि भ्रष्टïाचार के मामले में पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत से पद के अयोग्य घोषित होने के बाद नवाज शरीफ को पद छोडऩा पड़ा। पंजीकृत मतदाताओं की तादाद में इजाफा होने के बावजूद पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज को मिलने वाले मतों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम हुई है। सन 2013 में जब स्वयं नवाज शरीफ नैशनल असेंबली 120 (एनए 120) के उम्मीदवार के तौर पर इस सीट से चुनाव लड़े थे तो उन्हें ज्यादा मत मिले थे। इस बार उनकी पत्नी को कम वोट हासिल हुए हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के वोट या तो इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को गए हैं या फिर इस्लामिक दलों को। अगर इस्लामिक दलों को वोट गए हैं तो यह कहीं अधिक चिंता की बात है। 

 
इस चुनाव में पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के समर्थकों के सामने दो तथ्य आए: पहला, आने वाले दिनों में उन्हें मरयम की ओर ताकना होगा और शरीफ बंधुओं यानी नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ के बीच मतभेद अब राजनीतिक हकीकत बन चुके हैं। वर्ष 2015 में क्रिसमस के मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवाज शरीफ की बेटी की मेहंदी की रस्म के मौके पर पाकिस्तान गए थे। इस समय मरयम कैंब्रिज विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर रही हैं। उनकी थीसिस का विषय है: '9/11 की घटना के बाद पाकिस्तान में कट्टरपंथ।'
 
मरयम ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत नवंबर 2011 में की थी। उस वक्त उन्होंने पार्टी की ओर से आयोजित महिलाओं के एक सम्मेलन को संबोधित किया था। मरयम ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता इमरान खान की ओर से इस्लामाबाद बंद के आह्वïान के वक्त भी अपने परिवार का मजबूती से बचाव किया था। वह अपनी पार्टी की ओर से सोशल मीडिया का काम भी संभालती हैं। इसमें उनकी कोई औपचारिक भूमिका नहीं है परंतु वह पार्टी की तमाम अहम बैठकों में मौजूद नजर आती हैं। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय में जिन दिनों उनके पिता नवाज शरीफ के खिलाफ भ्रष्टïाचार का मामला चल रहा था, वहां भी वह मौजूद नजर आतीं। इस मामले में वह भी एक पक्षकार रही हैं। मरयम को एक महत्त्वपूर्ण ऋण योजना का प्रभारी बनाया गया था। यह योजना युवाओं के लिए थी। परंतु बाद में न्यायालय ने कहा कि उनके पास इसकी अध्यक्षता करने के लिए जरूरी योग्यता नहीं है। इसके चलते उनको पद छोडऩा पड़ा। पाकिस्तान में अब यह बात साफ हो चुकी है कि मरयम ही नवाज शरीफ की राजनीतिक वारिस हैं। 
 
इस राजनीतिक विरासत के एक और दावेदार हैं : हमजा। हमजा नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ के सबसे बड़े बेटे हैं। जनरल परवेज मुशर्रफ के सैन्य शासनकाल में जब नवाज शरीफ और शहबाज शरीफ सऊदी अरब में निर्वासित जीवन बिता रहे थे तब केवल हमजा ही पाकिस्तान में रह गए थे। पोल्ट्री कारोबार में भारी भरकम निवेश के चलते उनको पाकिस्तानी पंजाब का पोल्ट्री किंग कहा जाता है। हमजा शरीफ की भी पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के मामलों में अच्छी पकड़ है। वहीं दूसरी ओर नवाज शरीफ की पत्नी कुलसूम शरीफ की कोई बड़ी राजनीतिक हैसियत नहीं है। माना जा रहा है कि वह अपनी बेटी मरयम को बड़ी भूमिका के लिए तैयार कर रही हैं क्योंकि वह चाहती हैं कि राजनीतिक विरासत उनके परिवार में ही बनी रहे। एनए 120 सीट का चुनाव उनके इसी कदम का हिस्सा था। 
 
पाकिस्तान में अगले साल आम चुनाव होने हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) में बिलावल भुट्टïो और उनकी बहन असीफा पहले ही सार्वजनिक जीवन में आ चुके हैं। पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज में पहले माना जा रहा था कि स्वाभाविक रूप से हमजा राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगे। कहा जाता है कि नवाज शरीफ के दोनों बेटे राजनीति में कतई रुचि नहीं रखते, वे अपने परिवार के कारोबार को चलाने में व्यस्त हैं। परंतु भ्रष्टïाचार के आरोपों और निजी जीवन की गड़बडिय़ों के सामने आने से हालात खराब हुए हैं। दोनों भाइयों नवाज और शहबाज के बीच तथा उनके परिवारों के बीच भी रिश्ते एकदम खराब हो गए हैं। यह बात उस समय उजागर हुई जब नवाज शरीफ ने भ्रष्टïाचार के आरोप लगने और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पद के अयोग्य घोषित करने पर पद छोड़ते वक्त प्रधानमंत्री पद पर अपने भाई की जगह एस ए अब्बासी की नियुक्ति की बात कही। पंजाब में शहबाज शरीफ मुख्यमंत्री हैं और वहां शरीफ परिवार की राजनीतिक पकड़ बहुत अधिक अहमियत रखती है। न तो शहबाज और न ही हमजा ने एनए120 के उपुचनाव में किसी तरह की भूमिका अदा की। यह भी संभव है कि दोनों परिवारों के इन वारिसों के बीच की लड़ाई किसी नतीजे पर पहुंच ही न सके। यह भी हो सकता है कि पार्टी हमजा को अधिक गंभीरता से ले। परंतु फिलहाल, इस मोड़ पर संतुलन पूरी तरह मरयम नवाज की ओर नजर आ रहा है। भविष्य में पाकिस्तान में जो सरकार बनेगी उसके लिए इस बात के अपने निहितार्थ हैं।
Keyword: pakistan, nawaz sharif, maryam,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बिटकॉइन पर नियमन बनाए सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.