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एकमुश्त जीएसटी में 5 लाख और, 15 लाख कारोबारी कंपोजिशन योजना से जुड़े

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 10 02, 2017

विशेषज्ञों ने की समयसीमा बढ़ाने की वकालत

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कंपोजिशन स्कीम से 5 लाख से अधिक नए कारोबारी जुड़ गए हैं। इस योजना में 75 लाख रुपये सालाना कारोबार वाले छोटे कारोबारियों को कर की समान दर और आसान अनुपालन की पेशकश की गई है। 16 अगस्त तक की समयसीमा तक करीब 10 लाख करदाता इस योजना से जुड़े थे। कारोबारियों को इससे जुडऩे के लिए एक और मौका दिया गया था जिसकी समयसीमा 30 सितंबर थी। इस दौरान करीब 540,000 नए करदाताओं ने पंजीकरण कराया है। इस तरह अब तक कुल 15 लाख करदाता कंपोजिशन योजना से जुड़ चुके हैं जबकि जीएसटी में पंजीकरण कराने वाले कारोबारियों की संख्या 89 लाख है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित अवधि के दौरान कंपोजिशन योजना को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है जो इस बात का प्रतीक है कि इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। उन्होंने इसकी समयसीमा 2-3 महीने बढ़ाने और इसे व्यापक बनाने की वकालत करते हुए कहा कि इससे जीएसटी पंजीकरण और करदाताओं की संख्या बढ़ेगी। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'कंपोजिशन स्कीम में पंजीकरण फिर से खोले जाने को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। कुछ कारोबारियों ने और समय मांगा है ताकि वे अपने कारोबारी मॉडल का मूल्यांकन कर कंपोजिशन योजना की जरूरतों को पूरा कर सके।'

दुकानदार, रेस्टोरेंट, निर्माता और आपूर्तिकर्ता जैसे छोटे करदाता इस योजना से जुड़ सकते हैं। इसमें दुकानदारों पर एक फीसदी जीएसटी, निर्माताओं पर 2 फीसदी और रेस्टोरेंटों पर 5 फीसदी का प्रावधान है।पहली बार इस योजना की समयसीमा 21 जुलाई थी लेकिन उस दौरान केवल एक लाख कारोबारियों ने ही पंजीकरण कराया था। बाद में समयसीमा को बढ़ाकर 16 अगस्त कर दिया गया था। पंजीकरण में आ रही दिक्कतों को देखते हुए जीएसटी परिषद की 9 सितंबर को हैदराबाद में हुई बैठक में कंपोजिशन योजना को फिर से कुछ दिनों के लिए खोलने का फैसला किया गया था।

सरकार इस योजना के तहत सालाना कारोबार की सीमा बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये करने पर भी विचार कर रही है। खबरों के मुताबिक केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड की अध्यक्ष वनजा सरना ने रविवार को कहा था कि इस मुद्दे को कानूनी समिति के समक्ष रखा जाएगा। कंपोजिशन योजना से जुडऩे के लिए पहले 50 लाख रुपये की सीमा थी जिसे बाद में बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया गया था।

पीडब्ल्यूसी इंडिया के प्रतीक जैन ने कहा, 'कुल मिलाकर यह संख्या ठीकठाक दिखती है लेकिन सवाल यह है कि और ज्यादा लोग इससे जुड़ सकते हैं या नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि तुलना के लिए कोई पैमाना नहीं है। कुछ लोग पहले असमंजस में थे कि उन्हें सामान्य योजना से जुडऩा चाहिए या फिर कंपोजिशन से।' पहले मूल्य वद्र्घित कर व्यवस्था के तहत कंपोजिशन स्कीम अलग-अलग थी। डेलॉयट के एम एस मणि ने कहा कि सरकार को इसकी समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर कर देनी चाहिए जिससे ज्यादा से ज्यादा कारोबारी इससे जुड़ सकें। उन्होंने कहा, 'इसे जीएसटी करदाताओं की संख्या बढ़ेगी।' 

Keyword: विशेषज्ञ, जीएसटी, कंपोजिशन स्कीम, समयसीमा, करदाता, पंजीकरण, दुकानदार,
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