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बाजार कितना ही गिरे एसआईपी चलाते रहें

जयदीप घोष और संजय सिंह /  October 01, 2017

पहले जब भी बाजार में तेजी आती थी तो पेशे से उद्यमी विशाल उपाध्याय सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) शुरू करने के लिए गिरावट का इंतजार करते थे। इस तरह उन्होंने अच्छी खासी रकम कमाई। एसआईपी का बुनियादी नियम यही है कि जब बाजार लुढ़के तो उसी रकम में ज्यादा ज्यादा म्युचुअल फंड यूनिट खरीद ली जाएं। इस नियम पर चलकर उपाध्याय ने बढिय़ा मुनाफा कमाया। लेकिन इस बार खरीदने के सही वक्त (तगड़ी गिरावट) का इंतजार करने के बाद आखिरकर उन्होंने तीन एसआईपी शुरू कर ही दिए। उनमें से एक लार्ज-कैप फंड है और बाकी दोनों मिड-कैप योजना हैं।

 
और केवल उपाध्याय ने ही एसआईपी शुरू नहीं किया है। इस समय इसी का बोलबाला लग रहा है। भारत में म्युचुअल फंडों के संगठन एम्फी के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में म्युचुअल फंड उद्योग में लगभग 1.6 करोड़ एसआईपी खाते जुड़े और निवेश का आंकड़ा 5,200 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो पिछले साल अगस्त की तुलना में 49 फीसदी तक अधिक है। रिलायंस निप्पॉन लाइफ ऐसेट मैनेजमेंट के मुख्य कार्याधिकारी एवं कार्यकारी निदेशक संदीप सिक्का कहते हैं, 'एसआईपी खासे सरल होते हैं और इनमें निवेश करने वाले को बाजार में उतारचढ़ाव की बहुत चिंता नहीं करनी पड़ती। इसी कारण बड़ी तादाद में निवेश इसे अपनाते हैं।' एसआईपी में तेजी बाजार में बढ़ोतरी के साथ ही आई है। बेशक इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि निवेशकों में अधिक उत्साह इसीलिए है क्योंकि निफ्टी 50 सूचकांक 10,000 छू चुका है और पिछले एक साल में करीब 12.4 फीसदी चढ़ा है।
 
अच्छी खबर, मगर
 
जिन निवेशकों ने पिछले दो वर्षों में एसआईपी शुरू किए हैं, उन्होंने तो रकम बना ही ली होगी। पिछले एक साल में कई लार्ज-कैप योजनाओं ने शानदार प्रतिफल दिया है। आईडीएफसी फोकस्ड इक्विटी फंड (रेग्युलर) ने 33.73 फीसदी और जेएम मल्टी-स्ट्रेटेजी फंड ने 27.22 फीसदी प्रतिफल दिया और तमाम दूसरे फंडों का प्रतिफल भी 20 फीसदी से अधिक रहा। कई निवेशकों खासकर नए निवेशकों को शेयर बाजार में निवेश से अच्छा अनुभव मिला होगा। यह जरूरी भी है क्योंकि दूसरे निवेश विकल्प अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। छोटी बचत योजनाओं की दरें नीचे आ रही हैं, सोने का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा है और रेरा तथा जीएसटी लागू होने के बाद से रियल एस्टेट क्षेत्र को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
निवेशक ऐसे समय में बाजार में प्रवेश कर रहे हैं, जब मूल्यांकन महंगा चल रहा है। अगले साल भर में बाजार में किसी भी तरह की गिरावट आई तो एसआईपी का प्रतिफल नकारात्मक हो सकता है। उस वक्त खास तौर पर इसमें निवेश बनाए रखने की जरूरत होगी। 
 
मिंटवॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी कहते हैं, 'एसआईपी के साथ हमेशा दीर्घावधि लक्ष्य रखें और पूरी अवधि तक इसे बरकरार रखें। बीच में बाजार में चाहे कितनी भी गिरावट हो, आपको अपना एसआईपी बंद नहीं करना चाहिए।' निवेशकों को अपने निवेश पर अच्छा प्रतिफल हासिल करने के लिए बाजार में मंदी के दौर में भी एसआईपी चलाते रहना चाहिए। अगर वे उस वक्त एसआईपी बंद कर देते हैं तो उन्हें नकारात्मक प्रतिफल झेलना पड़ सकता है। लेकिन दिक्कत यह है कि कई निवेशक सेक्टर फंड और स्मॉल-कैप फंड में निवेश के लिए एसआईपी का रास्ता पकड़ रहे हैं। 
 
क्लियरफंड्ïस डॉटकॉम के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी कुणाल बजाज कहते हैं, 'इस समय लोग स्मॉल-कैप फंडों और बैंकिंग जैसे सेक्टर फंडों में एसआईपी ज्यादा ले रहे हैं। यदि आप ऐसे फंडों में निवेश करते हैं तो जोखिम बहुत ज्यादा होगा और एसआईपी उस जोखिम से आपको पूरी तरह बचा नहीं पाएगा। आपके लिए डाइवर्सिफाइड फंडों में निवेश करना बेहतर है।'
 
