बिजनेस स्टैंडर्ड - दिवालिया प्रक्रिया में जल्द आएगी तेजी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, November 20, 2017 10:48 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम अर्थव्यवस्था खबर

दिवालिया प्रक्रिया में जल्द आएगी तेजी

एन सुंदरेश सुब्रमण्यन /  October 02, 2017

भारतीय दिवालिया एवं ऋणशोधन बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरमैन एम एस साहू एक प्रशिक्षित वकील होने के साथ ही नियामकीय कार्यों का भी लंबा अनुभव रखते हैं। वह पांचवीं बार किसी नियामकीय संस्था से जुड़े हैं। इससे पहले वह वित्त मंत्रालय, एनएसई, सेबी, भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसई) और भारतीय प्रतिस्पद्र्धा आयोग का भी अंग रह चुके हैं। आईबीबीआई में काम करते हुए उन्हें काफी कुछ सीखने को भी मिला है। एन सुंदरेश सुब्रमण्यन के साथ साहू ने इस नियामकीय संस्था के साथ जुड़ाव से जुड़े अनुभवों पर लंबी बातचीत की। पेश हैं संपादित अंश:  

 
आईबीबीआई में अपने एक साल के सफर को आप किस तरह देखते हैं? 
 
यह सफर दरअसल दिवालिया एवं ऋणशोधन संहिता, 2016 का है। यह बहुत ही तेज रफ्तार वाला, केंद्रित और जोश से भरा सफर रहा है। इसमें हमें काफी कुछ सीखने को भी मिला है। सरकार ने आगे बढ़कर इस सफर की अगुआई की और जल्द ही इस सफर को साझा बना दिया। अर्नेस्ट हेमिंग्वे के उपन्यास 'द सन आलसो राइजेज' में एक संवाद आता है: 'आप दिवालिया कैसे हो गए?' इसका जवाब आता है: 'धीरे-धीरे और फिर अचानक'। दिवालिया एवं ऋणशोधन सुधारों की दिशा में पिछले 25 वर्षों से प्रयास चल रहे थे लेकिन 2016 की शुरुआत में अचानक ही यह कानून अमल में आ गया। इस कानून का निर्धारण और क्रियान्वयन बहुत ही तेज गति से हुआ और मेरी जानकारी में देश के भीतर या बाहर इसकी कोई मिसाल नहीं है।
 
इस कानून का क्या प्रभाव रहा है? 
 
इस कानून के असर के मुख्य रूप से तीन तरीके हैं। पहला असर निरोधात्मक है। दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का अपरिहार्य परिणाम यह है कि यह कर्जदारों को जानबूझकर कर्ज अदायगी न करने से रोकता है। दूसरा असर यह है कि यह कर्जदारों को अदायगी में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित करता है। देखने में आया है कि कर्जदार किसी कर्जदाता से नोटिस आने या नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के पास कर्ज वसूली के लिए अर्जी लगाने के बाद जल्दी से अपने कर्ज निपटा रहे हैं। अकेले एनसीएलटी के मुंबई पीठ में ही दिवालिया प्रक्रिया की अर्जी स्वीकृत होने के पहले 250 से अधिक मामले निपटाए जा चुके हैं। ऐसे में एनसीएलटी के सभी पीठों की तरफ से निपटाए गए कुल मामलों की संख्या का अंदाजा लगाया जा सकता है। उच्चतम न्यायालय के स्तर पर भी दो मामले निपटाए गए हैं। तीसरा असर दिवालिया प्रस्ताव और पूंजीकरण के रूप में देखने को मिलेगा लेकिन अभी वह देखा जाना बाकी है। कुछ शुरुआती संकेत मिले हैं लेकिन किसी नतीजे पर पहुंचने के लिए कुछ अन्य मामलों को देखा जाना चाहिए।
 
क्या घरों के खरीदारों के नजरिये से यह कानून और संबंधित निकाय मददगार हैंं? जेपी इन्फ्राटेक का मामला क्या इस दिशा में नजीर बनेगा?
 
