बिजनेस स्टैंडर्ड - नकदी फूंकना पुराने जमाने की बात : कल्याण कृष्णमूर्ति
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नकदी फूंकना पुराने जमाने की बात : कल्याण कृष्णमूर्ति

अलनूर पीरमोहम्मद और रघु कृष्णन /  09 25, 2017

बीएस बातचीत
फ्लिपकार्ट ने नियमित खरीदारी को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। फ्लिपकार्ट के मुख्य कार्याधिकारी कल्याण कृष्णमूर्ति ने अलनूर पीरमोहम्मद और रघु कृष्णन के साथ बातचीत में कहा कि कंपनी ने नकदी फूंके बिना आगे बढ़ने के मॉडल को तलाश लिया है। पेश है बातचीत के मुख्य अंश :

बेचे गए कुल सामान के मूल्य के लिहाज से देखा जाए तो बिग बिलियन डेज के दौरान फ्लिपकार्ट का प्रदर्शन कैसा रहा?
हम संख्या पर नहीं जाना चाहते हैं लेकिन हम एक त्रिकोणीय बाजार बनाने में सफल रहे। इन 5 दिनों में दौरान हुए कारोबार में हमारी 70 फीसदी हिस्सेदारी रही लेकिन यह केवल बीबीडी तक ही सीमित नहीं है। हम इसे अगले 30 दिन तक जारी रखना चाहते हैं और फिर पूरे साल इसे चलाना चाहते हैं। जहां तक कंपनी की बढ़ोतरी की सवाल है कि तो हमने अपने लेनदेन की संख्या करीब दोगुनी कर ली है।

बिग बिलियन डेज के दौरान अमूमन कंपनी का सबसे ज्यादा जोर उन उपभोक्ताओं को अपने प्लेटफॉर्म पर लाने पर रहता है जिन्होंने इससे पहले कभी ऑनलाइन खरीदारी नहीं की थी। क्या इस साल कुछ अलग था?
हमारे उपभोक्ताओं की संख्या करीब दोगुनी हो गई है और इनमें से करीब एक तिहाई नए उपभोक्ता हैं। पिछले साल हमारे एक तिहाई से थोड़ा कम उपभोक्ता नए थे और इस बार यह संख्या एक तिहाई से थोड़ा ऊपर है। हमारे कुल सक्रिय सदस्यों की संख्या दोगुनी हो गई है।

ई-कॉमर्स में एक दिलचस्प बात यह देखी जा रही है कि सदस्यता आधारित मॉडलों के जरिये उपभोक्ताओं को बरकरार रखा जा रहा है। इस पर आपका क्या कहना है?
देश में उपभोक्ताओं को बरकरार रखने की दर बहुत कम है लेकिन इस साल हम इस पर बहुत जोर दे रहे हैं। हम इसमें कुछ सुधार देख रहे हैं लेकिन आने वाले दिनों में इसका वास्तविक परिणाम देखने को मिलेगा। परचून और किफायती फैशन सामान की श्रेणी के साबित कारोबारी मॉडल के रूप में स्थापित होने के बाद देश में उपभोक्ताओं को बरकरार रखने की दर में तेजी आएगी। अभी तक सदस्यता आधारित ई-कॉमर्स मॉडल नहीं बना है। कुछ कंपनियां लॉयल्टी प्रोग्राम के नाम पर आपूर्ति लागत में छूट दे रही हैं लेकिन हम बाजार को इस रूप में नहीं देख रहे हैं। हमारा मानना है कि उपभोक्ता भी ऐसा नहीं सोचते हैं।

नकदी फूंकने के बाारे में आपके हालिया बयानों से लगता है कि फ्लिपकार्ट पिछले डेढ़ साल से अपने कारोबार को दुरुस्त करने में लगी है?
किसी भी कंपनी के जीवनचक्र में हर चरण में कुछ प्राथमिकताएं होती है, खासकर तब जब वह बाजार की अगुआ हो। पिछले साल हमारा जोर उपभोक्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी को फिर से हासिल करना और नकदी फूंकने में भारी कमी करना था। अब हमने इस लक्ष्य को हासिल कर लिया है तो ये हमारी प्राथमिकताएं नहीं हैं।

ई-कॉमर्स का बाजार बढ़ाने पर क्या काम हो रहा है?
हम ई-कॉमर्स बाजार का विस्तार करने जा रहे हैं, यह बाजार की अगुआ कंपनी होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है। बीबीडी जैसे आयोजन का यही मकसद है। यह हमें अपनी नई रणनीतियों के साथ प्रयोग करने का मौका देता है और बाजार में नई चीज लाता है। मैं साफ करना चाहता हूं कि हमें इसे नकदी फूंकने से अलग करना चाहिए। भारत में ई-कॉमर्स में हम इस स्थिति में नहीं हैं कि जहां हर चीज के लिए आपको बहुत पैसा फूंकने की जरूरत है। उदाहरण के लिए हम बीबीडी से केवल 10 दिन पहले ही फर्नीचर श्रेणी लाए थे और ब्रिकी के पहले 3 दिन में ही सारा माल खत्म हो गया। मैं आप इसलिए बता रहा हूं कि यह बाजार का विस्तार है लेकिन यह श्रेणी मार्जिन पर चलती है। हमें बाजार का विस्तार करने और नकदी फूंकने, दोनों को अलग करना चाहिए।

आपके फ्लिपकार्ट में आने के बाद दूसरी बार बीबीडी सफल रही है और आपका दावा है कि बाजार हिस्सेदारी के हिसाब से आपका दबदबा है। आगे की क्या रणनीति है?
यह केवल बाजार हिस्सेदारी की ही बात नहीं है। सबसे अहम बात यह है कि आप कैसे बड़ी संख्या में लोगों को अपने प्लेटफॉर्म पर खरीदारी के लिए लाते हैं। देश में हमारे सामने यह एक बड़ी चुनौती है। हमारे पास 13-14 करोड़ पंजीकृत उपभोक्ता हैं, उनमें से 30, 40, 50 फीसदी को कैसे हम हर महीने खरीदारी के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर लाते हैं। जब हम उस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे तभी मैं इस बारे में बता पाऊंगा।

स्नैपडील ने जहां छोड़ा था, पेटीएम ने वहां से शुरुआत की है और बाजार में बहुत पैसा है। क्या एक बार फिर गलाकाट स्पद्र्घा होगी या फिर जिम्मेदारी से आगे बढ़ा जाएगा?
हमने बाजार में विस्तार का एक तरीका निकाल लिया। वह यह है कि नए उत्पादों को लाइए, कुछ नया करिए और वह भी नकदी फूंके बिना। मैं दूसरी कंपनियों की बात नहीं करता लेकिन हमारी तो यही रणनीति है। हम गैरजिम्मेदाराना तरीके से पैसे फूंकना शुरू नहीं करेंगे और इसमें हमारी नीति स्पष्ट है।

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