बिजनेस स्टैंडर्ड - मुखौटा कंपनियों पर कार्रवाई से कारोबार होगा आसान : पी पी चौधरी
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मुखौटा कंपनियों पर कार्रवाई से कारोबार होगा आसान : पी पी चौधरी

वीणा मणि और इंदिवजल धस्माना /  09 24, 2017

बीएस बातचीत

हाल में कंपनी मामलों की कमान संभालने वाले राज्य मंत्री पीपी चौधरी मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई का समन्वय और उनकी निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने वीणा मणि और इंदिवजल धस्माना को बताया कि सरकार यह पता लगा रही है कि जिन 2.09 लाख कंपनियों ने वित्तीय ब्योरा दाखिल नहीं किया है, उनसे किनको फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि कई मामले ऐसे भी हो सकते हैं, जहां नौकरों को निदेशक मंडल में शामिल किया गया है। मुख्य अंश:

इस सरकार ने मुखौटा कंपनियों के खिलाफ पिछली सरकार से ज्यादा बड़े स्तर पर अभियान छेड़ा है। क्यों?

सरकार इस बात से चिंतित थी कि कुछ बेईमान लोग कंपनी व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि किसी को भी इसका दुरुपयोग नहीं करने देना चाहिए और मुखौटा कंपनियों को पहचानने तथा खत्म करने के लिए हरसंभव कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कंपनी मामलों के विभाग और राजस्व विभाग के सचिवों को अगुआई में एक कार्यबल गठित किया। इसे मुखौटा कंपनियों पर नजर रखने और उनके खिलाफ कार्रवाई के तरीके सुझाने की जिम्मेदारी दी गई। हालांकि मुखौटा कंपनी की कोई औपचारिक परिभाषा नहीं है, लेकिन उस कंपनी को मुखौटा कंपनी कहा जा सकता है, जो कारोबार नहीं करती और उसका इस्तेमाल पैसे की हेराफेरी के लिए किया जाता है या भविष्य में किसी और इस्तेमाल के लिए उसे निष्क्रिय रखा जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारा मंत्रालय दूसरे विभागों के साथ मिलकर ऐसी कंपनियों संदिग्ध कंपनियों को पहचान रहा है ताकि उनके खिलाफ कंपनी कानून के तहत कार्रवाई की जा सके।

मुखौटा कंपनियों की समस्या कितनी गंभीर है? क्या अर्थव्यवस्था में ये बुरी तरह फैली हुई हैं?

कंपनी पंजीयक के पास 16 लाख कंपनियां पंजीकृत हैं। इनमें से केवल 11 लाख कंपनियां ही सक्रिय हैं। कुछ सीमित जवाबदेही के साथ साझेदारी (एलएलपी) वाली हैं। बाकी कंपनियां ऐसी हैं जो कानून का पालन नहीं कर रही हैं। वे कंपनी कानून के तहत काम नहीं कर रही हैं। ये कंपनियां काले धन को सफेद बनाने और आतंकवादियों की वित्तीय मदद करने में लिप्त हो सकती हैं। हमने 2.90 लाख कंपनियों को नोटिस भेजे थे। उनमें से 60,000 ने नोटिस के मुताबिक हमें जानकारी दे दी और अपना वित्तीय ब्योरा दाखिल कर दिया। 2.09 लाख कंपनियों ने जवाब नहीं दिए, इसलिए उनका पंजीकरण खत्म कर दिया गया। उनके निदेशक किसी दूसरी कंपनी में भी निदेशक नहीं बन सकते।

मुखौटा कंपनियों से निपटने के लिए और कौन से उपाय किए जा रहे हैं?

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से कहा गया है कि किसी भी कंपनी का चेक क्लियर करने से पहले कंपनी मामलों के मंत्रालय से यह जरूर पता कर लें कि कंपनी सक्रिय है या नहीं। हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन कंपनियों से किसको फायदा पहुंचा है। इसके लिए कई तरह की जानकारी खंगाली जा रही है।

किस तरह की जानकारी खंगाली जा रही है?

कुछ अच्छी कंपनियां भी हो सकती हैं। हम उन्हें परेशान नहीं करना चाहते हैं। इसीलिए कंपनियों और उनके वित्तीय लेनदेन का पता लगाने के लिए हम कृत्रिम बुद्घिमत्ता का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं। हो सकता है कि एक ही जगह से 400 कंपनियां काम कर रही हों। हम ऐसी कंपनियों की जांच कर रहे हैं और उनके बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। जिन निदेशकों को हमने पहचाना है, उन पर पाबंदी लगा दी है। अब हम देख रहे हैं कि कंपनियों के साथ उनके क्या संबंध हैं। क्या वे दूसरी कंपनियों का अंग हैं? कुछ मामलों में नौकर भी निदेशक मंडल के सदस्य हो सकते हैं।

क्या मुखौटा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई से कारोबारियों के बीच डर का माहौल नहीं बनेगा?

नहीं ऐसा नहीं है। केवल मुखौटा कंपनियों में शामिल लोगों को डरने की जरूरत है। बल्कि इस तरह की कार्रवाई से कारोबार करना और आसान होगा।

मुखौटा कंपनियों में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट, कॉस्ट अकाउंटेंट और कंपनी सचिवों के खिलाफ संबंधित संस्थानों द्वारा की जा रही कार्रवाई की निगरानी आप किस तरह कर रहे हैं?

सबसे पहले चार्टर्ड अकाउंटेंटों पर नजर रखना सबसे जरूरी है क्योंकि कंपनियों का वित्तीय लेखाजोखा वे ही देखते हैं। आईसीएआई से समय-समय पर जानकारी ली जा रही है कि सरकारी एजेंसियों की शिकायतों पर उसने चार्टर्ड अकाउंटेंटों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। साथ ही समय-समय पर समीक्षा बैठकें भी हो रही हैं।

मुखौटा कंपनियों पर शिकंजा कसने के लिए किसी कंपनी की सहयोगी कंपनियों की संख्या सीमित करने की भी योजना बनाई जा रही थी। ऐसा कब तक होगा?

इस बारे में राज्य सभा में विधेयक पेश किया जाएगा। इस कदम का मकसद भी काले धन की समस्या को खत्म करना है। कंपनी की सहयोगी कंपनियों की संख्या सीमित करने से इनका इस्तेमाल धन शोधन, पैसों के गबन और दूसरी अवैध गतिविधियों में नहीं हो सकेगा और कंपनियां केवल वैध तरीके से काम कर पाएंगी। इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि वास्तविक कारोबारियों पर कोई असर न पड़े।

राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) और राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय पंचाट (एनसीएलएटी) में काम का बोझ बढ़ रहा है। इन पंचाटों के संसाधन बढ़ाने के लिए सरकार क्या योजना बना रही है?

16 सदस्यों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। 62 मंजूर पदों में से 22 पर नियुक्तियां की जा चुकी हैं। ई-अदालतें बनाने की राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) की योजना को मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। साथ ही दूसरे कई उपाय भी किए जा रहे हैं।

व्यक्तिगत दिवालिया कानून के प्रावधानों को अधिसूचित करने के बारे में कितनी प्रगति हुई है?

भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड ने इन प्रावधानों का लागू करने की रणनीति सुझाने के लिए एक कार्य दल का गठन किया है। इस कार्य दल ने अपनी सिफारिशें सौंप दी हैं। वित्तीय सेवा विभाग को भी ऋण वसूली पंचाटों को मजबूत करने को कहा गया है।
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