बिजनेस स्टैंडर्ड - दलहन निर्यात नीति में बदलाव का असर दिखने में लगेगा समय
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, December 14, 2017 02:16 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम निवेश खबर

दलहन निर्यात नीति में बदलाव का असर दिखने में लगेगा समय

अभिषेक वाघमारे /  October 02, 2017

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन द्वारा दलहन के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने के सुझाव के करीब एक साल बाद सरकार ने 10 वर्षों से लगा यह प्रतिबंध 18 सितंबर को खत्म कर दिया। इसके साथ ही वर्ष 2017-18 में अरहर दाल के लिए आयात सीमा 2 लाख टन और उड़द दाल एवं मूंग दाल के लिए संयुक्त रूप से आयात सीमा 3 लाख टन तय की गई है।  इस तरह दालों ने एक लंबा रास्ता तय किया है। पिछले 10 वर्षों से दालों के निर्यात पर रोक थी और आयात शुल्क मुक्त था, लेकिन अब तीन दालों के शुल्क मुक्त निर्यात को मंजूरी दी गई है और दलहन आयात पर 10 फीसदी आयात शुल्क का अंकुश लगा दिया गया है। 

 
निर्यात पर प्रतिबंध लगाने से पहले भारत उड़द, मूंग, मसूर, अरहर और चने सहित विभिन्न दालों का निर्यात करता था। वर्ष 2016-17 में दालों की सबसे ज्यादा उपलब्धता रही, जो 66 लाख टन के  आयात सहित करीब 3 करोड़ टन रही। इसके बाद भारत फिर से दालों का निर्यात करने को तैयार है। देश में दालों की खपत करीब 2.2 करोड़ टन है। इस तरह करीब 80 लाख टन दालों के स्टॉक का अनुमान है। प्रतिबंध हटने के बाद इन शुरुआती 10 दिनों में कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के पास करीब 200 टन दालों के निर्यात के लिए पंजीकरण हुए हैं। फिर से निर्यात शुरू होने पर यहां कुछ ऐसे सवालों पर प्रकाश डालने की कोशिश की गई है, जिन पर तुरंत ध्यान दिए जाने की जरूरत है।  
 
अंतरराष्ट्रीय बाजार 
 
निर्यात पर प्रतिबंध के कारण भारत के दलहन बाजार की पहचान उपभोक्ता बाजार के रूप में बन गई थी, जिसमें आपूर्ति उत्पादन और आयात से हो रही थी। एपीडा के निदेशक ए के गुप्ता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'भारत में दालों की कीमतें घरेलू मांग और आपूर्ति से तय होती थीं और इन पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों का कोई असर नहीं पड़ता था।' लेकिन अब भी भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतें भारतीय दाल कीमतों की चाल चलती हैं। दलहन निर्यात नीति में बदलाव का असर दिखने में समय लगेगा। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष 2015 के अंत तक भारत में कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से नीचे रहती थीं, लेकिन 2015 के सूखे के कारण उत्पादन में भारी कमी आई। इससे घरेलू बाजार में दालों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजारों से ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। तब से भारतीय कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से ऊपर बनी हुई हैं। 
 
निर्यात प्रतिस्पर्धा 
 
भारत में अरहर की दाल की घटती-बढ़ती कीमतों ने 'कॉबवेब मॉडल' का अनुसरण किया है। सूखे और उत्पादकता घटने के कारण उत्पादन में कमी के चलते 2015 में अरहर दाल की कीमतें दोगुनी हो गईं। इससे किसान अगले साल यानी 2016 में अरहर (अन्य दालें भी) की ज्यादा बुआई  को प्रोत्साहित हुए। सितंबर 2015 की तुलना में सितंबर 2016 में अरहर की बुआई 50 फीसदी बढ़ गई, जिससे अरहर की दाल का रिकॉर्ड 48 लाख टन उत्पादन हुआ। उसके अगले साल सितंबर 2016 से सितंबर 2017  के बीच अरहर की थोक कीमत कर्नाटक की गुलबर्गा मंडी में 33 फीसदी गिरकर 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई। वहीं मुंबई में अरहर दाल के दाम 34 फीसदी गिरे, जो 115 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 75 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए। 
 