चलाते रहें एसआईपी
 
एसआईपी की परिभाषा तो यही कहती है कि यह एक निश्चित अवधि तक नियमित अंतराल (मान लीजिए हर महीने) तक तय धनराशि निवेश करने का जरिया है। ऐसी सूरत में निवेशक को उस समय योजना के अधिक यूनिट मिल जाते हैं, जब भाव नीचे रहता है। जब भाव चढ़ता है तो कम यूनिट हासिल होते हैं। कुल मिलाकर अच्छी औसत कीमत निवेश के हाथ लग जाती है। इसी से उसे दीर्घावधि में आकर्षक दर से प्रतिफल हासिल करने में मदद मिलती है। यही वजह है कि दीर्घावधि का नजरिया अपनाना एसआईपी निवेशकों के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है। 
 
सिक्का का कहना है कि एसआईपी के जरिये एमएफ योजना में निवेश से पहले योजना और ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के प्रदर्शन पर गौर करना जरूरी है। इस तरह के आकलन को सिर्फ अल्पावधि प्रदर्शन के अलावा विभिन्न बाजार चक्रों में फंड द्वारा किए गए प्रदर्शन पर विचार करना चाहिए। चूंकि एसआईपी दीर्घावधि निवेश योजनाएं हैं, इसलिए सही फंड हाउस का चयन करना बेहद जरूरी है। ऐसी कई योजनाएं मौजूद हैं जो बाजार में तेजी के वक्त आकर्षक प्रतिफल मुहैया कराती हैं। लेकिन जब बाजार गिरता है तो इन योजनाओं में भी तेज गिरावट आती है। सिक्का कहते हैं, 'निवेशक को बाजार में उतार-चढ़ाव की परवाह किए बगैर एसआईपी के जरिये बाजार में निवेश बरकरार रखना चाहिए।'
 
मिंटवॉक ने 1 जनवरी, 1995 से 31 दिसंबर 2016 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। मान लीजिए कि आपने इस अवधि के दौरान किसी तारीख पर निफ्टी सूचकांक में एसआईपी शुरू किया। यदि आपका एसआईपी एक साल के लिए है, तो इसमें आपको रकम गंवाने की 28 फीसदी आशंका रहेगी। लेकिन यदि आपने एसआईपी की अवधि बढ़ाकर 3 वर्ष की है तो खराब प्रतिफल हासिल होने की आशंका घटकर 5 फीसदी रह जाएगी। 10 वर्षीय अवधि के दौरान (चाहे आपने किसी भी दिन निवेश किया हो) आपको मुनाफा हासिल होगा। मिंटवॉक के सह-संस्थापक निखिल बनर्जी ने कहा, 'अच्छा प्रतिफल हासिल होने की संभावना एसआईपी की अवधि के साथ बढ़ जाती है।'
 
एकमुश्त निवेश
 
इस सवाल पर बहस चलती ही रहती है। निवेशक एकमुश्त निवेश के जरिये अधिक रकम कमाने में सफल होगा या एसआईपी विकल्प के जरिये? बजाज का कहना है, 'लगातार तेजी से बढ़ रहे बाजार में एसआईपी प्रतिफल एकमुश्त निवेश के प्रतिफल की तुलना में पिछड़ जाता है। यदि बाजार लगातार ऊपर जाता है, जैसा कि इस साल देखने को मिला है तो आप उस अवधि के शुरू में एकमुश्त निवेश कर बेहतर स्थिति में होंगे।' लेकिन यदि बाजार करीब 10 फीसदी गिरता है तो एकमुश्त निवेश करने वाले को तगड़ा झटका लगेगा और उसका इस साल अब तक का प्रतिफल (21.7 प्रतिशत) कम हो जाएगा। एकमुश्त निवेश का विकल्प तब अच्छा रहता है, जब आपको कहीं से बोनस या कोई और रकम मिली हो। लेकिन निवेश तभी करें, जब मूल्यांकन सही हो और निवेश की अवधि पांच साल से अधिक की हो।
 
एसआईपी अक्सर उन निवेशकों के लिए फायदेमंद समझे जाते हैं जो लंबी अवधि के लिए बचत करना चाहते हैं, जैसे बच्चे की शिक्षा, मकान की खरीदारी या सेवानिवृति आदि के लिए। इसलिए जरूरी जांच-पड़ताल कर लें, जल्दबाजी न दिखाएं और खराब समय के वक्त भी निवेश बनाए रखें। अगर आप ऐसा नहीं करते तो बाजार की ऊंचाई के वक्त शुरू किया गया एसआईपी भी बेकार ही साबित होता है।
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