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गति-प्रगति की व्‍यवस्‍था : अर्थव्यवस्था को सान देंगे मकान

संजीव मुखर्जी और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 09 20, 2017

विकास को और रफ्तार

► जेटली ने कहा, प्रधानमंत्री और दूसरे मंत्रियों से बातचीत के बाद उठाए जाएंगे और कदम
मकान और सामाजिक क्षेत्र पर देगी जोर
वित्तीय राहत पर अभी पसोपेश
रिजर्व बैंक को दरों में कटौती और रुपये के अवमूल्यन के लिए देगी सलाह
विकास से ज्यादा रोजगार की चिंता

अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को गति देने के लिए सरकार कुछ उपायों की घोषणा कर सकती है। इनमें आवास क्षेत्र में जोर देना और सामाजिक क्षेत्र में बदलाव कर रोजगार बढ़ाना शामिल है। हालांकि सूत्रों के अनुसार सरकार निर्यातकों और निर्माताओं को राहत पैकेज की घोषणा को लेकर असमंजस में है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय इन दो क्षेत्रों के लिए राहत पैकेज की मांग कर रहा है।

सरकार रिजर्व बैंक को नीतिगत दरों में कटौती करने और रुपये के अवमूल्यन के लिए दखल देने के लिए भी कहेगी। आज केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह तो नहीं बताया कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए किस तरह के उपाय किए जाएंगे लेकिन कहा कि प्रधानमंत्री, अन्य मंत्रियों, अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा करने के बाद इनकी घोषणा की जाएगी।

सूत्रों ने कहा कि सरकार विकास की मुख्य दर जीडीपी में गिरावट से ज्यादा चिंतित नहीं है। जीडीपी बढ़ोतरी की रफ्तार इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 5.7 फीसदी रह गई है जो मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में सबसे कम है। सूत्रों के मुताबिक जीडीपी की वृद्घि में गिरावट से सरकार में घबराहट नहीं है। यह गिरावट जीएसटी लागू होने से पहले उद्योग द्वारा अपने सामान बेचने की वजह से भी हो सकती है। जुलाई में भी सामान बेचने का असर दिख सकता है। एक सूत्र ने कहा कि इस समय सरकार अर्थव्यवस्था के सभी संकेतकों पर नजर रखे हुए है। जीएसटी के अगस्त के आंकड़ों से कुछ संकेत मिलेगा कि अर्थव्यवस्था किस दिशा में है। जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 1.2 फीसदी की रफ्तार से बढ़ा जबकि जून में यह 0.17 फीसदी गिरा था। 

सरकार रोजगार को लेकर ज्यादा चिंतित है। रोजगार पैदा करने के लिए वह आवास क्षेत्र खासतौर पर सस्ते घरों को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है। इससे निर्माण और रियल एस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा जहां सबसे ज्यादा रोजगार पैदा होते हैं। एक विचार यह भी है कि सरकारी उपक्रमों के पास मौजूद जमीन के बड़े हिस्से को ले लिया जाए और वहां सस्ते मकान बनाए जाएं। यह रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन का काम करेगा क्योंकि भूमि अधिग्रहण सबसे बड़ी समस्या है। सरकारी उपक्रमों की जमीनें ज्यादातर प्रमुख शहरों में हैं और अगर ठीक से विकास किया जाए तो इस क्षेत्र में जोरदार उछाल आ सकती है।

सरकार ने आज इसकी शुरुआत करते हुए अपने नियंत्रण वाले 17 प्रिंटिंग प्रेस का 5 इकाइयों में विलय करने का फैसला किया। इससे करीब 468 एकड़ भूमि मिलेगी। दूसरा कदम मनरेगा और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क जैसी सामाजिक योजनाओं में संशोधन का है। मकसद यह है कि इनके जरिये गांवों और कस्बों में अस्थायी और स्थायी दोनों तरह के रोजगार उपलब्ध कराए जाएं। लेकिन इसके लिए कानून में कुछ संशोधन करना पड़ सकता है। संसद की मंजूरी लेने में समय लगा तो सरकार अध्यादेश के जरिये भी ये कदम उठा सकती है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में एक वर्ग चाहता है कि निर्यात और विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए इन क्षेत्रों को वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाए। लेकिन वित्त मंत्रालय समेत दूसरे कुछ वर्गों का मानना है कि इससे राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.2 फीसदी के स्तर पर रख पाना मुश्किल होगा। इस साल के पहले 4 महीनों में ही यह घाटा बजट अनुमान का 92 फीसदी तक पहुंच गया है। वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने भी आज कई ट्वीट कर कहा, 'निर्यात में बढ़ोतरी हमारी प्राथमिकता है। हम निर्यातकों की चिंता दूर करने के लिए काम कर रहे हैं।' इन मसलों में निर्यातकों को जीएसटी के तहत कर रिफंड शामिल है। 

जो लोग प्रोत्साहन देने का विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि पिछली यूपीए सरकार के दौरान भी इनकी घोषणा की गई थी और इनसे अर्थव्यवस्था को खास मदद नहीं मिली थी। जीएसटी लागू होने की वजह से अब अप्रत्यक्ष करों में बहुत ज्यादा फेरबदल की गुंजाइश नहीं है। इसलिए प्रत्यक्ष करों और पूंजी खर्च के जरिये ही ये प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। रिजर्व बैंक अगले महीने मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा।

हालांकि महंगाई, खासकर पेट्रोल के दाम को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है लेकिन वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि अगस्त का मुद्रास्फीति का आंकड़ा वैधानिक सीमा में है। उन्होंने संकेत दिया कि पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में कटौती नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने विरोध करने वाले दलों से कहा कि पहले वे अपने राज्यों में वैट में कटौती कराएं।

जेटली ने कहा कि मॉनसून में सब्जियों की कीमतें बढ़ती हैं जिससे महंगाई में इजाफा होता है। उन्होंने कहा कि बढ़ोतरी के ऐसे दौर में मुद्रास्फीति सीमा के भीतर है। वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोल पदार्थों पर उत्पाद शुल्क में से 42 फीसदी हिस्सा राज्यों को जाता है। अब कांग्रेस और वाम शासित राज्य फैसला कर लें कि उनको यह हिस्सा चाहिए या नहीं। जेटली ने कहा कि जो राजनीतिक दल पेट्रोल की कीमतों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं वे अपनी अंतरात्मा का निरीक्षण करें कि उनके शासन काल में कीमतें कहां थीं। 
Keyword: विकास, मकान, सामाजिक क्षेत्र, अवमूल्यन, रोजगार, आवास क्षेत्र, राहत पैकेज, जीडीपी,
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