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नए बेंचमार्क से तय होगी कर्ज लागत

अभिजित लेले और एजेंसियां / मुंबई 10 04, 2017

कर्ज की ब्याज दरें ऊंची रखने पर बैंकों को खरी-खोटी सुनाते हुए भारतीय रिजर्व बैंंक ने आज कहा कि वह कर्ज की लागत तय करने के लिए बाहरी बेंचमार्क का इस्तेमाल करने की खातिर एक व्यवस्था बनाएगा। बैंंकिंग नियामक ने आधार दर और सीमांत कोष लागत पर आधारित उधारी दर (एमसीएलआर) पर चिंता जताई और कहा कि ऐसे आंतरिक बेंचमार्क से मौद्रिक नीतिगत दर में हुई कटौती का फायदा आगे ठीक तरह से नहीं पहुंच पाया है।
 
आरबीआई के आंतरिक समूह (जिसका गठन अगस्त 2017 की मौद्रिक समीक्षा के बाद हुआ) ने समयबद्ध तरीके से बाहरी बेंचमार्क की ओर बढऩे का सुझाव दिया है ताकि उधार लेने वालों के लिए बेहतर दरें उपलब्ध हों। आरबीआई के अध्ययन समूह ने पाया कि आंतरिक बेंचमार्क मसलन आधार दर या एमसीएलआर ने मौद्रिक नीति में कटौती का प्रभावी फायदा नहीं दिया है। समूह का गठन एमसीएलआर व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन नीतिगत दरों में कटौती का फायदा आगे ले जाने में सुधार लाने की खातिर किया गया था। इसने 25 सितंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
 
आरबीआई ने 1 अप्रैल 2016 को एमसीएलआर व्यवस्था लागू की जब इसने पाया कि तब के प्रभावी आधार दर आसान व तीव्र गति से नीतिगत दरों मे कटौती का फायदा आगे बढऩे का मकसद हासिल करने में नाकाम रहे हैं। एमसीएलआर लागू किए जाने से पहले बैंक सख्त आधार दर व्यवस्था का पालन कर रहे थे, जो 1 जुलाई 2010 से प्रभावी हुई और इसने बैंकों की प्रधान उधारी दर की जगह ली थी। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, एक साल का माध्य एमसीएलआर अप्रैल 2016 के 9.45 फीसदी के मुकाबले अगस्त 2017 में घटकर 8.50 फीसदी रह गया है।
 
बैंकिंग उद्योग के लॉबी समूह इंडियन बैंक एसोसिएशन ने एक बयान में कहा, मौजूदा एमसीएलआर ढांचे की समीक्षा और बाहरी बेंचमार्क के इस्तेमाल के प्रस्ताव पर वह बैंकों के साथ चर्चा करेगा। आईबीए ने हालांकि विशेष टिप्पणी करने से परहेज किया। आरबीआई की समिति ने कहा कि आधार दर-एमसीएलआर के आकलन में मनमानापन और इस पर स्प्रेड ने ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाया है। आधार दर और एमसीएलआर की व्यवस्था बैंक लोन की लागत तय करने के वैश्विक चलन के मुताबिक भी नहीं है।
नीतिगत समीक्षा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा कि रिपोर्ट में तीन संभावित बेंचमार्क का प्रस्ताव है, जिसे आने वाले दिनों में उधारी के साथ जोड़ा जा सकता है।
 
उन्होंने कहा, हमें लगता है कि आंतरिक बेंचमार्क मसलन आधार दर या एमसीएलआर आंकड़ों पर आधारित होते हैं और बैंकों को स्वविवेक की ज्यादा शक्ति के इस्तेमाल की इजाजत देते नजर आते हैं। कई चीजें उन्हें यह सुनिश्चित करने देती है कि उधारी दरें ऊंची रखी जा सकती है, चाहे मौद्रिक नीतिगत दरें नीचे जाएं। इस समिति की सिफारिशों पर आरबीआई 25 अक्टूबर 2017 तक फीडबैक मिलने के बाद अंतिम फैसला लेगा। एमसीएलआर का आकलन बैंकों की फंडों की सीमांत लागत (मोटे तौर पर जिस ब्याज दर पर वह उधार लेता है), इक्विटी पर रिटर्न आदि का ध्यान रखकर किया जाता है।
Keyword: repo rate, bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई),
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