कोई भी कानून किसी खास संदर्भ में और उपलब्ध ज्ञान के ही आधार पर बनता है। कानून को अमलीजामा पहनाने के बाद ही खामियां नजर आती हैं और फिर उस कानून को नए सिरे से लिखा जाता है। सेबी अधिनियम या प्रतिस्पद्र्धा अधिनियम के उदाहरण को ही लीजिए। इन कानूनों को अमल में आने के कुछ ही वर्षों के भीतर नए सिरे से लिखना पड़ा था। मुझे नहीं मालूम कि दिवालिया कानून में भी बदलावों की जरूरत है या नहीं, लेकिन इस संभावना को नकार भी नहीं सकता। किसी भी कानून के तीन स्रोत होते हैं- वैधानिक नियम, पुराने मामलों में आए फैसले और परिपाटी। हमें अनुभव के साथ इन तीनों पहलुओं को प्रस्फुटित होने का मौका देना चाहिए ताकि अगर कहीं कोई कमी है तो उसे दूर किया जा सके। निर्णायक अधिकरण के संबंध में कहा गया है कि घर का खरीदार भी एक अंशधारक है और कर्ज निपटान पेशेवर से अन्य संबद्ध पक्षों के साथ खरीदार के भी हितों का ख्याल रखने की उम्मीद की जाती है। कॉर्पोरेट कर्जदाता के लिए ऋणग्रस्त संपत्ति का मूल्य बढ़ाने के लिए दिवालिया प्रस्ताव लाना और सभी पक्षों के हितों को संतुलित करना ही इस कानून का उद्देश्य है।
 
सिनजी डूरे के मामले में संबंधित पक्ष के लेनदेन को लेकर सवाल उठे हैं। इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है?
 
मैं इस मसले पर कुछ नहीं कहना चाहता। मेरी जानकारी में इस मामले को एनसीएलटी ने विचार करते हुए दिवालिया प्रस्ताव को मंजूरी दी है और अब यह मामला एनसीएलएटी के पास अपील के रूप में लंबित है।
 
कर्ज वसूली की खराब स्थिति पर आपकी कोई टिप्पणी...
 
मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि यह कानून कर्ज की वसूली के लिए नहीं बल्कि कर्ज समाधान के लिए लाया गया है। इसमें कर्जदाता को केवल संपत्ति की बिक्री से ही नहीं बल्कि भविष्य में होने वाली आय से भी अपने कर्ज की भरपाई होने की उम्मीद की जाती है। पहले से ही लंबित कर्ज को लेकर बीआईएफआर में दर्ज या कई वर्षों से कारोबार नहीं कर रहीं बड़ी कर्जदार कंपनियों के खिलाफ यह कानून अमल में आने के साथ ही दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के प्रयास किए गए। इन मामलों के नतीजे भले ही अधिक लुभावने नहीं रहे लेकिन पूंजीकरण मूल्य के रूप में देखने पर यह आकर्षक ही रहा। कुछ वर्षों बाद कर्जदार कंपनियां एक लाख रुपये की चूक पर भी कर्ज समाधान प्रक्रिया शुरू कर सकती हैं क्योंकि उस समय उनकी वित्तीय सेहत अपेक्षाकृत बेहतर होने से आकर्षक मूल्य भी मिल सकेगा।
 
अगले एक साल में आप किन बातों पर ध्यान केंद्रित करने वाले हैं?
 
हमें दो बातों पर ध्यान देना है। पहली, हम व्यक्तिगत दिवालिया के लिए चरणबद्ध तरीके से एक व्यवस्था शुरू करने की सोच रहे हैं। पहले चरण में हम समाधान प्रक्रिया का सामना कर रही कंपनियों की गारंटी देने वाले व्यक्तियों के लिए दिवालिया व्यवस्था लेकर आएंगे। एनसीएलटी के ही इसका निर्धारक प्राधिकरण होने से इसे काफी जल्दी अंजाम दिया जा सकता है। दूसरे चरण में हम उन लोगों के लिए दिवालिया व्यवस्था लेकर आएंगे जो किसी तरह के कारोबार में लगे हुए हैं। 
 
दूसरी, हम कंपनियों के इनसॉल्वेंसी लेनदेन में उनकी मदद करेंगे। अगले कुछ महीनों में कई कर्ज समाधान प्रस्ताव और पूंजीकरण लेनदेन होने की संभावना है लेकिन इस दौरान नियामकीय ढांचे में कुछ खामियां एवं अड़चनें भी आ सकती हैं। हम उन्हें जल्दी से दूर करने की कोशिश करेंगे। अपने दायरे में रहते हुए हम बाजारों के विकास के लिए सहकारी परिवेश को प्रोत्साहन देंगे ताकि अंतरिम वित्त, समाधान योजनाओं और परिसंपत्ति पूंजीकरण हो सके। हम इनसॉल्वेंसी पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के साथ ही उनके आचरण पर भी करीबी नजर रखेंगे। 
Keyword: defaulter, company, law,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 इन्फ्रा के दर्जे से लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.