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रोजगार संग अर्थव्यवस्था को रफ्तार की तैयारी

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 09 24, 2017

प्रोत्साहन के उपाय

► मनरेगा से पैदा होंगे रोजगार के अवसर
महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ऋण प्रावधान बढ़ाने पर विचार
हाउसिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने की है योजना
शहरी इलाकों के आसपास के गांवों में सस्ते मकान की अनुमति संभव

अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए केंद्र सरकार मनरेगा, आवास एवं स्वयं सहायता समूहों जैसे सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं पर जोर देने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार इनके सहारे कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाना चाहती है। हालांकि यह भी तय माना जा सकता है कि सभी उपाय एकबारगी नहीं होंगे। अधिकारियों का कहना है कि इन योजनाओं को गति देने से देश में, खासकर, सुदूर क्षेत्रों में आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि इससे खपत में भी इजाफा होगा। अधिकारियों ने कहा कि मनरेगा कार्यक्रम के तहत व्यय बढ़ाकर मांग में तेजी लाई जा सकती है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अतिरिक्त बजटीय समर्थन के रूप में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 17,000 करोड़ रुपये (कुल बजटीय प्रावधान 48,000 करोड़ रुपये के अलावा) की मांग की है। मंत्रालय इस रकम का इस्तेमाल अतिरिक्त लोगों को रोजगार देने के साथ ही काम के दिन बढ़ाने में करेगा। इसके लिए अतिरिक्त रकम की भी आवश्यता होगी क्योंकि बजट में जितनी रकम का प्रावधान किया गया है, वह 30 सितंबर तक समाप्त हो जाएगी।

देश में मॉनसूनी बारिश एक समान नहीं रहने से विभिन्न हिस्सों में लोगों के लिए अतिरिक्त कार्यदिवस की जरूरत पड़ सकती है, जिसके लिए अधिक राशि की दरकार होगी। वित्त वर्ष 2018 की पहली तिमाही में आर्थिक विकास दर कम होकर 5.7 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों के लिए ऋण प्रावधान बढ़ाना चाहती है। इससे रोजगार के अवसर सृजित करने में आसानी होगी। वित्त वर्ष 2016-17 में इन समूहों के लिए 42,000 करोड़ रु पये के ऋण प्रावधान किए गए थे। केंद्र 2017-18 में इसे बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करना चाहता है।     

2018-19 तक 60,000 करोड़ रुपये से अधिक का संस्थागत ऋण मुहैया करने का लक्ष्य है, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि यह लक्ष्य आसानी से पार हो सकता है क्योंकि शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में स्व-रोजगार के अवसरों की मांग बढ़ रही है। एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'एक अच्छी बात यह है कि बड़ी कंपनियों के मुकाबले इन समूहों को कर्ज के रूप में दी गई रकम नहीं लौटने का जोखिम कम होता है।'

सरकार का तीसरा और महत्त्वपूर्ण लक्ष्य आवास क्षेत्र में तेजी लाना है। प्रधानमंत्री आवास योजना योजना (ग्रामीण) के तहत सरकार मार्च 2019 तक एक करोड़ मकान बनाना चाहती है। हालांकि पिछले कुछ महीनों में इस दिशा में गतिविधियां तेज हुईं हैं, जिससे सरकार को दिसंबर 2018 तक ही यह लक्ष्य पूरा हो जाने की उम्मीद है। एक दूसरे अधिकारी ने कहा, 'सरकार कोई अतिरिक्त लक्ष्य पूरा करने के लिए भी कमर कस चुकी है क्योंकि आवास निर्माण की रफ्तार तेज हुई है।'उन्होंने कहा कि सरकार आवास निर्माण का लक्ष्य 25 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है, जिससे लोगों के लिए रोजगार के अधिक अवसर मौजूद होंगे। सरकार ने 2022 तक ग्रामीण क्षेत्रों में 2.07 करोड़ मकान बनाने का दीर्घकालीन लक्ष्य तय किया है।

ग्रामीण आवास योजना के लिए 2017-18 में करीब 23,000 करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ है, जिसका करीब 80 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर तक समाप्त हो जाएगा। लक्ष्य बढऩे के साथ ही अतिरिक्त रकम की जरूरत भी होगी। वैसे ग्रामीण आवास कार्यक्रम के मद में रकम जुटाने के लिए सरकार के पास नाबार्ड से 10,000 करोड़ रुपये लेने का विकल्प मौजूद है, लेकिन बजटीय समर्थन के जरिये ऐसा करना अपेक्षाकृत आसान है। सरकार शहरी क्षेत्रों से सटे ग्रामीण इलाकों में भी सस्ते आवास बनाने की इजाजत देने पर विचार कर रही है।

Keyword: मनरेगा, रोजगार, महिला, स्वयं सहायता समूह, ऋण, मकान, ग्रामीण, आर्थिक विकास,
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