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विकास को धार देगी टीम मोदी, आर्थिक सलाहकार परिषद का गठन

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली 09 25, 2017

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की तैयारी

► विवेक देवराय के नेतृत्व में बनाई परिषद
सुरजीत भल्ला, रथिन रॉय और आशिमा गोयल होंगे सदस्य
पूर्व वित्त सचिव रतन वाटल होंगे सदस्य सचिव

नीति आयोग के सदस्य विवेक देवराय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के मुखिया होंगे। उनका काम वही होगा जो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सी रंगराजन का था। सरकार ने देवराय के नेतृत्व में ऐसे समय में परिषद बनाई है जब अर्थव्यवस्था के प्रमुख संकेतों में कमजोरी के लक्षण दिख रहे हैं। यह परिषद पिछली सरकार की परिषद से नाम के लिहाज से अलग है।

साथ ही इसमें 3 प्रमुख अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला, रथिन रॉय और आशिमा गोयल अंशकालिक सदस्य होंगे। पूर्व वित्त सचिव रतन वाटल परिषद के सदस्य सचिव होंगे। वाटल इससे पहले नीति आयोग में प्रमुख सलाहकार थे। परिषद का काम प्रधानमंत्री द्वारा भेजे गए किसी भी आर्थिक या दूसरे मसले का विश्लेषण करना और उनको सलाह देना होगा। परिषद अर्थव्यवस्था के महत्व से जुड़े मसलों पर मंथन करेगी और अपने विचारों से प्रधानमंत्री को अवगत कराएगी।

परिषद का गठन ऐसे समय किया गया है जब देश की अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी की दर चिंता का विषय बनी हुई है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह अपने सबसे निचले स्तर 5.7 फीसदी पर आ गई है। देश का चालू खाते का घाटा भी 4 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। अप्रैल-जून तिमाही में यह बढ़कर जीडीपी का 2.4 फीसदी हो गया जबकि इससे पहले की तिमाही में यह 0.6 फीसदी था। एक साल पहले यही घाटा 0.1 प्रतिशत था। सरकार अर्थव्यवस्था में तेजी लाने और रोजगार बढ़ाने के लिए विभिन्न विकल्प तलाश रही है। लेकिन उसके वित्तीय संसाधन भी चुनौतीपूर्ण हैं। केंद्र का राजकोषीय घाटा महज 4 महीने में बजट अनुमान 92 फीसदी तक पहुंच गया है। ऐसे में देवराय और उनकी टीम को अर्थव्यवस्था को नई शक्ल देने के लिए कुछ नए विचार प्रधानमंत्री के सामने पेश करने होंगे।

मनमोहन सिंह सरकार भी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आकलन के लिए रंगराजन पर निर्भर थी। उनको अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली लगभग हर चुनौती के बारे में सलाह देने के लिए अध्यक्ष बनाया गया था। फिर चाहे यह चुनौती खाद्य सुरक्षा विधेयक के रूप में हो या गैस कीमत के फॉर्मूले या फिर चीनी मूल्य को लेकर हो। अब देखना यह है कि मोदी के सलाहकार के रूप में देवराय कितनी अहम भूमिका निभाते हैं।

नीति आयोग के सदस्य के रूप में देवराय ने भारतीय रेलवे में आमूलचूल बदलाव लाने में महत्त्वपूर्ण काम किया है। देवराय समिति की सिफारिशों पर ही केंद्र सरकार ने अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही अलग रेल बजट की व्यवस्था खत्म की और इसे आम बजट में शामिल किया। 

अप्रैल से मार्च के मौजूदा वित्त वर्ष को जनवरी से दिसंबर करने पर भी सरकार विचार कर रही है। भारतीय रेलवे के पुनर्गठन पर उनके नेतृत्व में बनी समिति ने रेलवे में उदारीकरण की सिफारिश की है जिससे कि परियोजनाओं को पूरी करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को आकर्षित किया जा सके। उन्होंने प्रतिस्पद्र्घा को बढ़ावा देने के लिए स्वतंत्र नियामक का भी सुझाव दिया। देवराय लंबे समय से इस बात की पैरवी करते रहे हैं कि बड़े राज्यों में विभागों की संख्या कम करके 30 कर दी जाए। उनकी राय में इससे बेहतर तालमेल, शासन और दक्षता सुनिश्चित होगी। 

विवेक देवराय: प्रेसिडेंसी कॉलेज (कलकत्ता), दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स और ट्रिनिटी कॉलेज (कैंब्रिज) में शिक्षित देवराय ने प्रेसिडेंसी कॉलेज से शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया। बाद में वह पुणे के गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स ऐंड इकनॉमिक्स में चले गए। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड और राष्ट्रीय व्यावहारिक आर्थिक अनुसंधान परिषद में भी काम किया। वे वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों में विभाग में सलाहकार भी रहे।

सुरजीत भल्ला: नई दिल्ली की आर्थिक शोध, परिसंपत्ति प्रबंधन और उभरते बाजारों की सलाहकार कंपनी ऑक्सस रिसर्च ऐंड इन्वेस्टमेंट के प्रबंध निदेशक हैं। उन्होंने पहले दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स में पढ़ाने के साथ ही रैंड कॉरपोरेशन, ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन और विश्व बैंक के शोध एवं ट्रेजरी विभाग में काम किया है। उन्होंने गोल्डमैन सैक्स (1992-94) और डॉयचे बैंक (1994-96) में भी काम किया है। 

रथिन रॉय: राष्ट्रीय लोक वित्त और नीति संस्थान के निदेशक हैं। उन्होंने 13वें वित्त आयोग में आर्थिक सलाहकार और सातवें केंद्रीय वेतन आयोग से संबद्ध थे। वह पूर्व नौकरशाह एन के सिंह की अध्यक्षता वाले एफआरबीएम पैनल के भी एक सदस्य भी थे। 

आशिमा गोयल: मुंबई के आईजीआईडीआर की प्रोफेसर हैं। वह अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी में इकॉनमिक ग्रोथ सेंटर में विजिटिंग फेलो और अमेरिका की क्लेयरमॉन्ट ग्रैजुएट यूनिवर्सिटी में फुलब्राइट सीनियर रिसर्च फेलो रही हैं। रतन वाटल: आंध्र प्रदेश काडर के 1978 बैच के आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने वित्त सचिव और व्यय सचिव के तौर पर काम किया है। उन्होंने डिजिटल भुगतान से जुड़ी एक समिति की अध्यक्षता की है।
Keyword: अर्थव्यवस्था, विवेक देवराय, आशिमा गोयल, नीति आयोग, आर्थिक सलाहकार परिषद,
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