बिजनेस स्टैंडर्ड - गलत समय पर सही कदम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, October 19, 2017 07:44 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

गलत समय पर सही कदम

संपादकीय /  September 20, 2017

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूसरे नेटवर्क पर समाप्त होने वाली कॉल पर लगने वाले इंटरकनेक्शन यूजेज चार्ज (आईयूसी) को आधे से भी अधिक घटाकर 6 पैसा प्रति मिनट करने का निर्णय लिया है। यह आगामी 1 अक्टूबर से प्रभावी होगा। यह भी कहा गया है कि सन 2020 से इसे तमाम लोकल कॉल के लिए समाप्त कर दिया जाएगा। यह व्यापक अकादमिक कवायद के बाद हुआ है। नियामक अतीत में भी इसमें कमी कर चुका है और उसे एक बार पुन: वह राह लेने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता। 

 
वैश्विक स्तर पर इसके लिए यही तरीका अपनाया जाता है और यह किसी दृष्टिï से मनमाना नहीं है। आईयूसी का पहला नियमन सन 2003 में सामने आया था और सन 2004 में यह 30 पैसे था। सन 2009 में इसे कम करके 20 पैसे किया गया और सन 2010 में दूरसंचार कंपनियों और ट्राई के बीच अदालती जंग के बाद यह लागू हुआ। सन 2015 में एक बार फिर संशोधन करके इसे 14 पैसे कर दिया गया। 
 
ट्राई की यह दलील सही है कि बिना प्रभावी आपसी संबंध के बाजार अलग-थलग रूप में ही रहेगा और बाजार विस्तार से जुड़े आर्थिक लाभ तथा उदारीकरण के लाभ सीमित रह जाएंगे। यह सच है कि मौजूदा दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियां मोटे तौर पर प्रचलित प्रौद्योगिकी पर ही निर्भर रहती हैं। जबकि नई आने वाली कंपनी मसलन रिलायंस जियो ने आधुनिक तकनीक अपनाकर लागत काफी कम कर ली। कुलमिलाकर कॉल संबंधी प्रौद्योगिकी बदल चुकी है या तेजी से बदल रही है। अब सर्किट स्विचिंग का स्थान पैकेट्स ने ले लिया है। चूंकि कॉल समाप्त करने की लागत पैकेट्स में कम आती है इसलिए ट्राई का यह कहना सही है कि उसका काम कम लागत वाली प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाना भी है।
 
बहरहाल, इस बात पर बहस हो सकती है कि क्या नियामक को ऐसा अहम फैसला लेते हुए इस बात पर विचार करना चाहिए। किसी भी नियामक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती है वह ऐसे फॉर्मूले के आधार पर निष्कर्ष निकाले जो दुनिया भर में प्रचलित हों, जबकि इस दौरान वह घरेलू परिस्थितियों पर नजर न डाले। इस समय दूरसंचार उद्योग निहायत तंग आर्थिक हालात से गुजर रहा है और ऐसे में कहा जा सकता है कि ट्राई यह फैसला कहीं अधिक बेहतर वक्त पर ले सकता था। एक अनुमान के मुताबिक दूरसंचार उद्योग पर बैंकों का करीब 4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। कुछ सेवा प्रदाता तो बंदी के कगार पर हैं। ऐसे में आईयूसी को कम करके 6 पैसे कर देने से इन कंपनियों को करीब 5,000 करोड़ रुपये का झटका पहुंचा सकता है। क्या इस संकट की घड़ी में ऐसा वित्तीय झटका देने से बचा नहीं जा सकता था? 
 
अतीत में आईयूसी में कमी के चलते कॉल दरों में कमी आ सकती थी लेकिन मौजूदा हालात में ट्राई के कदम के बाद दरों में कमी होगी या नहीं यह कहा नहीं जा सकता। दरअसल दरें पहले ही बहुत नीचे हैं। कंपनियों का मुनाफा भी इससे प्रभावित हो रहा है। हालात को देखते हुए ही मौजूदा कंपनियां आईयूसी में कम से कम यथास्थिति की मांग कर रही थीं। रिलायंस जियो की 90 फीसदी आउटगोइंग कॉल दूसरे नेटवर्क पर होती हैं। जबकि अन्य कंपनियों में मामला अपेक्षाकृत संतुलित है। यही वजह है कि जियो आईयूसी शुल्क को समाप्त करने की मांग कर रहा था। अगर सभी दूरसंचार सेवा प्रदाता समान आकार के होते तो इस शुल्क को समाप्त करने से शुद्घ राजस्व शून्य होता। परंतु ऐसा नहीं है। ट्राई को शायद ऐसा करने के पहले और अधिक गुणाभाग करना चाहिए था।
Keyword: telecom, दूरसंचार trai,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या स्टेशनों के पास आवासीय परिसर का विकल्प उचित कदम है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.