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प्रोत्साहन पर विराम! आएगा बजट खर्च बढ़ाने का पैगाम

निवेदिता मुखर्जी / नई दिल्ली September 24, 2017

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुप्रतीक्षित घोषणा से एक दिन पहले सरकार के एक शीर्ष सूत्र ने बताया कि सरकार का जोर अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए राहत पैकेज देने के बजाय मंत्रालयों और विभागों के बजट व्यय को तेजी से खर्च करने पर है। सूत्र ने बताया कि सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्टï्रीय कार्यकारिणी में मोदी के भाषण में सरकार की सामाजिक योजनाओं पर ज्यादा जोर होगा। इस बैठक के साथ ही सालभर चले भाजपा के प्रेरणास्रोत दीनदयाल उपाध्याय के जन्मशती समारोहों का भी अंत हो जाएगा। सूत्र ने कहा कि विभिन्न मंत्रालय और विभाग बजटीय आवंटन को खर्च करने में सुस्त रहे हैं और सरकार इससे जुड़ी कमियों को दूर करने के लिए पूरा प्रयास कर रही है। सूत्र के मुताबिक रेलवे, सड़क और स्वास्थ्य मंत्रालय बजटीय आवंटन को खर्च करने में सुस्त रहे हैं। सूत्र ने कहा, 'उनके पास पैसा पड़ा है पहले उन्हें वह पैसा खर्च करने दीजिए।'
 
वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में जीडीपी की वृद्घि दर 5.7 फीसदी रही जो राष्टï्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के कार्यकाल में सबसे कम है। जबसे ये आंकड़े आए हैं तबसे सरकार लगातार उद्योग को यह संकेत दे रही है कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हरसंभव उपायों पर चर्चा की जा रही है। पिछले सप्ताह कई मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों ने इस पर चर्चा की और अंतिम फैसला प्रधानमंत्री पर छोड़ दिया। जेपी मॉर्गन द्वारा आयोजित निवेशक सम्मेलन में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'जल्दी ही हम आपको इस बारे में बताएंगे।' सरकार जल्दी ही 40-50 हजार करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा कर सकती है जिससे इस वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.2 फीसदी तक रखने का लक्ष्य गड़बड़ा सकता है। हालांकि सरकार ने अब तक राहत पैकेज के बारे में कोई  पुष्टिï नहीं की है। इस बात की उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री सोमवार को इसकी घोषणा कर सकते हैं। पिछले शुक्रवार को बाजारों में पिछले 10 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट आई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि राहत पैकेज पर हो रही चर्चा का भी इसमें थोड़ाबहुत हाथ था।
 
लेकिन अब साफ है कि सरकार इस मुद्दे को ठंडा करने में लगी है। 3.2 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूकन की संभावना के बारे में पूछने पर एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर सरकार सार्वजनिक बैंकों के पुनर्पूंजीकरण से बैलेंस शीट मजबूत करने के लिए कदम उठाती है तो इस बारे में दिसंबर में कोई फैसला हो सकता है। अधिकारी ने कहा, 'ये जटिल मुद्दे हैं और इन पर किसी भी समय मनमाने ढग़ से फैसला नहीं किया जा सकता है।'
 
यह पूछने पर क्या एयर इंडिया में विनिवेश से राहत पैकेज की कुछ भरपाई की जा सकती है, सूत्र ने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी। सूत्र ने कहा, 'अनुरोध प्रस्ताव के बाद ही बोलीदाता आगे आएंगे। अभी कोई बोलीदाता नहीं है। अभी इस बात पर भी फैसला नहीं हुआ है कि विदेशी निवेशकों को बोली लगाने की अनुमति दी जाएगी या नहीं।' अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की चर्चा करते हुए अधिकारी ने कहा कि आवास क्षेत्र को सहारे की जरूरत है। किफायती आवास के लिए नीति बन चुकी है और फंड भी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन की कमी इस सरकार के सम्मुख एक प्रमुख चुनौती है। कौशल विकास मंत्रालय के प्रशिक्षु कार्यक्रम की रफ्तार भी बहुत सुस्त रही है। अधिकारी ने कहा, 'हमें यह जानने की जरूरत है ऐसा क्यों हुआ। साथ ही इसे दुरुस्त करने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है।' सरकार लघु और मझोले उद्योगों को वस्तु एवं सेवा कर के तहत ऋण लेने में आ रही दिक्कतों से भी वाकिफ है। अधिकारी ने कहा, 'हम इन दिक्कतों को दूर करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।' अगला आम बजट फरवरी, 2018 को पेश किया जाएगा जिसमें अर्थव्यवस्था की तेज वृद्घि की राह में आ रही अड़चनों को दूर करने के उपाय किए जाने की संभावना है। लेकिन अधिकारियों ने कहा कि अगले बजट की रूपरेखा अगले दो महीने में विकसित होगी और इसका राजनीतिक संदेश केवल जनवरी में ही स्पष्टï हो पाएगा।
Keyword: budget, narendra modi,,
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