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इस साल बासमती में मजबूती के आसार, कम बारिश होने से बुआई में आई नरमी

सुशील मिश्र / मुंबई 10 03, 2017

कम उत्पादन

एपीडा की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल बासमती धान की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 8 फीसदी कम हुई जबकि धान की कुल बुआई करीब तीन फीसदी कम हुई
वर्ष 2016 में बसमाती उत्पादक प्रमुख राज्यों में बासमती का कुल रकबा 16.89 लाख हेक्टेयर था जो 2017 में घटकर 15.55 लाख हेक्टेयर रहा

इस साल मॉनसून सामान्य के मुकाबले थोड़ा कमजोर रहा जिसका असर खरीफ सीजन की फसलों पर भी पड़ा है। सामान्य से कम बारिश होने से बासमती धान की बुआई पिछले साल की तुलना में आठ फीसदी कम हुई है। इसका बासमती चावल के उत्पादन पर प्रभाव पडऩा तय माना जा रहा है। साथ ही निर्यात भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। उत्पादन कम हुआ तो बासमती का निर्यात लगातार चौथे साल गिरता नजर आएगा। हालांकि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में निर्यात की रफ्तार पिछले साल के शुरुआती चार महीनों से ज्यादा है।

मौसम विभाग के मुताबिक पांच फीसदी की कमी के साथ मॉनसून सीजन पिछले सप्ताह खत्म हो गया। फिलहाल देश में अभी कोई भी राज्य सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है लेकिन देश के कई हिस्सों से बारिश कम होने और फसल सूखने की खबरें आ रही हैं। बारिश के सीजन (खरीफ) की सबसे प्रमुख फसल धान और कपास का रकबा कम हुआ है जो दर्शता है कि मॉनसून सामान्य नहीं रहा। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल बासमती धान की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 8 फीसदी कम हुई है, जबकि धान की कुल बुआई करीब तीन फीसदी कम हुई है। वर्ष 2016 में बसमाती उत्पादक प्रमुख राज्यों में बासमती का कुल रकबा 16.89 लाख हेक्टेयर था जो इस साल यानी 2017 में घटकर 15.55 लाख हेक्टेयर रह गया।

एपीडा की रिपोर्ट के मुताबिक बासमती उत्पादक प्रमुख राज्य हरियाणा में इस साल बासमती की बुआई 9.39 फीसदी, पंजाब में 8.84 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 3.76 फीसदी, उत्तराखंड में 2.43 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 2.09 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 1.25 फीसदी और दिल्ली में बासमती की खेती में 2.67 फीसदी की कमी हुई है। 

मौसम विभाग के मुताबिक पिछले साल देश में रिकॉर्ड फसलों की बुआई हुई थी। लेकिन इस बार उससे थोड़ी कम हुई है जिसका खास फर्क पडऩे वाला नहीं है। एपीडा के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि बारिश कम होने का असर सिर्फ बासमती पर ही नहीं बल्कि पूरे धान की फसल पर पड़ा है। एपीडा के मुताबिक देश के प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में खरीफ सीजन 2016 के दौरान 59.86 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी जो इस साल करीब तीन फीसदी घटकर 58.06 लाख रह गई। यानी इस साल धान की खेती पिछले साल से करीब तीन फीसदी कम है। धान के रकबे मेंं सबसे ज्यादा कमी पंजाब में हुई है इस साल पंजाब में धान की खेती में 4.80 फीसदी और हरियाणा में 2.26 फीसदी की गिरावट आई है। 

देश में बासमती की खेती कम होने की खबरों के साथ इस साल निर्यात में भी कमी आने की आशंका जताई जाने लगी है। इसके साथ ही बासमती में भारत की बादशाहत भी खत्म हो सकती है। बासमती चावल के निर्यातकों में भारत प्रमुख देश है। बासमती का निर्यात मुख्य रूप से सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत को किया जाता है।

लेकिन पिछले चार साल से बासमती चावल का निर्यात लगातार कम हो रहा है। वर्ष 2016-17 के दौरान देश से 21,604.54 करोड़ रुपये मूल्य का 40 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया गया जबकि 2015-16 में 22,718.44 करोड़ रुपये, 2014-15 में 27,597.89 करोड़ रुपये और 2013-14 में 29,299.96 करोड़ रुपये मूल्य का बासमती चावल निर्यात किया गया था। चावल निर्यातकों का कहना है कि फिलहाल चालू वित्त वर्ष में निर्यात बेहतर है।

बासमती का रकबा कम होने का असर वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में देखने को मिलेगा जिसके कारण पूरे साल के निर्यात का आंकड़ा कम हो सकता है। हालांकि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में निर्यात अधिक हुआ है। इस साल अप्रैल से जुलाई के बीच 10,135.98 करोड़ रुपये मूल्य का 15,59,395.98 टन बासमती चावल का निर्यात किया गया है जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में अप्रैल से जुलाई तक  8,132.93 करोड़ रुपये में 15,48,534.01 टन बासमती चावल का निर्यात किया गया था। 

Keyword: एपीडा, रिपोर्ट, बासमती, धान, बुआई, मॉनसून, खरीफ, फसल, बारिश, निर्यात, कपास,
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