बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी अनुपालन में मामूली गिरावट
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जीएसटी अनुपालन में मामूली गिरावट

ईशान बख्शी /  October 01, 2017

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत प्राप्त राजस्व के बारे में वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़े बताते हैं कि सितंबर महीने में 25 तारीख तक जीएसटीआर 3बी के 37.6 लाख रिटर्न भरे गए हैं जबकि 29 अगस्त तक 38.3 लाख रिटर्न जमा किए गए थे। हालांकि इस अवधि में पंजीकृत अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या 59.6 लाख से बढ़कर 68.2 लाख हो गई है। इसका मतलब है कि जहां अगस्त के महीने में 64.4 फीसदी पंजीकृत करदाताओं ने रिटर्न जमा किए वहीं सितंबर में यह आंकड़ा खिसक कर 55.2 फीसदी पर आ गया। पंजीकृत करदाताओं की तरफ से रिटर्न जमा करने की दर में आई गिरावट ने इस नई कर प्रणाली के ढांचे को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 

 
जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) से मिले आंकड़े बताते हैं कि 25 सितंबर तक वास्तव में 38.2 लाख रिटर्न भरे गए थे। जबकि पहले यही बताया गया था कि 37.6 लाख रिटर्न भरे गए हैं। जीएसटीएन के आंकड़ों और वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों में फर्क की वजह यह है कि मंत्रालय ने 25 सितंबर की शाम छह बजे तक के ही आंकड़े लिए थे। उस दिन आधी रात तक रिटर्न का आंकड़ा बढ़कर 38.2 लाख पर पहुंच गया। वहीं 27 सितंबर तक 3बी रिटर्न जमा की संख्या 40.8 लाख पहुंच गई थी जबकि अगस्त में इस तारीख तक 36.3 लाख रिटर्न जमा किए गए थे। इसका मतलब है कि जीएसटी के अनुपालन में उतनी गिरावट नहीं आई है जितना पहले अनुमान लगाया जा रहा था। अगस्त में कुल पंजीकृत कारोबारियों में से 60.9 फीसदी ने रिटर्न जमा किया था जबकि सितंबर में 59.9 फीसदी रिटर्न जमा हुए हैं। 
 
अनुपालन स्तर में आई आंशिक गिरावट की कई तरह से व्याख्या की जा रही है। खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अभिषेक रस्तोगी कहते हैं, 'जुलाई में बहुत सारे कारोबारी खुदबखुद जीएसटी प्रणाली का हिस्सा बन गए। लेकिन प्रकाशकोंऔर वकीलों को इसकी जरूरत नहीं थी। उन्हें या तो जीएसटी से छूट मिली हुई है या उन्हें इसके अनुपालन की जरूरत ही नहीं है। ऐसे में अनुपालन स्तर में आ रही गिरावट की वजह ऐसे पेशेवरों का जीएसटी प्रणाली से अलगाव भी हो सकती है। इसके अलावा कारोबारी और एमएसएमई ने भी दिक्कतों को देखते हुए जीएसटी से फौरी तौर पर किनारा कर लिया है।' जीएसटी से संबंधित दस्तावेज भरने में मदद कर रहे सुविधा प्रदाताओं ने भी बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में इस पर मुहर लगाई। जीएसटीस्टार के शैलेश अग्रवाल कहते हैं, 'जीएसटी के आने के बाद से ही सरकार एसएमई को शिक्षित करने के लिए कई अभियान चला रही है। 
 
इसके बाद भी इन कारोबारियों को बिक्री और खरीद के कागजात रखने के तरीकों जैसे बुनियादी मसलों पर जागरूक करने में अभी लंबा वक्त लगेगा।' उनका कहना है कि जीएसटीएन पर शुरुआत में आई तकनीकी दिक्कतों की वजह से लेनदेन बढ़ गए। इसी तरह जीएसटी सिस्टम की अनुपलब्धता भी जीएसटी प्रावधानों के अनुपालन को कठिन बना रही है। स्पाइस डिजिटल के वैश्विक सीईओ साकेत अग्रवाल भी मानते हैं कि अपेक्षाकृत नई प्रणाली होने से समस्याएं आनी लाजिमी हैं लेकिन समय के साथ लोग इसके अभ्यस्त हो जाएंगे। अग्रवाल कहते हैं, 'सरकार भी हालात की जटिलता को समझ रही है और उस पर काफी सदाशयी रुख अपना रही है। करदाताओं की सुविधा के लिए कई बार तारीखें भी बढ़ाई गई हैं।' हालांकि मौजूदा हालात के लिए कुछ अन्य व्याख्याएं भी हैं। एक सलाहकार फर्म के अप्रत्यक्ष कर विशेषज्ञ कहते हैं, 'यह संभव है कि कुछ मामलों में रिटर्न जमा करने में असली गड़बडिय़ां हुईं। कुछ समस्याएं तो सिस्टम के चलते भी थीं। इसकी भी संभावना है कि अंतिम तारीख बढऩे का इंतजार करने से समस्याएं खड़ी हुईं।' विशेषज्ञों ने यह उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में हालात स्थिर हो जाएंगे। रस्तोगी ने कहा, 'मुझे लगता है कि सिस्टम स्थिर होने के साथ ही अनुपालन का अनुपात भी बढ़ेगा।' 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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