वहीं दुनिया के शीर्ष ऑइनलाइन मार्केटप्लेस अलीबाबा डॉट कॉम पर अरहर की दाल के थोक दाम 250 से 400 डॉलर प्रति टन यानी 16 से 26 रुपये प्रति किलोग्राम हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार एजेंसियों के भाव भी भारतीय दाल की कीमतों से कम हैं। इंडिया इंफोलाइन के आंकड़े बताते हैं कि तंजानिया के मूंग के दाम 4,100 रुपये प्रति क्विंटल हैं। मार्केटऑनमोबाइल पर मलावी की तुअर दाल के दाम 3,300 रुपये प्रति क्विंटल हैं।  भारत में अप्रैल-जून 2017 में आयातित अरहर की दाल के औसत दाम 40 रुपये प्रति किलोग्राम थे, जो अप्रैल-जून 2016 के दौरान 82 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में आधे हैं। कुछ सूत्रों के मुताबिक कनाडा में मसूर और मटर का उत्पादन बढ़ा है और रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया गया है। भारत इस सीजन (2017-18) में म्यांमार से आयात नहीं करेगा क्योंकि आयात की सीमा तय कर दी गई है और कर लगा दिया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में म्यांमार की दाल के दाम कम रहेंगे। अफ्रीका में भी दालों का उत्पादन 10 फीसदी बढ़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों की अति आपूर्ति की स्थिति पैदा हो गई है। इस तरह भले ही देश में किसानों को अपनी दालों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम मिल रहे हों, लेकिन भारतीय दाल की कीमतें (कम से कम अरहर के मामले में) निर्यात के लिए अभी भी प्रतिस्पर्धा से बाहर हैं। 
 
लेकिन दाल मूल्य शृंखला के प्रतिनिधियों के मुताबिक पूरी उम्मीदें खत्म नहीं हुई हैं। इंडिया पल्सेज ऐंड ग्रेन्स एसोसिएशन के चेयरमैन प्रवीण डोंगरे ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, 'यह सरकार का सोच-समझकर लिया गया फैसला है, जिससे कीमतों का निर्धारण ज्यादा पारदर्शी बनेगा। तुरंत कोई करिश्मा होने की उम्मीद नहीं है, लेकिन अगले करीब छह महीनों में निर्यात मूल्य शृंखला स्थापित होने की संभावना है क्योंकि अपनी अच्छी गुणवत्ता के कारण भारतीय दालों की ऊंची कीमत मिलती है।'
 
निर्यात की मंजूरी 
 
निर्यात केवल तीन दालों- अरहर दाल, उड़द दाल और मूंग के लिए खोला गया है। मसूर दाल और चना दाल को इसमें शामिल नहीं किया गया है। एक पुराने दलहन निर्यातक और जलगांव दाल मिल मालिक संघ के चेयरमैन प्रेम कोगटा ने कहा, 'हालांकि यह (निर्यात को मंजूरी) अच्छा कदम है, लेकिन सभी दालों को निर्यात की मंजूरी दी जानी चाहिए थी क्योंकि अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय खरीदार एक साथ सभी दालों के ऑर्डर देते हैं।'
 
मुंबई के एक पूर्व निर्यातक मयूर सोनी ने इस फैसले को लेकर उम्मीद नहीं जताई। उन्होंने कहा, 'वर्तमान कीमतों पर निर्यात करना महंगा पड़ेगा। इस समय अफ्रीकी देशों और म्यांमार की दाल सस्ती है और परिवहन और बंदरगाह पर भंडारण जैसी ऊपरी लागतें लाभ मार्जिन घटा देती हैं।' निर्यातकों ने चिंता जताई कि आगामी वर्षों में सूखे और उसके बाद कम उत्पादन के कारण सरकार पर्याप्त उपलब्धता के लिए निर्यात पर रोक लगाकर आयात को मंजूरी दे सकती है। एक अन्य निर्यातक ने कहा, 'हम निर्यात अनुबंधों में फेरबदल नहीं कर सकते। अगर निर्यात बंद कर दिया जाएगा तो क्या होगा?'
Keyword: agri, farmer, pulses,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बिटकॉइन को मिलनी चाहिए कानूनी वैधता?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.